चाहतों से और ,
चाहते रहने से ,
ना मुक़ाम मिलते है .
ना चाहतें पूरी होती है .
मंज़िल माक़ूल पाने के लिए
चलते रहने की ज़िद
भी ज़रूरी है .

William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
चाहतों से और ,
चाहते रहने से ,
ना मुक़ाम मिलते है .
ना चाहतें पूरी होती है .
मंज़िल माक़ूल पाने के लिए
चलते रहने की ज़िद
भी ज़रूरी है .

हलके में मत लेना तुम सावले रंग को…
दूध से कहीं ज्यादा देखे है शौक़ीन चाय के…!!!

Unknown
आज हीं कहीं यह पढ़ा और सलाह कुछ अधूरी सी लगी इसलिए कुछ पंक्तियाँ जोड़ दी-
लम्हे फुर्सत के आएं तो, रंजिशें भुला देना दोस्तों,
किसी को नहीं खबर कि सांसों की मोहलत कहाँ तक है ॥
नई पंक्तियाँ
अच्छा हो रंजिशे पैदा करनेवाली आदतों को भुला देना ,
किसी को पता नहीं ये आदतें कहाँ तक चुभन पहुँचाएगी .
ना रंजिशे होंगी ना भुलाने की ज़रूरत .
ज़िंदगी और साँसों के मोहलत की गिनती की भी नहीं ज़रूरत.



Unknown
ढेरों बातें और यादें बटोरे
गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे
इंतज़ार में, राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..
उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना
सारे ल़फ्ज ….अल्फाज़ चुरा ले गया।
अद्भुत रचनाकार
की तुलिका के जादू से रंगे
इस कायनात …. जहाँ……दुनिया में
मदिर मादक महक …सौंदर्य ….
ख़ूबसूरत रंग भरे है ,
हम सब देखते हैं.
पर उसके रचनाकार को नहीं खोजते
और ना उसके संदेश को पढ़ते है .

एक ज़माना था
जब किताब लेना देना
और लौटाना तो बहाना था .
ख़ुशबू में डूबे ख़तों
का यह राह पुराना था .
पर उन पैग़ामों का क्या ……
खोजने वाले पन्ने पलटे रहे
बातें अनकहे लबों और
झुकी नज़रों में छुपी रह गई .

सागर वही है ….एक ही है सबके लिए .
कोई मोती , कोई मत्स्य और
कोई सीपियाँ चुन लाता है .
किसी को नमकीन …खारा दिखता है ,
किसी को अमृत और लक्ष्मी का
जन्म दाता दिखता है.
ऐसी हीं यह दुनिया है .
यहाँ जो जैसा चाहता है ,
वैसा हीं पाता है .

तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक|
साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक ||
तुलसीदास जी कहते हैं, किसी विपत्ति के समय आपको ये सात गुण बचायेंगे–
आपका ज्ञान या शिक्षा,
आपकी विनम्रता,
आपकी बुद्धि,
आपके भीतर का साहस,
आपके अच्छे कर्म,
सच बोलने की आदत
और ईश्वर में विश्वास .

बोलतीं आँखे,
लरजते लब,
हथेलियाँ आपस में फँसी,
बेचैन अंगुलियाँ,
ज़मीन खुरचते पैर के अँगूठे,
बहुत कुछ कहते है …….
फिर भी अनकहे अल्फ़ाजों
को सुनना ज़रूरी क्यों है?

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