जान की कीमत – कविता #poemonwar


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Political borders have divided the world.  Have they also divided our hearts? War fills us  with grief and pain and costs life of hundreds. Isn’t there a better way to solve disputes?

 

शहादतें थमती क्यों नहीं है?

लोग वहाँ भी मरते हैं , यहाँ भी मरते हैं।

घर – परिवार  उजङते हैं।

कल तक वो अपने थे।

आज दुश्मन हैं।

 विदेशी  शासकों की खींची सीमा रेखा

अौर कुछ देशी राजनीतिक नारों ने ,

गर, कत्लेआम करा दिया था.

हमनें समझा क्यों नहीं?

कितने भोले हैं हम ?

                      हमारे चैन की नींद के लिये,  सीमा पर कितने  चैन की

नींद सो जाते हैं?

क्या   युद्ध में  झलक नहीं है,

जंगल जीवों जैसा?

क्या किसी के पास है  इसका  उपाय ?

लोग युद्ध लङने की बातें करते हैं।

                  नहीं जानते क्या,युद्ध की विभिषिका ?

                          बारुद की ढेर पर बैठे हैं हम सब।

                                              जान की कीमत इतनी कम क्यों है?

 

 

भव्य साङी- कविता saree – poem #indianTraditionalWear


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#sareefestival #Shailysahayreadingitatsareefestival

 Sari  is  considered to be of  spiritual benefits in compression to Stitched fabrics . Saree is a traditional Indian wear. It is an unstitched length of cloth measuring 42 – 49″ wide and 5.5 to 9 yards in length.

९ गज का वस्त्र ,साङी पारंपारिक अौर सात्त्विक परिधान माना जाता है । गांठ से  बांधनेवाले, बिनसिले वस्त्र के ४-५ मीटर लंबे टुकडे, जो कमर पर लपेटे कर कटि में गांठ द्वारा बांधे जाते हैं, सिले हुए वस्त्रों की तुलना में आध्यात्मिक लाभ वाले माने जाते हैं।

sari

क्या होता है कहीं ऐसा परिधान ?
खुबसूरत भव्य साङी, मात्र एक लम्बा चीर
नारी के सौंदर्य को बढाता भी है
अौर छुपाता भी है।
ममता भरे आचंल की छावँ,
घुँघट अौर पल्लु की नव गजी ,
भारतीय नारी की पारंपरिक साडी।

इसे बनाने, बुनने अौर पहनने के अनगिनत तरिके।
कभी ना कभी हर वामा हर नारी,
दिल से, पहनती है साङी।
कहनेवाले कहते हैं –
विदेशी वस्र हैं, महिला अपमान का कारण,
पर चीर हरण तब भी होता था,
अब भी होता है।
समस्या वस्र नहीं, मानसिकता में है।

आध्यात्मिक कहलाने वाले धोती-साङी , थी परंपरा पहचान,
पुरुष भूल रहें हैं
पर, कैसे पहने साङी इसमें आज भी उलझी नारी।

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विश्वास- कविता faith- poem


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जिंदगी निकल गई खुश रहने की कोशिश अौर,

लोगों को खुश करने की कोशिश में।

दूसरों को खुबसूरती दिखाने अौर,

खुबसूरत दिखने की कोशिश में।

अब समझा आया, खुबसूरती अपने अंदर होती है।

अपने को पसंद करो अौर स्वंय खुश   रखो।

जीवन  की बदलती करवटें

सोंच पैदा करतीं हैं।

फिर लगता है ,

शायद ये, जिंदगी सीधी कर रहीं हैं।

बस विश्वास का ङोर थामे रखो।

 

जिंदगी के रंग -कविता 9


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Female weeper / weeping woman / professional mourners  –  In some part of    Rajasthan, India,  women (of a specific  caste ) are hired as professional mourners . They   are know as  “rudaali” /female weeper/ weeping woman  . Their job is to publicly express grief for family members who are not permitted to display emotion due to social status.

कुछ लोग हँस  कर ,

और कुछ हँसा कर

कमाते हैं.

कुछ लोग रो कर (रुदाली )

और कुछ लोगों को रुला कर.

रुलाने वाले क्या जवाब देंगे ?

   जब

ऊपर वाला उनसे पूछेगा –

उन्होंने क्या कमाया  ?

राजस्थान में कुछ  स्थानों पर  ऐसी प्रथा हैं. जिसमें सम्पन्न परिवारों में रो कर मातम मानने  के लिये रुदाली ( जाति  विशेष की महिलायें ) बुलायी जाती हैं.

rudaali

 

 

 

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इंद्रधनुष -कविता Rainbow -poem


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There is nothing in this world that is not a gift from you  ~  Rumi.

