अमलताश, Golden Shower Tree

जलती झुलसती गर्मी का सामना करते

नाज़ुक झूमर से झूलते पीले

अमलतास के  खूबसूरत फूल…..

संध्या के ढलते लाल सूरज की किरणें

और राहत भरे कुछ पल पा

हवा के झोंकों में झूमते इन  फूलों …..

के नीचे लगता है बैठ

जीवन की   सारी

थकान, परेशानी  सब भूल

कुछ पल सुस्ता लें आँखें बन्द  कर

बरसते सुवर्ण से इसकी कोमल

पंखुड़ियों के बर्षा के नीचे………

                                                              

 

Picture Courtsey: Zatoichi.

ज़िंदगी नहीं !

थक कर बैठा हूँ…

हार कर नहीं..!!

सिर्फ बाज़ी हाथ से निकली है,

जिंदगी नहीं……

 

 

 

गुलजार

ज़िंदगी के रंग -73

एक दिन रास्ते में मिली वह,

पीछे से काँधे पर हाथ रख कर बोली –

इतनी जल्दी में क्यों हो ?

दो घड़ी बैठ कर सुस्ता लो .

हमने पूछा – कौन हो तुम ?

जवाब मिला – पहचाना नहीं ?

तुम्हें सपने से जगाने ……

तुम्हें तुम से मिलाने आई हूँ.

तुम्हारी हीं ज़िंदगी हूँ ……

ऐ जिंदगी

क्या बेच कर हम

खरीदें फुर्सत,ऐ जिंदगी?

सब कुछ तो गिरवी पड़ा है

जिम्मेदारी के बाजार में.

Unknown

अजनबी सी है ये जिंदगी

अजनबी सी है ये जिंदगी,

और वक्त की तेज़ है रफ्तार.

रात इकाई,

नींद दहाई

ख्वाब सैंकडा,

दर्द हजार

फिर भी है जिँदगी मजेदार.

Unknown

सङकें

धूप सेंकते मोटे अजगर सी

बल खाती ये काली अनंत

अंतहीन सड़कें

लगतीं है ज़िंदगी सी ……

ना जाने किस मोड़ पर

कौन सी ख़्वाहिश

मिल जाए .

कभी ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाए

और कभी उन्हें पूरा करने का

अरमान बोझ बढ़ाए .

ज़िंदगी के रंग -73

बाहर जाने का रास्ता खोजती

काँच और असली खुली

खिड़की की मृग मरिचिका

में उलझी काँच पर सर पटकती

कीट या मक्षिका  को देख कर क्या

नहीं लगता कि हम भी अक्सर

ऐसे ही किसी उलझन में फँस

किसी भ्रम के पीछे

सिर पटकते रहते हैं ?

ज़िंदगी के रंग – 72

रोज़ हँसाती- रुलाती ,

भगाती – दौड़ती ,

परेशानियों में रूबरू कराती

ज़िंदगी से परेशान हो कर

आख़िरकार पूछ ही लिया –

छः माही , सालाना परीक्षाओं

की तो आदत सी है .

पर तुमने तो हद ही कर दिया .

जब देखो परखती जाँचती रहती हो…..

यह सिलसिला कब रोकोगी?

ज़िंदगी की खिलखिलाहट

झंकार सी खनक उठी बोली –

फिर ज़िन्दगी हीं क्या होगी ?

इन्हीं से तो बनी हो

तुम और तुम्हारी ज़िंदगी.

जिंदगी जीना सीखा गए

कुछ गैर ऐसे मिले,

जो मुझे अपना बना गए।

कुछ अपने ऐसे निकले,

जो गैर का मतलब बता गए।

दोनो का शुक्रिया

दोनों जिंदगी जीना सीखा गए।

Unknown

उम्र चाहे जो भी हो…..

उम्र चाहे जो भी हो मनचाहे रिश़्ते,

अपने आप हमउम्र हो जाते हैं।

Unknown