धुआँ (कविता)

smoke

 

नज़रों के सामने धुन्ध सा
छाया था.
सब कुछ धुआँ धुआँ सा था.
तभी हवा चली , धुंध छ्टी
और देखा , ये तो परछाइयां हैं ,
जिन्हे हम इंसान समझ बैठे.

 

shadow

 

 

images from internet.

 

शादी

rrr

रोज़ के झिकझिक से परेशान ,
झूठी बातों  और धोखे से हैरान
जब भी उसने चाहा निकलना
सबने कहा -सात जन्मों का
बंधन हैं.
तुम्हे निभाना हैं.
पावन सम्बन्ध हैं
तुम्हे निभाना हैं.
पर यह तो सचमुच ऐसा बंधन हैं.
जो सिर्फ उसे निँभाना हैं.
ऐसा क्यों ?
काश ये बातें दोनों को कही जाती.

 

 

images from internet.

तरीके और हथियार ( कविता )

w

उसके पति ने कहा ,
सजावट की तरह रहो ,
कौन तुम्हें मदद करेगा ?
यह पुरुषों की दुनियाँ हैं.
सब के सब , कभी न कभी
ऐसे रिश्ते बनाते हैं.
अगर तुमने मेरी जिंदगी मॆं
ज्यादा टाँग अडाई ,
तब सब से कह दूँगा –
                       यह औरत पागल हैं.

उसने नज़रें उठाई और कहा-
सब के सब तुम्हारे जैसे नहीँ हैं.
तुम्हारे ये तरीके और हथियार पुराने हो गये ,
मुझ पर काम नहीँ करते.
हाँ , जो तुम जैसे हैं ,
वहीं तुम्हारा साथ देते हैं.

मैं नारी हूँ, रानी हूँ, शक्ति हूँ।
इसलिये शर्मिंदा होने का समय तुम्हारा हैं.
मेरा नहीँ.

durga

आज़ के आधुनिक समय में अभी भी  कुछ ऐसे लोग  मिल जाते हैं , जो नारी को समानता  का दर्ज़ा देने में विश्वाश  नही रखते.

 

 

छायाचित्र इंद्रजाल /   internet   से।

नारी (कविता)

 

 

w

नारी जब तक अबला हो, दुनिया के बनाये नियमों को 

बिना प्रश्न किये मानती जाये,

अच्छी लगती है, भोली लगती है। 

                                       सीता अौर सावित्री लगती है।

अगर भूल से भी प्रश्न करे, या ना माने 

तब कहते हैं- चरित्रहीन, पागल अौर  ना जाने क्या-क्या। 

सही कहा है, ये बातें अौर हथियार पुराने हो गये। 

नई बात तो तब होगी,  जब उसे सम्मान अौर बराबरी मिले,

                                   ईश्वर की सर्वोत्म  सुंदरतम रचना को ,

आधी आबादी को पीछे छोङ कितना आगे जायेगें हम?

 

 

images from internet.

 

 

 

कुछ तो लोग कहेंगें

qm2

कुछ लोग कहतें हैं, 

तुम्हे इस दुनिया में

रहना नहीं आता।

बङी कङवी बातें लिखती हो,

सच्चाई  तो कङवी दवाई होती हीं है।

क्या मैं इस दुनिया के लायक नहीं हूँ?

या कोई अौर जहाँ है मेरे लिये?

 

qm

 

छाया चित्र / images from internet

 

तो लोग क्या कहेगें? (कविता)

eyes

पूरे आस-विश्वास के साथ वह लौटी  पितृ घर,

           पिता की प्यारी-लाङली

          पर ससुराल की व्यथा-कथा सुन,

        सब ने कहा- वापस वहीं लौट  जा।  

                किसी से कुछ ना बता,

                 वर्ना लोग क्या कहेगगें ?

इतने बङे लोगों के घर की बातें बाहर जायेगी, तो लोग क्या कहेगें?

(  लोग सोचतें हैं, घर की बेटियों को परेशानी में पारिवारिक सहायता मिल जाती है। पर पर्दे  के पीछे झाकें बिना सच्चाई  जानना मुशकिल है। कुछ बङे घरों में  एेसे भी ऑनर किलिंग होता है)

 

छाया चित्र इंटरनेट के सौजन्य से।

चेहरा नहीं तो भाग्य तो सुन्दर होता (कविता)

eyes

वह कभी आइने में अपना सुकुमार सलोना चेहरा देखती

कभी अपनी माँ को।

दिल में छाले, सजल नेत्र, कमसिन वयस, अल्पशिक्षित 

  कुछ माह की विवाहिता,

पति के चरित्रहिनता व बदमिजाजी से तंग,

वापस आई पिता ग़ृह, अपना घर मान कर।

माँ ने वितृषणा से कहा – 

पति को तुम पसंद नहीं हो।

तुम्हारा चेहरा नहीं, कम से कम भाग्य तो सुन्दर होता।

वह हैरान थी, माँ तो विवाह के पहले से जानती थी

उसके ससुराल की कलकं-कथा,

अौर कहा था – घबराओ नहीं,

जल्दी हीं सुधर जायेगा। 

“मेहंदी रंग लायेगी” 

फिर आज़ यह उसके  भाग्य अौर चेहरे की बात कहां से आई?

mehndi

 

 

images from internet.

मैं एक लड़की ( कविता 1 )

g1

इस दुनिया मॆं मैने
         आँखें खोली.
               यह दुनिया तो
                     बड़ी हसीन
                           और रंगीन है.

मेरे लबों पर
       मुस्कान छा गई.
             तभी मेरी माँ ने मुझे
                      पहली बार देखा.
                              वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया

और बोली -लड़की ?
           तभी एक और आवाज़ आई
                       लड़की ? वो भी सांवली ?

 

images from internet.

कन्या पूजन ( कविता )

kp1

kp

नवरात्रि की अष्टमी तिथि ,
प्रौढ़ होते, धनवान दम्पति ,
अपनी दरिद्र काम वालियों
की पुत्रियों के चरण
अपने कर कमलों से
प्यार से प्रक्षालन कर  रहे थे.

अचरज से कोई पूछ बैठा ,
यह क्या कर रहें हैं आप दोनों  ?

अश्रुपूर्ण नत नयनों से कहा –
“काश, हमारी भी प्यारी संतान होती.”
सब कुछ है हमारे पास ,
बस एक यही कमी है ,

एक ठंडी आह के साथ कहा –
प्रायश्चित कर रहें है ,
आती हुई लक्ष्मी को
गर्भ से ही वापस लौटाने का.

kpn

 

 

images from internet.

बेटियाँ ( कविता )

g10

नन्ही सी बेटी ने कहा ,
माँ , चाची कहती  हैं ,
तुम बेटी -बेटी मॆं भेद भाव करती हो.
तुम्हें लड़के प्यारे हैं.
माँ ने कहा –  मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ ?
मेरी तो तुम दो  ही प्यारी बेटियाँ हो.
बेटा को मैंने जन्म ही नहीँ दिया.
तब भेद और तुलना करूँगी किस से ?

चाची की तरह  कन्या भ्रूण हत्या कर
बेटा पा सकती थी.
पर नहीँ किया ऐसा ,
क्योंकि मुझे तुम
दो ,बेटियाँ ही प्यारी हो.

 

 

images from internet.