“ना “

दिली आभार उनका जिन्होंने जरुरत के समय

मदद के लिये हाथ बढ़ाया ।

पर उनका भी शुक्रिया

जिन्हों ने “ना” कहा।

हर “ना” ने खङा होना सिखाया।

कितनों का सच्चा रूप दिखाया ।

जरुरतमंद के लिये हाथ बढ़ाने का मोल समझ आया।

अौर

दिल ने कहा- “ना”  वालों की

ज़िम्मेदारियोँ  से तुम आज़ाद हो।

उनके लिये  चिंतन करने के 

दायित्व से मुक्त हो !!! 

भरे रहने का एहसास

पुराने सामानों के बीच बैठ

यादों में सब ज़िंदा रखने की …..

बीते पलों को ज़बरदस्ती

वर्तमान में लाने की ……

कोशिश

वर्तमान और भविष्य को भी,

पुराने दर्द से भर देती है .

यादों- एहसासों से ,

भरे होने के एहसास

से अच्छा है –

सब धूम्र ग़ुबार में विलीन कर देना…….

आकाश में उठते धुएँ

के साथ सूनी पसरी पीड़ा

शून्य में शून्य होते देखना …….

शून्य

अच्छे लोगों का स्वभाव गिनती के

शून्य की तरह होता है….

लोगों की नजर में भले ही

उसका मूल्य कुछ भी नहीं होता…….

लेकिन वो जिनके साथ होते है

उनकी कीमत बढ़ा देते हैं…!!

Unknown

ज़िंदगी के रंग -65

ज़िंदगी उसी को आज़माती है

जो हर मोड़ पर चलना जानता है….!!

कुछ “पाकर” तो हर कोई मुस्कुराता है,

ज़िंदगी शायद उनकी ही होती है

जो बहुत कुछ “खोकर” भी

मुस्कुराना जानता है..

Unknown

ज़िद

चाहतों से और ,

चाहते रहने से ,

ना मुक़ाम मिलते है .

ना चाहतें पूरी होती है .

मंज़िल माक़ूल पाने के लिए

चलते रहने की ज़िद

भी ज़रूरी है .

शौक़ीन

हलके में मत लेना तुम सावले रंग को…

दूध से कहीं ज्यादा देखे है शौक़ीन चाय के…!!!

Unknown

रंजिश

आज हीं कहीं यह पढ़ा और  सलाह कुछ अधूरी सी लगी इसलिए कुछ पंक्तियाँ जोड़ दी-

लम्हे फुर्सत के आएं तो, रंजिशें भुला देना दोस्तों,

किसी को नहीं खबर कि सांसों की मोहलत कहाँ तक है ॥

नई पंक्तियाँ

अच्छा हो रंजिशे पैदा करनेवाली आदतों को भुला देना ,

किसी को पता नहीं ये आदतें कहाँ तक चुभन पहुँचाएगी .

ना रंजिशे होंगी ना भुलाने की ज़रूरत .

ज़िंदगी और साँसों के मोहलत की गिनती की भी नहीं ज़रूरत.

थक कर ना बैठ

Unknown

नज़रें उठाना और गिराना

ढेरों बातें और यादें बटोरे

गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे

इंतज़ार में,  राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..

उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना

सारे ल़फ्ज ….अल्‍फाज़ चुरा ले गया।

अद्भुत रचनाकार

अद्भुत रचनाकार

की तुलिका के जादू से रंगे

इस कायनात …. जहाँ……दुनिया में

मदिर मादक महक …सौंदर्य ….

ख़ूबसूरत रंग भरे है ,

हम सब देखते हैं.

पर उसके रचनाकार को नहीं खोजते

और ना उसके संदेश को पढ़ते है .