प्रार्थना
आँखें बंद कर हाथ जुड़ गए,
ऊपर वाले के सामने।
प्रार्थना करते हुए मुँह से निकला –
विधाता ! तुम दाता हो।
तुमसे प्रार्थना है –
जिसने मुझे जो, जितना दिया।
तुम उसे वह दुगना दो!
यह सुन ना जाने क्यों कुछ लोग नाराज़ हो गए।
ज़िंदगी के रंग – 216

Eternal Shine !!
नज़रिया
उन्मुक्त हवा-बयार बंधन में नहीं बँध सकती है।
दरिया में जहाज़ चलना हो,
तो मस्तूल या पाल को साधना होता है।
ख़ुशियाँ चाहिए तब,
नज़र आती दुनिया को नहीं
अपने नज़रिए को साधना होता है।
मेरी नई किताब
गालों पर एक तिल- मेरी यह उपन्यास आज ही पब्लिश हुई है। आपलोगो से अनुरोध है कि इसे पढ़े और अपने मूल्यवान विचार दे। मेरी सभी किताबें अमेजन और किंडल पर उपलब्ध है।
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This one is My latest novel. It’s published today. All my books are on kindle and Amazon.
आपका दिया, आपको समर्पित!
इतनी भी क्या है शिकायतें?
जहाँ जहाँ आप जातें है।
बातें बनाते और सुनाते हैं।
सब हम तक लौट कर आते हैं।
क्यों सब भूल जातें हैं – दुनिया गोल है।
किसी ने क्या ख़ूब कहा है –
पाने को कुछ नहीं, ले कर जाने को कुछ नहीं ।
फिर इतनी भी क्या है शिकायतें?
हम किसी का कुछ रखते नहीं।
आपका दिया आपको समर्पित –
त्वदीयं वस्तु तुभ्यमेव समर्पये ।
फीकी चाय
ना है चाँद-सितारे तोड़ लाने की फ़रमाइश।
ना हीरे-मोती, गहने, पाजेब चाहिेए।
नहीं चाहिये गुलाब, कमल, गेंदे या अमलतास।
वापस आ सकोगे क्या?
अकेले चाय पीते-पीते दिल उब सा गया है।
बस एक कप फीकी चाय का साथ चाहिए ।
TIME’s First-Ever Kid of the Year
Gitanjali Rao is 15 year old, an Indian-American inventor, author, scientist, and science, technology, engineering, and mathematics promoter.

