Search of beauty – Poetry

Search a beautiful heart,

not a beautiful face.

Beautiful things are

not always good,

but

good things are always beautiful.

 

 

 

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मौन (कविता)

ना काग़ज़ ना कलम,
एक आवाज़
लेखनी बन जाती है।
बस सुनने के लिये,
इन कानों को बंद कर
सुनना होता है ……
मौन हो, अंतरात्मा की आवाज।

Source: मौन (कविता)

 

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ईश्वर खुश होगें? -कविता Sacrifice

News-

  1. The Indian Express dated Friday,April 14,2017

Osmanabad: Six-year-old killed for ‘human sacrifice’; kin, tantrik arrested
Krushna Ingole was killed by his aunt, 3 other family members after tantrik told                them blood of a young boy was needed to ward off ‘ill effect of a spihttp://indianexpress.com/article/cities/mumbai/osmanabad-six-year-old-killed-for-human-sacrifice-kin-tantrik-arrested-4612375/

2. India ‘human sacrifice’: Arrests over 10-year-old’s death

http://www.bbc.com/news/ world-Asia-India-39176570

 

 

दुनिया  आगे जा रही है,

हम क्या पीछे लौट रहे हैं?

क्रुरता अौर स्वार्थ  की भी हद है,

अपनों की ही बलि दे

     रहे हैं?

क्या सचमुच इससे ईश्वर खुश होगें?

 

 

 

 

कस्तूरी मृग- कविता Musk deer

Musk deer is  famous for the valuable scented musk found  in its navel. Their musk is used for making perfumes and medicines.  It is  believed that musk deers look for the fragrance of musk everywhere outside instead of  looking for it within themselves.

 

“I searched for God and found only myself.

I searched for myself and found only God”.

 

 

वन-वन ढूंढ रहा है

मृग अपनी कस्तूरी,

खुशबू  अपने पास है,

बस है खुद से खुद की दूरी।

 

 

कस्तूरी कुन्डल बसे, मृग ढूढै बन माहि ।

ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि।।

कबीर

 

कस्तूरी मृग अपनी नाभि में पाए जाने वाली कस्तूरी के लिए  प्रसिद्ध है। कस्तूरी का उपयोग औषधि के रूप में दमा, मिर्गी, निमोनिया आदि की दवाअों में होता है। यह  अपनी खुशबूदार इत्र के लिए भी प्रसिद्ध है। कहते है , वह कस्तूरी की खुशबू की खोज में  भटकता रहता है, जो उसके हीं अंदर होता है।

Musk deer

 

अमलतास – golden shower flower

Golden shower tree  is an ayurvedic medicine,  also known as aragvadha – “disease killer” 

आयुर्वेद – अमलतास वृक्ष के सभी भाग औषधि के काम में आते हैं। यह  पित्तनिवारक, कफनाशक तथा वातनाशक हैं। 

स्वर्णपुष्पी कहो या अमलतास,

जलती गर्मी, तप्ते धूप में

स्वर्ण सा दमकता,

नाजुक पंखुङियों के

साथ हवा के झोंके से,

कानों के झुमके सा झुमता, झूलता!!!!!

  प्रचंङ ताप में,

कैसे रहता इतना

ताजा, सुकुमार अौर मनमोहक?

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अमलतास – गर्मियों की सुनहरी मुस्कान

अमलतास का नाम सुनते ही आँखों के सामने एक ऐसा पेड़ उभर आता है, जो मानो धूप को अपने अंदर समेटकर धरती पर बिखेर देता हो। इसे हिंदी में अमलतास और अंग्रेज़ी में Cassia fistula कहा जाता है। यह भारत के सबसे खूबसूरत फूलदार पेड़ों में से एक है, जो खासकर गर्मियों में अपनी पूरी शान पर होता है।

अमलतास का परिचय

अमलतास एक मध्यम आकार का पेड़ होता है, जिसकी ऊँचाई लगभग 10 से 20 मीटर तक हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके लंबे-लंबे लटकते हुए पीले फूल होते हैं, जो गुच्छों में खिलते हैं। जब ये पूरी तरह खिल जाते हैं, तो पेड़ का हर हिस्सा पीले रंग से ढक जाता है — जैसे किसी ने उस पर सोने की चादर डाल दी हो।

दिलचस्प बात यह है कि जब अमलतास में फूल आते हैं, तब इसकी पत्तियाँ कम हो जाती हैं। इससे फूल और भी ज्यादा चमकदार दिखाई देते हैं।

