रिश्तों को शब्दों का ,
मोहताज ना बनाइये ..
अगर अपना कोई खामोश हैं तो
खुद ही आवाज लगाइये ..!!

Unknown
रिश्तों को शब्दों का ,
मोहताज ना बनाइये ..
अगर अपना कोई खामोश हैं तो
खुद ही आवाज लगाइये ..!!

Unknown
A child asked God- if
everything is already
written in destiny then
why should I wish?
God smiled and said-
may be on some pages
I have written –
“As you wish.”

Unknown
एक था गुल्लक .
अरमानों का.
आधे अधूरे और कुछ पूरे
अरमानों को डालते डालते ,
कब वक़्त गुज़र गया ,
पता नहीं .
जब गुल्लक फूटा….
नज़रों के सामने
बिखरे गये अरमान अनेक .
गुड़िया सजाने ,
पड़ोस के बाग़ से अमरूद चुराने ,
अौर ना जाने कितने सारे अरमान ……
सब पुराने….. बेकार ……
एक्सपायर हो चुके थे .
चुरा लो हसीन लम्हों को उम्र से….
जिम्मेदारियाँ मोहलत कब देती है…!!.

Unknown
ना जाने कितने हथियार बने
कितने दवा बनी ,
पर ‘शब्द ‘ में है
सारी शक्ति ……
ख़ुशी …ग़म …. पीड़ा … या तस्सली
देनी हो .
मीठे – खट्टे शब्द या बोली हीं
काफ़ी है.

कौन हो तुम सब ?
धुँधली आकृति ने कहा –
इतनी जल्दी भूल गए ?
मैं तुम्हारा बीता कल हूँ .
कल तुम्हारा अनमोल आज था .
दूसरे ने कहा मैं तुम्हारा आज हूँ
कल जिसे तुम ,
आने वाला कल मानकर
स्वागत की तैयारी में थे .
और यह तुम्हारा आनेवाला कल है
जो जल्दी ही हमारी तरह बीत जाएगा .
यह तो जीवन चक्र है
आना जाना सृष्टि का नियम है .
हँस कर जी लो ज़िंदगी को ,
जी भर कर ,
क्या हाल है ?
छोटा सा सवाल है .
पर कई बार हालात,
हाल पूछने से भी
ठीक लगने लगते है .
कोई अपना है
यह अहसास ही अच्छा
लगने लगता है .

टूटते सितारे
टूटते शीशे ….आरसी…..
ना जाने क्यों बुरे माने जातें है .
बुरा तो है …..
टूटते रिश्ते ….
टूटते दिल.
पर क्यों किसी का
उस पर ध्यान नहीं जाता .
दर्द तो उसमें हीं
सबसे ज़्यादा होता है …..

युद्ध में हम
मिटाकर जीतते हैं
और प्रेम में हम
मिट कर जीतते हैं.

Unknown
हम बचाते रह गए
दीमक से अपना घर
कुर्सियों के चन्द कीड़े
सारा मुल्क खा गए.

Unknown
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