वर्षा की बूँदे

वर्षा की चंद बूँदों ने

सतरंगा इंद्रधनुष……

सोन्धी सी ख़ुशबू फैला

तन मन को गीला कर दिया .

काग़ज़ पर बारिश को बूँदों

को उतारने …..लिखने की कोशिश की.

पर लिखने का मज़ा तब है जब

पढ़ने वाले का मन उस में भीग जाए .

और दिल कोई गीत गुनगुनाये.

अपने लिए खड़े होना

कहते है –

जीत कर, फिर से हार जाना..

यही तो रवायत है, रिश्ता निभाने की…

पर जब किसी को सिर्फ़ जीतने की

आदत हो जाए .

झुकना नहीं सिर्फ़ झुकाना

ही नियम बन जाय……..

तब ?????

हारते और झुकते रहने

से अच्छा है –

अपने लिए खड़े होना सीखना ……

गुज़र जाने दो !

वक़्त बहुत कुछ दिखलाता है .

कभी ख़ुशियों की बरसात ,

कभी ग़मों की धूल भरी आँधी .

ख़ूबी तो तब है , जब

अपने ऊपर से …….

हर आँधी को बस गुज़र जाने दें

घास की तरह .

वृक्ष की तरह तने रहे तो

टूट भी सकते है .

वर्तमान

भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है इसका भय अौर चिन्ता,

भूत काल की यादें, दुख ….अफसोस ….पछतावा

क्या कुछ बदल सकता है ?

फिर क्यों नहीं चैन से साँस लिया जाय

अौर वर्तमान में …..

जिया जाये ? ?

जुम्बिश-ए-नज़र

ओंठों को जुंबिश दे

कुछ बोलने की कोशिश में

उसकी बङी-बङी  आँखें पहले हीं हँस पङीं।

जुम्बिश-ए-नज़र ने शायद

बिना लब खोले

बिना कुछ बोले,

अपनी  हर बात कह दी थी।

सुननेवाला समझ  गया।

…………पता चला वह तो मूक है।

कुछ बोल हीं नहीं सकती।

शायद इसलिये नज़रों से बातें करतं थी।

 

 

 

 

 

 

 

चुम्बक magnet

 

पल पल बदलता यह मन

ना जाने क्या ढूँढता रहता है .

शायद यह खींचता  है कुछ

अौर ख़ुद खींच जाता  है किसी ओर।

चुम्बक की तरह लगता है ….

 

गुलाबों जैसी हंसी

उसकी

गुलाबों जैसी हंसी

मीठी मधुर

जो बिखेरती है

इत्र….जैसी खुशबू

हर अोर।

 आंखें सूरज सी

जीवन की सुगंध अौर

 सुबह की ताज़गी से भरी….

शुकून देती है।

दिलों दिमाग़ का बोझ

दिलों दिमाग़ का बोझ

जब तन तक उतर आए …..

जिस्म को उदास , मायूस बीमार बनाए .

तब ज़रूरी है इसे ऊतार फेंकना.

वरना तन और मन दोनो

व्यथा …दर्द में डूब जाएँगे .

जन्नत

Best I have ever read on Kashmir situation…

उम्र जन्नत में रह कर,

उसे उजाड़ने में गुज़ार दी,

और जिहाद बस इस बात का था,

की मरने के बाद जन्नत मिले…!!!

ज़िंदगी के रंग – 63

अक्सर मायूस ….उदास …..दिल

ज़िंदगी के रंगो से

छोटी छोटी ख़ुशियाँ ढूँढ ही लेता है .

जैसे

अंधेरे में रौशनी खोजती ये आँखे ,

अपने आप को ढाल

कुछ ना कुछ रौशनी खोज ही लेती है .