चार दीवार

कहते हैं घर की चार दीवारों में रहो !

सीता,  द्रौपदी,अहिल्या अपने घरों में

रहीं  क्या सुरक्षित  ?

पर कहलाईं सती,  पवित्र  अौर दिव्य ।

आज ना कृष्ण हैं ना राम उद्धार को ,

है मात्र अपमान अौर नसीहतें।

काश स्त्री सम्मान की नसीहतें सभी को दीं जाएँ ।  

 

सीता का हरण उनकी कुटिया से रावण ने कामांध हो कर किया था। 

द्रौपदी का चीर हरण परिवार जनों के बीच भरे दरबार में हुआ था। उनके  सखा कृष्ण ने उनकी रक्षा की।

गौतम ऋषि  की पत्नी अहिल्या से   इन्द्र ने कामेच्छाग्रस्त हो, धोखे से संबंध उनके  कुटिया में बनाया । उनके पति का रूप धारण कर छल-कपट से  उनका स्त्रीत्व भंग किया। कुपित गौतम ऋषि से अपनी पत्नी को शिला में बदल दिया। बाद में  भगवान राम ने उनका अपने पैरों से स्पर्श कर उद्धार किया।

 

 

ज़िंदगी के रंग – 63

पलक झपकते कभी कभी

कितना कुछ बदल जाता है .

कभी मन आँखों के रास्ते

बरस जाता है.

कभी आसमान के आँसू

बरसात बन बरस जाते है.

इन्हें पन्ने पर उतारने की कोशिश …..

शब्दों में बाँधने की हर कोशिश

बहा ले जाती है ये बरसाती बूँदे……

ज़िंदगी के रंग -62

समंदर ने पैरों के पास

अपने झागो के साथ

कुछ सीपियाँ ऐसे

ला कर

छोड़ गया ,

जैसे कुछ लौटा रहा है.

ज़िंदगी भी अक्सर बड़ी मासूमियत से

बहुत कुछ अचानक लौटा देती है.

ठीक ही कहते है ,

जो दो वह लौट कर ज़रूर आता है .

जिंदगी के रंग – 61

ना करना चाहो तो हजार बहाने है ……

करने वाले कर जातें है बिना कुछ कहे -सुने.

ऐ उम्र

ऐ उम्र !

कुछ कहा मैंने,

पर शायद तूने सुना नहीँ..!

तू छीन सकती है बचपन मेरा,

पर बचपना नहीं..!!

हर बात का कोई जवाब नही होता…,

हर इश्क का नाम खराब नही होता…!

यूं तो झूम लेते है नशे में पीनेवाले….,मगर हर नशे का नाम शराब नही होता…!

खामोश चेहरे पर हजारों पहरे होते है….!

हंसती आखों में भी जख्म गहरे होते है….!

जिनसे अक्सर रुठ जाते है हम,*

असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते है….!

किसी ने खुदा से दुआ मांगी.!

दुआ में अपनी मौत मांगी,

खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दु मगर…!

उसे क्या कहु जिसने तेरी जिंदगी मांगी…!

हर इंन्सान का दिल बुरा नही होता….!

हर एक इन्सान बुरा नही होता.

बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से….!

हर बारकुसुर हवा का नही होता.. !!

–गुलजार

खिलते फूल

लूट कर मासूम की आबरू,

जालिमों तुम्हे नींद कैसे आई होगी।

तुमने तड़पा कर उस खिलते फूल को,

अपनी बेटियों से कैसे नज़र मिलाई होगी।।

कसूर क्या था शायद कोई खता नहीं थी,

कलेजा नहीं फटा जब वो चिल्लाई होगी।

तुम इतने बेरहम कैसे बन गए ऐ दरिंदो,

सोचता हूं शायद तालीम ही ऐसी पाई होगी।।

#justiceforourchild

मुस्कान

लोग जल जाते हैं मेरी मुस्कान पर क्योंकि

मैंने कभी दर्द की नुमाइश नहीं की.

जिंदगी से जो मिला कबूल किया

किसी चीज की कभी फरमाइश नहीं की,

मुश्किल है समझ पाना मुझे क्योंकि

जीने के अलग हैं अंदाज मेरे,

जब जहां जो मिला अपना लिया ,

ना मिला उसकी कभी ख्वाहिश नहीं.

Unknown

ज़िंदगी के रंग -60

मुस्कुराते हुए जीना

भी जीने का है एक अन्दाज़ .

जितना मिला उसमें हीं जी लिए .

ख़्वाहिशो को भूल

चेहरे पर मुस्कुराहट रख

दर्द पी लिए .

फिर भी शिकायत

करने वालों को शिकायत है ,

क्यों तुम हँस कर जी लिए !!!!!

ज़िंदगी के रंग -71

कुछ लम्हे गुजारे है,

मैंने भी अपने खास दोस्तो संग

लोग उन्हें वक़्त कहते है और

हम उन्हे जिंदगी कहते है .

 

 

Unknown

दोस्ती

वो दुश्मन बनकर,

मुझसे जीतने निकले थे,

दोस्ती कर लेते,

तो मैं खुद ही हार जाती !!

Unknown