कब और कहाँ खिलता है

अमलतास मुख्य रूप से अप्रैल से जून के बीच खिलता है, यानी जब गर्मी अपने चरम पर होती है। यही वजह है कि इसे “गर्मी का राजा” भी कहा जाता है।
यह पेड़ भारत के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है — खासकर सड़कों के किनारे, पार्कों और बाग-बगीचों में।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

अमलतास का संबंध कई परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। दक्षिण भारत में इसे विशु (केरल का त्योहार) के समय खास महत्व दिया जाता है। इस दौरान इसके फूल शुभ माने जाते हैं।
इसके अलावा, यह पेड़ सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।

औषधीय गुण (थोड़ा अलग जानकारी)

अमलतास सिर्फ सुंदर ही नहीं, बल्कि औषधीय दृष्टि से भी बहुत उपयोगी है। आयुर्वेद में इसके फल (लंबी काली फलियाँ) का उपयोग किया जाता है।

  • यह पेट साफ करने में मदद करता है (प्राकृतिक रेचक)
  • त्वचा रोगों में भी इसका उपयोग होता है
  • शरीर की गर्मी को संतुलित करने में सहायक माना जाता है

इसका गूदा मीठा होता है और कई पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।

प्रकृति के लिए महत्व

अमलतास के फूल मधुमक्खियों और तितलियों को बहुत आकर्षित करते हैं। इससे पर्यावरण में परागण (pollination) को बढ़ावा मिलता है।
इस तरह यह पेड़ केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन में भी अपना योगदान देता है।

देखभाल और विशेषताएँ

अमलतास का पेड़ ज्यादा देखभाल नहीं मांगता।

  • इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती
  • गर्म और सूखे मौसम में भी आसानी से बढ़ता है
  • मिट्टी की खास जरूरत नहीं — सामान्य जमीन में भी उग सकता है

यही कारण है कि शहरों में इसे सड़कों के किनारे लगाया जाता है। यह हमें सिखाता है कि जिंदगी चाहे कितनी भी तपती क्यों न हो, अगर भीतर रंग बाकी हैं, तो बाहर भी रोशनी फैल सकती है।अमलतास सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि धूप का एक एहसास है।
जब सारी दुनिया गर्मी से थकी होती है, तब यह पेड़ बिना शिकायत के मुस्कुराता है।
इसके फूल जैसे कहते हैं —“हर कठिन मौसम में भी, अपने रंग मत खोना।”


अमलतास – हर प्रदेश में अलग पहचान, हर दिल में एक सी चमक

अमलतास सिर्फ एक सुंदर पेड़ नहीं है,
यह भारत की मिट्टी में घुली हुई एक ऐसी कहानी है,
जो हर राज्य में थोड़ा अलग अंदाज़ में खिलती है…
लेकिन उसका संदेश एक ही रहता है — सौंदर्य, संतुलन और सहजता।


अलग-अलग राज्यों में अमलतास का महत्व

केरल (दक्षिण भारत)
केरल में अमलतास को Cassia fistula “कणिक्कोन्ना” कहा जाता है।
यह Vishu त्योहार का सबसे खास हिस्सा होता है।
लोग इसे अपने घर में सजाते हैं, पूजा में रखते हैं।
यहां यह सिर्फ फूल नहीं, शुभता और नई शुरुआत का प्रतीक है।

उत्तर भारत (दिल्ली, यूपी, राजस्थान)
यहां अमलतास गर्मियों में सड़कों और बागों की पहचान बन जाता है।
तेज धूप के बीच इसके पीले फूल जैसे ठंडक का एहसास देते हैं।
लोग इसे सहनशीलता और उम्मीद का प्रतीक मानते हैं —
कि कठिन समय में भी जीवन रंग नहीं छोड़ता।

महाराष्ट्र और मध्य भारत
यहां शहरों की सड़कों, कॉलोनियों और पार्कों में अमलतास खूब लगाया जाता है।
यह शहरी सुंदरता का हिस्सा बन चुका है —
कम देखभाल में भी इतना सुंदर दिखना, जैसे सादगी में शान।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा
यहां इसे धार्मिक और पारंपरिक दृष्टि से भी महत्व मिलता है।
कुछ जगहों पर इसे पवित्र पेड़ माना जाता है,
जो घर के आस-पास सकारात्मक ऊर्जा लाता है।


आयुर्वेद में अमलतास का महत्व

अमलतास आयुर्वेद में “आरोग्य का पेड़” माना जाता है।
इसका हर हिस्सा — फल, फूल, छाल — किसी न किसी रूप में उपयोगी है।

1. पेट के लिए वरदान
अमलतास की फलियों (काली लंबी फली) का गूदा बहुत प्रसिद्ध है।
यह एक प्राकृतिक रेचक (laxative) है।
कब्ज जैसी समस्या में यह धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से राहत देता है।

