ख़त

एक ज़माना था

जब किताब लेना देना

और लौटाना तो बहाना था .

ख़ुशबू में डूबे ख़तों

का यह राह पुराना था .

पर उन पैग़ामों का क्या ……

खोजने वाले पन्ने पलटे रहे

बातें अनकहे लबों और

झुकी नज़रों में छुपी रह गई .

सागर और दुनिया

सागर वही है ….एक ही है सबके लिए .

कोई मोती , कोई मत्स्य और

कोई सीपियाँ चुन लाता है .

किसी को नमकीन …खारा दिखता है ,

किसी को अमृत और लक्ष्मी का

जन्म दाता दिखता है.

ऐसी हीं यह दुनिया है .

यहाँ जो जैसा चाहता है ,

वैसा हीं पाता है .

विपत्ति के मित्र

तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक|

साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक ||

तुलसीदास जी कहते हैं, किसी विपत्ति के समय आपको ये सात गुण बचायेंगे–

आपका ज्ञान या शिक्षा,

आपकी विनम्रता,

आपकी बुद्धि,

आपके भीतर का साहस,

आपके अच्छे कर्म,

सच बोलने की आदत

और ईश्वर में विश्वास .

अनकहे अल्फ़ाज़

बोलतीं आँखे,

लरजते लब,

हथेलियाँ आपस में फँसी,

बेचैन अंगुलियाँ,

ज़मीन खुरचते पैर के अँगूठे,

बहुत कुछ कहते है …….

फिर भी अनकहे अल्फ़ाजों

को सुनना ज़रूरी क्यों है?

जिंदगी का फैसला

जिनके पास अपने हैं,

वो अपनों से झगड़ते हैं.

जिनका कोई नहीं अपना,

वो अपनों को तरसते हैं.

कल न हम होंगे न गिला होगा।

सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा।

जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें।

जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।

Unknown

शौहरत

जाने कौन सी शौहरत

पर आदमी को नाज़ है,

जो आखरी सफर के लिए भी

औरों का मोहताज़ है….

Unknown

हुनर

कोई हुनर ,

कोई राज ,

कोई राह ,

कोई तो तरीका बताओ….

दिल टूटे भी न,

साथ छूटे भी न , कोई रूठे भी न ,

और ज़िन्दगी गुजर जाए।

Unknown

खूबसूरत लम्हें ,

गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें ,

यूँ ही मुसाफिरों की तरह .

यादें वहीं खडी रह जाती हैं ,

रूके रास्तों की तरह .

Unknown

ज़िंदगी के रंग -64

तहज़ीब के ख़िलाफ़ हुआ,

सच का बोलना..!!

अब झूठ ज़िन्दगी के ,

सलीक़े में आ गया…!!

– Unknown

धूप मायूस लौट जाती है….

ग़ज़ल: बशीर बद्र

खुद को इतना भी मत बचाया कर,

बारिशें हो तो भीग जाया कर.

चाँद लाकर कोई नहीं देगा,

अपने चेहरे से जगमगाया कर.

दर्द हीरा है, दर्द मोती है,

दर्द आँखों से मत बहाया कर.

काम ले कुछ हसीन होंठो से,

बातों-बातों में मुस्कुराया कर.

धूप मायूस लौट जाती है,

छत पे किसी बहाने आया कर.

कौन कहता है दिल मिलाने को,

कम-से-कम हाथ तो मिलाया कर.