ऐ उम्र

ऐ उम्र !

कुछ कहा मैंने,

पर शायद तूने सुना नहीँ..!

तू छीन सकती है बचपन मेरा,

पर बचपना नहीं..!!

हर बात का कोई जवाब नही होता…,

हर इश्क का नाम खराब नही होता…!

यूं तो झूम लेते है नशे में पीनेवाले….,मगर हर नशे का नाम शराब नही होता…!

खामोश चेहरे पर हजारों पहरे होते है….!

हंसती आखों में भी जख्म गहरे होते है….!

जिनसे अक्सर रुठ जाते है हम,*

असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते है….!

किसी ने खुदा से दुआ मांगी.!

दुआ में अपनी मौत मांगी,

खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दु मगर…!

उसे क्या कहु जिसने तेरी जिंदगी मांगी…!

हर इंन्सान का दिल बुरा नही होता….!

हर एक इन्सान बुरा नही होता.

बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से….!

हर बारकुसुर हवा का नही होता.. !!

–गुलजार

खिलते फूल

लूट कर मासूम की आबरू,

जालिमों तुम्हे नींद कैसे आई होगी।

तुमने तड़पा कर उस खिलते फूल को,

अपनी बेटियों से कैसे नज़र मिलाई होगी।।

कसूर क्या था शायद कोई खता नहीं थी,

कलेजा नहीं फटा जब वो चिल्लाई होगी।

तुम इतने बेरहम कैसे बन गए ऐ दरिंदो,

सोचता हूं शायद तालीम ही ऐसी पाई होगी।।

#justiceforourchild

मुस्कान

लोग जल जाते हैं मेरी मुस्कान पर क्योंकि

मैंने कभी दर्द की नुमाइश नहीं की.

जिंदगी से जो मिला कबूल किया

किसी चीज की कभी फरमाइश नहीं की,

मुश्किल है समझ पाना मुझे क्योंकि

जीने के अलग हैं अंदाज मेरे,

जब जहां जो मिला अपना लिया ,

ना मिला उसकी कभी ख्वाहिश नहीं.

Unknown

ज़िंदगी के रंग -60

मुस्कुराते हुए जीना

भी जीने का है एक अन्दाज़ .

जितना मिला उसमें हीं जी लिए .

ख़्वाहिशो को भूल

चेहरे पर मुस्कुराहट रख

दर्द पी लिए .

फिर भी शिकायत

करने वालों को शिकायत है ,

क्यों तुम हँस कर जी लिए !!!!!

ज़िंदगी के रंग -71

कुछ लम्हे गुजारे है,

मैंने भी अपने खास दोस्तो संग

लोग उन्हें वक़्त कहते है और

हम उन्हे जिंदगी कहते है .

 

 

Unknown

दोस्ती

वो दुश्मन बनकर,

मुझसे जीतने निकले थे,

दोस्ती कर लेते,

तो मैं खुद ही हार जाती !!

Unknown

ज़िंदगी के रंग -59

यह दुनिया निराली है .

राग -रंग, माया- मिथ्या

के बीच ,

कभी लगता है , सभी अपने है .

चारो ओर मेले ही मेले है .

कभी लगता है –

इस भरी दुनिया में तनहा है .

सब अकेले ही अकेले है .

उम्र और शौक़

पुराने रिश्ते

सुविख्यात पंजाबी लेखिका अमृता प्रीतम जी को उनकी पुण्यतिथि पर शत् शत नमन .

रिश्ते पुराने होते हैं

पर “मायका” पुराना नही होता

जब भी जाओ …..

अलाय बलायें टल जाये

यह दुआयें मांगी जाती हैं

यहां वहां बचपन के कतरे बिखरे होते है

कही हंसी कही खुशी कही आंसू सिमटे होते हैं

बचपन का गिलास….कटोरी ….

खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं

अलबम की तस्वीरें

कई किस्से याद दिला देते हैं

सामान कितना भी समेटू

कुछ ना कुछ छूट जाता है

सब ध्यान से रख लेना

हिदायत पिता की ….

कैसे कहूं सामान तो नही

पर दिल का एक हिस्सा यही छूट जाता है

आते वक्त माँ, आँचल मेवों से भर देती हैं

खुश रहना कह कर अपने आँचल मे भर लेती है ….

आ जाती हूं मुस्करा कर मैं भी

कुछ ना कुछ छोड कर अपना

रिश्ते पुराने होते हैं

जाने क्योँ मायका पुराना नही होता

उस देहरी को छोडना हर बार ….आसान नही होता।

– अमृता प्रीतम

क़ीमत

अपनी कीमत उतनी रखिए

जो अदा हो सके

ना कम ना ज़्यादा.

अगर बेमोल हो गए तो

कोई नहीं पूछेगा और

अगर अनमोल हो गए

तो तन्हा हो जाओगे. !