जिनके पास अपने हैं,
वो अपनों से झगड़ते हैं.
जिनका कोई नहीं अपना,
वो अपनों को तरसते हैं.
कल न हम होंगे न गिला होगा।
सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा।
जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें।
जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।

Unknown
जिनके पास अपने हैं,
वो अपनों से झगड़ते हैं.
जिनका कोई नहीं अपना,
वो अपनों को तरसते हैं.
कल न हम होंगे न गिला होगा।
सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा।
जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें।
जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।

Unknown
बहुत सुंदर!
इसी तरह लिखती रहे. 🙂
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आभार प्रतिभा .
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Really it’s true line.
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Thank you 😊
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Very true
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Thank you ☺️
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very nice
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Thank you 😊
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जिनके पास अपने हैं,
वो अपनों से झगड़ते हैं.
जिनका कोई नहीं अपना,
वो अपनों को तरसते हैं.
बिल्कुल सही लिखा है।बहुत बढ़िया।👌👌
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thank you 🙂
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