शक

Aman Kumar Sharma's avatarजिजीविषा

मुझे शक है कि भूलने लगा हूँ खुद ही को मैं,

शर्त लेकिन ये थी कि मुझे बहुत कुछ याद रखना है।

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जिंदगी के रंग -67

साँसे चले …समय गुजरता रहे बस …..

क्या यही है ज़िंदगी?

ना मक़सद …. ना ख़्वाब ……

हसीन तोहफ़ा है यह ज़िंदगी.

थोड़ी तमन्ना, अभिलाषा, लालसा

 लक्ष्य…. मकसद मिला कर 

गुनगुनाइये…..

राहें खुलती जायेंगीं।

 

पहचान

ख़ामोशी से बनाते रहो,

पहचान अपनी .

हवायें ख़ुद तुम्हारा

नाम गुनगुनाएँगीं .

Unknown

ज़िंदगी के रंग -66

कई बार कुछ अंत,

ज़िंदगी की नई शुरुआत होती हैं.

मुमकिन है परिवर्तन दर्द भरा हो .

गर्भस्थ शिशु नहीं जानता ,

आगे क्या है ?

कष्टपूर्ण जन्म के बाद

सामने ज़िंदगी इंतज़ार करती मिलती है !!!

नुक़्स

उम्र जाया कर दी लोगों ने औरों के

वजूद में नुक़्स निकालते- निकालते.

इतना ख़ुद को तराशा होता

तो फ़रिश्ते बन जाते .

— गुलज़ार

कच्ची मीठी धूप

सुबह की कच्ची मीठी धूप

दिवस के बीतते प्रहर के साथ

रवि के प्रखर प्रहार से बेनूर आकाश से

तपती धरती पर आग का  गोला बन

गर्दो गुबार से हमला करता है। 

खुश्क  हवाअों की चीखें….

कभी शोर करतीं, कभी चुप हो जातीं हैं।

जलाता हैं सबको मई- जून।

 भङकता सूरज अौर  धूल-धूसरित , खर-पतवार भरी हवा के बाद

बस इंतजार रहता शाम का या फिर बारिश का…..

“ना “

दिली आभार उनका जिन्होंने जरुरत के समय

मदद के लिये हाथ बढ़ाया ।

पर उनका भी शुक्रिया

जिन्हों ने “ना” कहा।

हर “ना” ने खङा होना सिखाया।

कितनों का सच्चा रूप दिखाया ।

जरुरतमंद के लिये हाथ बढ़ाने का मोल समझ आया।

अौर

दिल ने कहा- “ना”  वालों की

ज़िम्मेदारियोँ  से तुम आज़ाद हो।

उनके लिये  चिंतन करने के 

दायित्व से मुक्त हो !!! 

भरे रहने का एहसास

पुराने सामानों के बीच बैठ

यादों में सब ज़िंदा रखने की …..

बीते पलों को ज़बरदस्ती

वर्तमान में लाने की ……

कोशिश

वर्तमान और भविष्य को भी,

पुराने दर्द से भर देती है .

यादों- एहसासों से ,

भरे होने के एहसास

से अच्छा है –

सब धूम्र ग़ुबार में विलीन कर देना…….

आकाश में उठते धुएँ

के साथ सूनी पसरी पीड़ा

शून्य में शून्य होते देखना …….

शून्य

अच्छे लोगों का स्वभाव गिनती के

शून्य की तरह होता है….

लोगों की नजर में भले ही

उसका मूल्य कुछ भी नहीं होता…….

लेकिन वो जिनके साथ होते है

उनकी कीमत बढ़ा देते हैं…!!

Unknown

ज़िंदगी के रंग -65

ज़िंदगी उसी को आज़माती है

जो हर मोड़ पर चलना जानता है….!!

कुछ “पाकर” तो हर कोई मुस्कुराता है,

ज़िंदगी शायद उनकी ही होती है

जो बहुत कुछ “खोकर” भी

मुस्कुराना जानता है..

Unknown