
फिर याद आए वो,
तो ग़मगीन हो जाते हो।
चाह कर भी भूल ना पाए
तो ग़मगीन हो जाते हो।
कभी दुआओं में किसी को माँगते हो।
कभी उसे हीं भूलने की दुआएँ माँगतें हो।
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!

फिर याद आए वो,
तो ग़मगीन हो जाते हो।
चाह कर भी भूल ना पाए
तो ग़मगीन हो जाते हो।
कभी दुआओं में किसी को माँगते हो।
कभी उसे हीं भूलने की दुआएँ माँगतें हो।

चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
सुभद्राकुमारी चौहान
Lakshmi Bai / Laxmi Bai, birth date
November 19, 1835, Kashi, India.
इश्क़ है जागती रातें, उनींदी आँखें, गुनगुनाते गीत।
मुहब्बत है ख़्वाब, सितारे, चिराग़, चाँद
अँधेरी रातें, अधूरा चाँद, अधूरे किस्से।
इस इश्क़ को हीं कहते हैं बंदगी।
हम तो जी रहे हैं यही ज़िन्दगी।
तुम एक बार में लगे टूटने?
हँस कर पूछा चाँद ने।

एक हीं बात के हैं कई नज़रिए।
कहीं कहीं विरोध, कहीं है सपोर्ट।

Popular Iranian actress Hengameh Ghaziani arrested day after appearing in public without hijab: Report
नहीं थी उनको हमारी कदर,
जिसके हम थे सबसे बड़े कदरदान।

हमारी कदर नहीं थी उनको,
जिसके हम सबसे बड़े कदरदान थे।

इक तन्हा चराग़, कमजोर पड़ते लौ से
निशा के गहरे अँधेरे से लड़ता थक सा गया।
रात के आख़री किनारे पर
टिमटिमाते चराग़ के कानों में,
सहर का सितारा बोल पड़ा –
हौसला रख, सुबह के दीप।
कुछ हीं पल में अँधेरा जाने वाला है।
रौशन जहाँ करने,
आफ़ताब आने हीं वाला है,

वो बचपन, वो बेपरवाह एहसास,
वो मासूमियत और भोलापन,
डूबा सच्चाई की चाशनी में।
तितलियाँ हमजोली लगती,
भँवरें ग़ज़लें सुनाते।
वो पारियों की सच्ची लगती कहानियाँ,
वो बेफ़िक्री की नींद।
ख़ुश थे कल वे पानी में
काग़ज़ की कश्तियाँ तैरा कर।
आज पानी भरे सात सागरों के पार
जा आ कर भी डूबे है ज़िंदगी कि उलझनों में।
एक वो ज़माना था, इक ये ज़माना है।
Happy World Children’s Day – 20 November

वो बचपन, वो बेपरवाह एहसास,
वो मासूमियत और भोलापन,
डूबा सच्चाई की चाशनी में।
तितलियाँ हमजोली लगती,
भँवरें ग़ज़लें सुनाते।
वो पारियों की सच्ची लगती कहानियाँ,
वो बेफ़िक्री की नींद।
ख़ुश थे कल वे पानी में
काग़ज़ की कश्तियाँ तैरा कर।
आज पानी भरे सात सागरों के पार
जा आ कर भी डूबे है ज़िंदगी कि उलझनों में।
एक वो ज़माना था, इक ये ज़माना है।
Happy World Children’s Day – 20 November
किसी से मिलते हीं
उसे ना नापो तौलो,
जज ना करो।
सभी किसी ना किसी रूप में पूर्ण हैं
और अपूर्ण भी।
इंसान रूप में ईश्वर ने अवतार लिया,
यही समझाने के लिए,
कि कोई परफ़ेक्ट नहीं।


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