ज़िंदगी के रंग -71

कभी कभी समझ नहीं आती ,

क्यों है ज़िंदगी इतनी उलझन भरी ?

जितनी सुलझाओ उतनी

ही उलझती जाती है .

रंग बिरंगे उलझे धागों की तरह

कहीं गाँठे कहीं उलझने हीं उलझने

और टूटने का डर …..

क्या यही है ज़िंदगी ?

विचारों-यादों के रंग

कोई रंग नहीं

विचारों, यादों का

पानी की तरह .

ना जाने कहाँ से

कभी काले उदास रंग से और

कभी ख़ुशनुमा सतरंगे रंगो से

रंग जातें है सब .

बादलों से ऊपर

बादलों से ऊपर एक और जहाँ हैं

जहा ना जाने कौन बैठा

नचाता है सबको कठपुतलियों की तरह ……

कोई भी रिश्ता…..

Deep_Pawan's avatarDeep Thoughts

कोई भी रिश्ता ना होने पर भी जो रिश्ता निभाता हैं,

वो रिश्ता एक दिन दिल की गहराइयों को छू जाता है।

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वर्षा की बूँदों को लिखने की ख़्वाहिश

वर्षा की बूँदों को लिखने की ख़्वाहिश……

आकाश के काले मेघ से टपकते

बारिश की सुरीले संगीत ने

धरती के आँचल पर लिख

अपने आप पूरी कर दी .

बारिश की बूंदें

सारे इत्रों की खुशबू,आज मन्द पड़ गयी…

मिट्टी में बारिश की बूंदे,जो चन्द पड़ गयी…

Unknown

ज़िंदगी के रंग -70

क्या ज़िंदगी एक नशा है ?

या तृष्णा -प्यास है ?

जीने की ख़्वाहिश

हर दर्द से जीत

जाती है .

तालीम अौर रियाज़

खुशबू ने सीखाया बिखरना,

चाँद ने खामोशी।

खुद से गुफ्तगू करना सीखाया निर्झर ने,

 ख्वाहिशों ने सीखाया सज़्दा – इबादत करना।

तनहाई, अकेलेपन  ने   फरियाद, शिकवा

पर

दुनिया के भीङ में भटकते- भटकते भूल जाते हैं सारे तालीम

शायद रियाज़ों की कमी है।

चाँद अमावस हो गया

रात जागती रही

जागते ख्वाब पलकों के दर पर

इंतज़ार करते रहे…….

पुनम की रात सागर की ऊँची लहरें

चाँद को चूमने की कोशिश

करते करते हार कर सोने लगी……..

  पूनम के पूरे चाँद के फिर आने के इंतज़ार में .

और चाँद धीरे-धीरे

 जल कर  अमावस हो गया ……….

New seeds are growing !!!!

Its good to

leave each day behind,

like flowing water,

free of sadness.

Yesterday is gone

and its tale told.

Today new seeds are growing.

Rumi