COVID-19 vaccine for 50+

Registration for inoculation will open any day now for senior citizens.Pl keep watching the CoWin site and app linked below. As yet both are only open for viewing and login by vaccinators. But the option to register could pop up sometime after Feb 15. When it does, you can register with your PAN card no and other details as required. You will be able to opt for the hospital most convenient to you. Once accepted, you will get an SMS confirming your registration with a 14 digit registration no. In due course after that you will get another SMS giving you a date and time for vaccination at the hospital you opted for. If you are particular about which vaccine you would like to take, pl check with the hospital of your choice about which one they are allotted.
https://www.cowin.gov.in/home
Pls forward to all citizens above 50.

Received as forwarded message.

द इंटरनेशनल डे ऑफ पिंक The International Day of Pink

द इंटरनेशनल डे ऑफ पिंक – यह बुलिंग के विरोध में अप्रैल के दूसरे सप्ताह में गुलाबी कपड़े पहन कर होने वाला एक इंटरनेशनल इवेंट है । यह संदेश देता है कि दूसरों को बूली करने वाले लोगों को कभी बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

बुलिंग क्या है – कुछ कम या लो सेल्फ स्टीम वाले लोग अक्सर, बार-बार दूसरों के साथ क्रूर, अपमानजनक और आक्रामक व्यवहार करते हैं। कुछ देशों में के इसके खिलाफ कानून भी है।

 

The International Day of Pink -This is an international anti-bullying event held in second week of April. People with low self-esteem  sometime treat (someone) in a cruel, insulting, threatening, or aggressive fashion. This harmful behavior is often repeated and habitual. This abusive behaviour have laws against it in some places.

Bullying is never fun; it’s a cruel and terrible thing to do to someone. If you are being bullied, it is not your fault. No one deserves to be bullied, ever. ~~Raini Rodriguez

 

 (Anti-Bullying DayAnti-Bullying WeekInternational Day of PinkInternational STAND UP to Bullying Day and National Bullying Prevention Month. )

क़तरा-ए-कालकूट

अर्थ – क़तरा- बूँद ड्रॉप, कालकूट – ज़हर poison, कैफ़ियत- बहाना excuse, रूह – आत्मा soul, अल्फ़ाज़ -शब्द .

आँखें

दो आँखों का रिश्ता-
बेहद अज़ीब है।
दोनों करीब है।
ये रोती साथ हैं।
 हँसती भी साथ-साथ हैं।
किसी से  नफरत हो या मुहब्बत,
एक साथ करतीं हैं।
पर इनका ना कभी है सामना ना मुलाकातें।
एक दूसरे से अजनबी, नावाकिफ, अपरिचित।
नज़रों से नज़ारा  देखतीं हैं ये एक साथ।
सारा जहाँ देखती हैं साथ।
पर ना देखा कभी एक दूसरे को।
कभी सामना हुआ भी तब,
तैरते अक्स आईने में दिख रहें हों जब।

ज़िंदगी के रंग – 215

देवत्व की दिव्यता ( डिग्निटी डिविनिटी)

Dignity Foundation hosted digital event of 2021, opting for the theme to be “spirituality. This video is included in Dignity Divinity, Part 1। Its also available on youtube.

Rate this:

                           

 

चले थे शिकायतों की पोटली ले ऊपर वाले के पास.
आवाज आई,
एहसान फ़रामोश ना बनो.
तुम्हारा अपना क्या है?
ज़िंदगी? तन? धन? या साँसे?
कुछ भी नहीं।
सब मिला है तुम्हें
दाता से उधार, ऋण में. 
बस हिफ़ाज़त से रखो.
जाने से पहले सब वापस करना है.
 

 

 मैंने नजरें उठाई, खुले विस्तृत नीले आकाश की ओर देखा और ऊपर वाले से पूछा। ईश, रात में सोने से पहले और सुबह उठने के बाद तुमसे बातें करती हूं। हर तरफ तुम्हारी ही आभा बिखरी दिखती है.  अपनी हर परेशानी  और कामना तुम्हें बताती हूं। अब तुम्हारे देवत्व और दिव्यता के बारे में क्या कहूं?  तुम्हें परिभाषा में बांधना असंभव है।तुम मेरे लिये क्या हो? तुम्हीं बताअो। 

 ऊपर वाले ने जवाब दिया – “जो मैं हूं वह तुम हो. तुम मेरा ही अंश हो। तुम्हारी यात्रा मुझ तक पहुंचने की है. चाहे जो भी राह या धर्म अपना लो. योग, प्राणायाम, ध्यान जिस विधि मुझे पा लो. मेरी हर रचना में मुझे ही देखो, यही मेरी सबसे बड़ी उपासना है।

हमने  कहा – अगर तुम और हम एक ही हैं. तब तुमने मुझे इतना गहरा आघात, इतनी चोटें क्यों दीं? जानते हो ना,  जिंदगी के मझधार में हमसफर का खोना कितना दुखदाई है। ऊपरवाला थोड़ा हिचकिचाया। फिर वह धीरे से मुस्कुराया और बोला – यह जीवन यात्रा है। इसमें   जन्म-मृत्यु,  दुख-सुख तो लगा ही रहेगा। राम और कृष्ण बन कर मैं भी तो इनसे गुजरा हूं। सच कहो तो, मैं तुम्हें तराश रहा था। ठीक वैसे जैसे तराश कर हीं पाषाण या संगमरमर से कलात्मक कलाकृति बनती है। जीवन का हर चोट बहुत कुछ सिखाता है. आत्मा और परमात्मा के करीब लाता है। अपने अंतर्मन के अंदर यात्रा करना सिखाता है. बस टूटना नहीं, मजबूत बने रहना अौर याद रखना –

When the world pushes you to your knees,
you’re in the perfect position to pray. 
Wherever you are,
and whatever you do,
be in love with me. 