मधुमेह उपचार में ध्यान व निष्काम कर्म की भूमिका !
यह पोस्ट भारतीय योग संस्थान द्वारा आयोजित शिविर के लिए लिखा गया है।
सभी साधकों और वरिष्ठ ज्ञानी जनों का मधुमेह उपचार शिविर में स्वागत है।
मैं रेखा सहाय हूँ । मैंने मनोविज्ञान की पढ़ाई की है। लेकिन मेरा प्रिय विषय है – अाध्यात्म। मैं अक्सर मनोविज्ञान, विज्ञान अौर योग विज्ञान को अाध्यात्मिकता के नजरिया से समझने की कोशिश करती रहती हूं। दरअसल विज्ञान, मनोविज्ञान या अध्यात्म का उद्देश्य एक ही है – मनुष्य को स्वस्थ जीवन प्रदान करना।
लेकिन इनके तुलनात्मक अध्ययन में मैनें हमेशा पाया है कि योग अौर अाध्यात्म बेहद महत्वपुर्ण है । निष्काम कर्म व ध्यान मधुमेह के साथ-साथ सभी रोगों में लाभदायक हैं। यह हमें अाध्यात्मिकता की अोर भी ले जाता है।
सबसे पहले मैं विज्ञान अौर मधुमेह रोग की बातें करती हूं। रिसर्चों के आधार पर विज्ञान ने आज मान लिया है कि मानसिक और शारीरिक स्ट्रेस या तनाव हमारे ब्लड शुगर लेवल को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ऐसे में शरीर में कुछ हानिकारक हार्मोन भी रिलीज होने लगते हैं। इन्हें नियंत्रित करने का एक अच्छा उपाय हैं ध्यान लगाना और खुश रहना है। शोधों से पता चला है कि माइंडफुलनेस यानि हमेशा खुश रहने की प्रैक्टिस टाइप 2 डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवेल को कम करती है।
अब मनोविज्ञान की बातें करें । मनोविज्ञान का मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए हमारा खुश रहना जरूरी है और ये खुशियां हमारें ही अंदर हैं। जब हम बिना स्वार्थ के, दिल से किसी की सहायता करते हैं। किसी के साथ अपनी मुस्कुराहटे बांटते हैं, अौर ध्यान लगाते हैं। तब हमारे शरीर में कुछ हार्मोन सीक्रिट होते हैं। जिसे वैज्ञानिकों ने हैप्पी हार्मोन का नाम दिया है। ये हैप्पी हार्मोन हैं – डोपामिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटॉसिन और एस्ट्रोजन।
यानी विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों के अनुसार, जब हम ध्यान लगाते हैं अौर निष्काम कर्म करते हैं। तब हमारे अंदर हैप्पी हार्मोन स्त्राव से खुशियां अौर शांती उत्पन्न होती है। जो स्वस्थ जीवन के लिये जरुरी है। विज्ञान और मनोविज्ञान के ऐसे खोजों से विदेश के यूनिवर्सिटीज में हैप्पीनेस कोर्सेज अौर योग के क्लासेस शुरू होने लगे। आप में से बहुत लोग जानते होगें। आज के समय में हावर्ड यूनिवर्सिटी में पॉजिटिव साइकोलॉजी का हैप्पीनेस स्टडीज बेहद पॉपुलर कोर्स है। इस के अलावा 2 जुलाई 2018 में दलाई लामा की उपस्थिति में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी हैप्पीनेस कोर्स लांच किया गया।
अब अध्यात्म की बातें करते हैं । आज मनोविज्ञान और विज्ञान स्वस्थ जीवन के लिए हारमोंस को महत्वपूर्ण मानते हैं। मेरे विचार में, हमारे प्राचीन ज्ञान आज से काफी उन्नत थे। हमारे प्राचीन ऋषि और मनीषियों ने काफी पहले यह खोज लिया था कि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अाध्यात्म – यानि ध्यान, योग, निष्काम कर्म आदि हीं सर्वोत्तम उपाय है। किसी भी परिस्थिती में संतुलित रहना, शांत रहना, सकारात्मक या पॉजिटिव और खुश रहना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। आधुनिक शोधों में पाया गया कि योग, ध्यान और निष्काम कर्म से शरीर में हैप्पी हार्मोन सीक्रिट होते हैं । ध्यान व निष्काम कर्म सभी हार्मोनों के स्त्राव को संतुलित भी रखतें हैं। यह हमारे मानसिक व शारीरिक स्वास्थ के लिये महत्वपूर्ण हैं।
अब एक बात गौर करने की है। हमारे शरीर में जहां-जहां हमारे ध्यान के चक्र है। हार्मोन सीक्रिट करने वाले ग्लैंडस भी लगभग वहीं वहीं है। यह इस बात का सबूत है कि विज्ञान आज जहां पहुंचा है। वह ज्ञान हमारे पास अाध्यात्म के रूप में पहले से उपलब्ध है। सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि योग, ध्यान और निष्काम कर्म यही बातें सदियों से हमें बताते आ रहा है। यह संदेश भगवान कृष्ण ने गीता में हमें हजारों वर्ष पहले दे दिया था –
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
भगवान श्री कृष्ण कहते हैं- कर्मयोगी बनो। फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य और अच्छे कर्म करो।| निष्काम कर्म एक यज्ञ हैं। जो व्यक्ति निष्काम कर्म को अपना कर्तव्य समझते हैं। वे तनाव-मुक्त रहते हैं | तटस्थ भाव से कर्म करने वाले अपने कर्म को ही पुरस्कार समझते हैं| उन्हें उस में शान्ति अौर खुशियाँ मिलती हैं |
योगसूत्र के अनुसार –
तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम।। 3-2 ।।
अर्थात जहां चित्त को लगाया जाए । जागृत रहकर चित्त का उसी वृत्त के एक तार पर चलना ध्यान है । ध्यान अष्टांग योग का सातवां महत्वपूर्ण अंग है। ध्यान का मतलब है भीतर से जाग जाना। निर्विचार दशा में रहना ही ध्यान है। ध्यान तनाव व चिंता के स्तर को कम करता है। मेडिटेशन मन को शांत और शरीर को स्वस्थ बनाता है। यह हमें आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाता है।
योग, ध्यान, निष्काम कर्म का ज्ञान बहुत पहले से हमारे पास है। लेकिन भागती दौड़ती जिंदगी में हम सरल जीवन, निष्काम कर्म अौर ध्यान को भूलने लगे हैं। मधुमेह या अन्य बीमारियां इस बात की चेतावनी है कि हमें खुशियों भरे स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए योग, ध्यान, और निष्काम कर्म की ओर जाना होगा। मधुमेह रोग के उपचार में ध्यान और निष्काम कर्म बेहद लाभदायक पाये गये हैं। आज खुशियों और शांति की खोज में सारी दुनिया विभिन्न कोर्सेज के पीछे भाग रही है, ऐसे में हम सब भाग्यशाली हैं कि हमें विरासत के रूप में आध्यात्म का ज्ञान मिला है। इसलिए रोग हो या ना हो सभी को स्वस्थ्य और खुशियों भरा जीवन को पाने के लिए ध्यान तथा निष्काम कर्म का अभ्यास करना चाहिये। क्योंकि
Prevention is better than cure.
आशा है, ये जानकारियाँ आप सबों को पसंद आई होगी।धन्यवाद।
हमेशा खुश रहे! हमेशा स्वस्थ रहें!
जिंदगी के रंग – 216
जीवन एक यात्रा है, हम सब मुसाफिर हैं।
चलते जाना है।
किसकी मंजिल मालूम नहीं कहां है।
मिलना एक इत्तेफाक है।
जाने जिंदगी के किस मोड़ पर कब कौन मिल जाए
और कब कहां बिछड़ जाए।
ना जाने कब कोई सफर अधूरा छोड़ चला जाए।
इस धूप- छाँव से सफर में
जब मरहम लगाने वाला अपना सा कोई मिल जाता है।
तब दोस्तों का एक कारवां बन जाता है।
कुछ लोगों से मिलकर लगता है,
जैसे वे जाने पहचाने हैं।
जिंदगी का सफर है इस में चलते जाना।
मिलना बिछड़ना तो लगा ही रहेगा।
जीवन एक यात्रा है, हम सब मुसाफिर हैं।
बस चलते जाना है।
यह कविता आदरणीय मनोरमा जी अौर अनिल जी को समर्पित है. जो किसी कारणवश दूसरे शहर में शिफ्ट हो रहे हैं.
This poem is dedicated to respected Anil ji and Manorama ji on their farewell.




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