 

ज़िंदगी के सात रंगों को भूल,

       हम जीवन को ढूँढ रहे हैं

          काले-सफ़ेद रंगों के धुआँ अौर  धुंध में।

                   भाग रहें हैं,  अनजानी राहों पर ,

                       दुनिया के मायावी  मृगतृष्णा के पीछे।

                            आंगन की खिली धूप, खिलते फूल,

                                  बच्चों की किलकारी, 

                                   ऊपरवाले की हर रचना है न्यारी।

                                       अगर कुछ ना कर सको ,

                                        तो थमा दो ऊपर वाले को अपनी ङोर।

                                           खुबसूरत सतरंगी  इंद्रधनुषी  लगेगी,

                                                 ज़िंदगी हर अोर। 

 

 

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जहाँ खारा पानी बिकता है # mumbaislum ( कविता )

वह भी रहती हैं वहाँ

जहां खारा पानी बिकता है।

दरिद्र, पति परित्यक्ता,

दस बच्चों के साथ,

दशकों पुरानी अपनी

बावड़ी का जल  बाँट कर

कहती है –“ पानी बेच कर क्या जीना?

क्या पूजा सिर्फ मंदिरों और मस्जिदों में ही होती है ?

यह इबादत का  उच्चतम सोपान नहीं है क्या?

 (मुंबई, मानखुर्द बस्ती में जहाँ गर्मी में लोग पानी खरीद रहे हैं। वहाँ ज़रीना अपनी पुरानी बाबड़ी का द्वार सभी के लिए खोल रखा है। ) news from daily – HINDU, pg – 2 dated may 12 2016.

 

मैं एक लड़की ( कविता 1 )

 

इस दुनिया मॆं मैने
आँखें खोली.
यह दुनिया तो
बड़ी हसीन
और रंगीन है.

मेरे लबों पर
मुस्कान छा गई.
तभी मेरी माँ ने मुझे
पहली बार देखा.
वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया

और बोली -लड़की ?
तभी एक और आवाज़ आई
लड़की ? वो भी सांवली ?

जिंदगी के रंग ( कविता) 8

life

जिंदगी ने ना जाने कितने रंग बदले।

रेगिस्तान  के रेत की तरह

कितने निशां बने अौर मिटे

हर बदलते रंग को देख ,

दिल में तकलिफ हुई।

काश,  जिंदगी इतनी करवटें  ना ले।

पर , फिर समझ आया ।

यही तो है जिंदगी।

 

मोक्ष  -कविता 


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नचिकेत और यम का संवाद

Kathy Upanishad   was written by achary  Kath. It is legendary story of a little boy, Nachiketa who meets Yama (the Indian deity of death). Their conversation evolves to a discussion of the nature of mankind, knowledge, Soul, Self and liberation.

आचार्य कठ ने  उपनिषद रचना की।  जो कठोपनिषद  कहलाया।  इस में  नचिकेत और यम के बीच  संवाद का  वर्णन है । यह मृत्यु रहस्य और आत्मज्ञान की चर्चा है।

 

 

विश्वजीत  यज्ञ किया  वाजश्रवा ने ,

सर्वस्व दान के संकल्प के साथ।

पर कृप्णता से दान देने लगे वृद्ध गौ।

पुत्र नचिकेत ने पिता को स्मरण कराया,

प्रिय वस्तु दान का नियम।

क्रोधित पिता ने पुत्र  नचिकेत से कहा-

“जा, तुझे करता हूँ, यम को दान।”

नचिकेत  स्वंय  गया यम  के द्वार ।

तीन दिवस  भूखे-प्यासे नचिकेत के

प्रतिबद्धता से प्रसन्न यम ने दिया  उसे तीन वर ।

पहला वर  मांगा -पिता स्नेह, दूसरा -अग्नि विद्या,

तीसरा – मृत्यु रहस्य और आत्मा का  महाज्ञान।              

और जाना आत्मा -परमात्मा , मोक्ष का गुढ़ रहस्य.

यज्ञ किया पिता ने अौर महाज्ञानी बन गया पुत्र ।

 

रौशन जहाँ -कविता 

golden

माँ के गर्भ में अजन्मा शिशु अपने 

को सुरक्षित समझ ,बाहर आने पर 

रोता हैं.

इस दुनिया को अपना घर मान 

इंसान भी , इसे छोड़ने के 

डर से रोता हैं.

क्यों यह नहीँ सोचता ?

आगे रौशन  और भी “जहाँ ” हैं.

 

 

 

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