आँखों में छाई उदासी देख,
ज़िन्दगी मुस्कुराई और बोली –
फ़िक्रमंद ना हो।
ज़िंदगी की शुरूआत फिर से,
कहीं से भी हो सकती है।
देखो, रोज़ सूर्यास्त होता है।
पर अगले दिन,
अलग हौसले के साथ सूरज निकलता है।
कोशिश मायने रखती है।
परिपूर्ण मत बनो,
वास्तविक बनो।
मान कर चलो कि ज़िंदगी में अच्छा…
सबसे अच्छा समय अभी आना बाकी है।
अपने अंदर की रौशनी कभी मरने न दो।
तुम्हारा अपना सर्वश्रेष्ठ करना ही काफी है।
विश्वास करो।
कुछ सच्चे लोग बुरे समय में
ज़रूर साथ रहेंगे।
तुम अपने लिए जियो,
अपनी ख़ुशियों के लिए जियो,
और मुस्कुराते रहो।









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