
Topic by Your Quote.
फ़ुर्सत मिल जाए तो
दो बातें हम से भी कर लेना।
एक बात तुमसे कहनी थी-
ना ख़ूबसूरती रहती है,
ना जुनून
जब दो एक हो जाते हैं।
बस रह जाता है इश्क़।
“The Whole Is Greater Than The Sum Of Its Parts”. Likewise, The Cornucopian half of this blog encompasses my blog in its entirety which otherwise is scattered into the myriad hats I wear creatively!!

Topic by Your Quote.
फ़ुर्सत मिल जाए तो
दो बातें हम से भी कर लेना।
एक बात तुमसे कहनी थी-
ना ख़ूबसूरती रहती है,
ना जुनून
जब दो एक हो जाते हैं।
बस रह जाता है इश्क़।

ये ज़िंदगी की धुआँ धुआँ हैं आहें।
दुरूह धोखे औ गर्द भरी राहें।
मसला तो यह है कि अपने हीं
मसलते हैं अपनों के दिलों को।
इतिहास भी देता है गवाहियाँ।
लाख कोशिशों के बाद कृष्ण भी हारे।
चाहे रिश्ते लाख निबाहें,
बदली हो जब अपनों की निगाहें।
एक जंग अपनों से…
रोक नहीं सके सारे।
TopicByYourQuote
ना समझो इसे मौन,
खोज़ रहें है, हम हैं कौन?
कर रहे हैं अपने आप से गुफ़्तगू।
हमें है खोज़ अपनी, अपनी है जुस्तजू ।
इश्क़ अपने आप से, अपने हैं हमसफ़र।
छोटी सी ज़िंदगी, छोटी सी रहगुज़र।
रेत हो या वक्त ,
फिसल जाएगा मुट्ठी से कब।
लगेगा नहीं कुछ खबर। 
हम ख़ुशियाँ चुनते रहे।
और ना जाने कब
ज़िंदगी नाराज़ हो गई।
सब कहते रहे …..
एक छोटी सी बात थी।
हम बात तलाशते रहे पर
ना जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ हो गई।

TopicByYourQuote
ज़माने की महफ़िल में मुस्कुरा कर
करते हो बातें।
अपनों से, जाने-अनजानों से।
कुछ अपनी फ़िक्र, अपना ख़याल करो।
ज़माने के रंज-औ-ग़म ना उतारो ख़ुद पर।
चाहिए ग़र ज़िंदगी ख़ुशगवार चुस्त।
अपने-आप से बातें करो वही जो हों दुरुस्त।
Interesting Psychological Fact – Self-talk is
our internal dialogue. It’s influenced by
our subconscious mind, and it reveals
our thoughts, beliefs, questions, and ideas.
Positive Self-talk can enhance your
performance and general well-being.

मुस्कुराती आँखें सबके सामने
ग़ज़ब हैं झिलमिलाती सब के सामने।
चमक आँसुओं के नमी की है
या ख़ुशियों की है?
कैसे जानें?
नज़रों को पढ़ने वाले अब हैं कहाँ?

दिल पर ना जाने कितना बोझ…
पत्थर सा लिए चलते है लोग।
कभी बह जाने दो यह दर्द और सोंच।
तब समझ आएगा दिल का मोल।
पत्थरों की प्रचंड नदियाँ,
झरने तभी बहते होंगे
जब पर्वतों के दिलों पर
बोझ हो जाते होंगे बेबर्दाश्त।

चाँद हो आग़ोश में,
तो सितारों से उल्फ़त नहीं करते।
रौशन हो जहाँ आफ़ताब से,
तो जुगनुओं की रौशनी पर नहीं मरते।


लोग क्या कहेंगे?
अगर सुन रहे हो लोगों की।
तब जी रहे हो उनकी ज़िंदगी,
उनकी बातें,
उनकी ख्वाहिशें।
अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?

You must be logged in to post a comment.