2. शरीर की गर्मी को शांत करना
गर्मियों में शरीर में जो अधिक गर्मी बढ़ जाती है,
अमलतास उसे संतुलित करने में मदद करता है।
इसलिए इसे “कूलिंग हर्ब” भी माना जाता है।

3. त्वचा रोगों में उपयोग
खुजली, दाद, या त्वचा की अन्य समस्याओं में
इसकी छाल और पत्तियों का लेप लगाया जाता है।
यह त्वचा को साफ और शांत करने में सहायक होता है।

4. खून की शुद्धि (डिटॉक्स)
अमलतास शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है।
इससे खून साफ होता है और शरीर हल्का महसूस करता है।

5. हल्के बुखार और कमजोरी में सहायक
कुछ आयुर्वेदिक काढ़ों में इसका उपयोग किया जाता है,
जो शरीर को धीरे-धीरे ताकत देने में मदद करता है।


सावधानी भी ज़रूरी है

अमलतास भले ही प्राकृतिक है,
लेकिन इसका इस्तेमाल सही मात्रा में ही करना चाहिए।
ज्यादा लेने से पेट ज्यादा ढीला हो सकता है।
इसलिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।

अमलतास के पेड़ आज धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं,
क्योंकि शहर बढ़ रहे हैं और पेड़ों की जगह इमारतें ले रही हैं।
लोग जल्दी बढ़ने वाले पेड़ लगाते हैं, लेकिन अमलतास को समय चाहिए।
प्रदूषण और देखभाल की कमी भी इसे कमजोर बना देती है।

हमें इसे बचाना होगा… क्योंकि यह सिर्फ पेड़ नहीं,
गर्मी में खिलती हुई उम्मीद और प्रकृति की मुस्कान है। 


जिंदगी के रंग (कविता – 5)

जीवन के इंद्रधनुषी सफर में
हजारो रंग नज़र आते है,
परायों को अपना कहनेवाले
अच्छों को बुरा कहने वाले
कहीँ ना कहीँ मिल जाते है

रोज़ सफेद -काले और
सतरंगी जिंदगी नज़र आती है
जिंदगी रोज़ नये रंग दिखाती है।

Source: जिंदगी के रंग (कविता – 5)

खंजन नयनों के सपने- कविता Dreams

Dreams are not those which come while we are sleeping, but dreams are those when you don’t sleep before fulfilling them.

सपने वे नहीं हैं जो हमें सोते समय आते हैं,  सपने वे हैं, जिन्हें आप  पूरा करने से पहले सोते नहीं हैं।
– ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (A.P.J. Abdul Kalam)

उसके खूबसूरत खंजन नैन,

सफेद आंखों की काली पुतलियां नाचती रहती,

शायह जागती आँखो  से सपने देखती,

 कामना है!!!

उसके  सुनहरे  रूपहल हर ख़्वाब

पूरे हो

जो भी सपने नाचते हैं उसके

चंचल चितवन में……

 

 

खंजन-  एक काले सफेद पंखों वाला खुबसूरत, चंचल पक्षी,  जिसकी उपमा चंचल नेत्रों के लिए भी दी जाती है।

खंजन-  Robin Magpie, A beautiful,  bird with  black-white wings.

khanjan 1

 

 

सौंदर्य सार- कविता

 

I searched for God and found only myself.
I searched for myself and found only God.

पेङ की शाखाअों पर लगे फूलों में

हम  सौंदर्य सार खोजते हैं,

पर क्यों नहीं हम जड़ों के बारे में सोचतें?

शायद वहीं सब कुछ मिल जाए………

कृष्ण को खोजते है किताबों में,

क्यों नहीं झाँकतें अपने अंदर ?

पतझङ अौर बसंत मे 

खुबसूरत  पत्ते अौर  फूल,

आते हैं अौर  फिर साथ छोङ जाते हैं,

पर जङें नहीं बदलतीं।

                    वही उन  का आधार हैं……

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मेरा शहर-कविता

 आज तक ना जाने

कितने शहरों में रहीं  हूँ,

आज भी बनजारों सा ,

 आजाद परिंदे  जैसा,

भटकना और घूमना पसंद है।

किसी ने पूछा आप का  शहर कौन सा है?

क्या जवाब दूँ, मुझे तो

सारे शहर अपने से लगते हैं ।

दहलीज -कविता

Where words are restrained, the eyes often talk a great deal.

Samuel Richardson

मैं आँखों से बातें करती रही ……..

वे लबों को निहारते रहे।

दहलीज

पर खङी रही,

मुलाकात नहीं हुई,

मैं नजरों से पुकारती रही,

वे आवाज का  इंतज़ार करते  रहे।