 

डिग्निटी फाउंडेशन ने “आध्यात्मिकता” 2021  पर वीडियो आमंत्रित किया  था। मेरे इस वीडियो का चयन “डिग्निटी डिविनिटी -भाग 1” मे किया गया। यह यूट्यूब पर उपलब्ध है।

शुभ नव वर्ष ! Happy new year!

सिर्फ़ गिनती और तारीख़ों में बदलेगा नया साल।

यादों और ख़्वाहिशों में तो सिर्फ़ तुम हीं रहोगे।

पावा कढ़ाइगल -थांगम, समीक्षा (Paava kathaigal – Thangam Netflix, Movie Review )

Heart touching story of a trans woman Sattaar who is hated and isolated by everyone in his village .

Rate this:

मुझे लगता है  मूवी रिव्यु लिखना, किसी फिल्म की बारीकियों को समझने और अभिव्यक्त करने की कला है। इस कला में मैं अनाड़ी हूं। मैंने आज तक रिव्यु नहीं लिखा हैं। यह मेरा पहला प्रयास है। यह मैं किसी के अनुरोध पर लिख रही हूं। मुझे नहीं पता, मैं इस समीक्षा के साथ कितना न्याय कर पा रही हूं । आपके विचार सादर आमंत्रित है।

“पावा कढ़ाइगल ” मैं ने नेटफ्लिक्स पर देखी । इसकी पहली कहानी “थांगम/ सोना” ने मेरे दिल को छू लिया। सत्तार का चरित्र बिल्कुल सच्चाई के करीब और मार्मिक है। जिसे मैं भूल नहीं पा रही। इसलिए मुझे यह ख्याल अच्छा लगा कि अपने दिल की बातों को पन्ने पर उतार दूं। इसके इंट्रो में बेहद खूबसूरती से, लाल रंग को नारी  जीवन के बदलावों के प्रतीक रूप में दिखाया गया है। थंगम एक ट्रांस ग्रामीण की कहानी है। कहानी का नायक, युवा सत्तार पुरुष शरीर में फंसा नारी मन है। जिसमें नारी सुलभ ईर्ष्या, प्रेम, नारी बनने की ख्वाहिश और सजने सँवरने की लालसा है। उसका सपना है अपना ऑपरेशन करा कर एक संपूर्ण नारी बनना। वह दिल से नारी है। इसलिये किसी सामान्य युवती की तरह वह अपने बचपन के मित्र सरवनन (शांतनु ) से बेहद प्यार करता है। जिसे वह प्यार से ‘सोना’ बुलाता है। महिला ट्रांसजेंडर सत्तार समाज के क्रूर व्यवहार और बहिष्कार का सामना करता है। सत्तार का एक मार्मिक डायलॉग उसके दिल का दर्द बखूबी बयान करता है –

“जब मैं किसी को छूता हूं तो लोग मुझे गलत समझते हैं या दूर भाग जाते हैं। ऐसे प्यार से मुझे आज तक किसी ने गले नहीं लगाया।”

हम सब अपना दर्द खूब महसूस करते हैं। जरूरी यह है कि दूसरों की तकलीफें भी उतनी ही शिद्दत से महसूस की जाए। ताकि यह खूबसूरत दुनिया और खूबसूरत बन जाए। कहते हैं ट्रांसजेंडर ईश्वरीय भूल है। लेकिन हम अर्धनारीश्वर को पूजते हैं। प्राचीन संस्कृति में किन्नरों को यक्ष और गंधर्वों के बराबर माना जाता था। उन्हें मंगल या शुभ कहते थे। पर आज समाज में तीसरे जेंडर की स्थिति बेहद नाजुक है। जिसे कालिदास और सुधा कोंगारा ने थांगम में अभिव्यक्त किया है। हम भूल जाते हैं कि ट्रांसजेंडर अन्य रचनाओं की तरह हीं ईश्वर की अनोखी और दुर्लभ रचना है। उनके पास भी दिल और भावनाएं होती हैं। जिस का हमें सम्मान करना चाहिए।

तमिल कथा संकलन  ‘पावा कढ़ाइगल’ को हिंदी में ‘ गुनाहों की कहानियां या सिन स्टोरीज’ कह सकते हैं।   थांगम नेटफ्लिक्स की तमिल एंथोलॉजी, ‘पावा कढ़ाइगल’ का हिस्सा है। इस लघु फिल्म को हिंदी, इंग्लिश, तमिल या तेलुगु में देखने के ऑप्शन उपलब्ध है। इस का संगीत मधुर है अौर बहते झरने के आसपास का दृश्य मनोहर है।

गौतम मेनन, वेत्रिमरन, सुधा कोंगारा और विग्नेश शिवन की समाज की कालिमा अभिव्यक्त करती हुई लाजवाब लघु फिल्म है। जो समाज के कई पक्षों के बारे में सोचने के लिए मजबूर करती है। नायक कालिदास जयराम ने सत्तार के ट्रांस कैरेक्टर एक्टिंग में दिल जीत लिया। अगर आपके पास 45 मिनट समय है। तब इसे जरूर देखें । शायद यह आपके ख्यालात और सोचने का नजरिया बदल दे।

Paava Kadhaigal' review: A largely effective dark anthology- The New Indian  Express

   Paava kathaigal – Thangam on Netflix