थकान

कभी कभी ज़िंदगी

से थकान होने लगती है .

चाहो कुछ

होता कुछ और है

.ना जाने किस मुक़ाम पर

क्या रंग दिखाएगी ?

कब हँसाएगी कब रुलाएगी ?

स्पर्श

बिना स्पर्श क्यारिश्ते बनते नहीं ?क्या हर रिश्ते कानाम ज़रूरी है ?क्या कहते है इसे ?जो मीरा ने किया श्याम से ? 

दिलों दिमाग़ के जद्दो जहद

दिलों दिमाग़ के जद्दो जहद में

कभी दिल जीतने लगता है

और कभी दिमाग़ .

समझ नहीं आता कहाँ से

छुप कर ये हमें

चलाते हैं….

पर यह तय है ये

कम ही साथ साथ दोस्ती निभाते है .

अक्सर ये हमें

बड़ा नचाते हैं.

आँसूअों से नम ना हो

बड़ी बड़ी बोलती सी

काले काजल अंजे  ….

चपल चंचल ख़ंजन नयन

देख कर बस छोटी सी

कामना … ख़्वाहिश …जागी,

नयन तेरे हो या हमारे ,

आँसूअों से नम ना हो कभी .

दिल

मौन वह कहता है,

जो शब्द नहीं

दिल से जो दिया जाए

वह दिया नहीं जा सकता हाथों से ….

ख्वाहिशें कम हों तो

ख्वाहिशें कम हों,

तो आ जाती है नींद

पत्थरों पर भी,

वरना बहुत चुभता है,

मखमल का बिस्तर भी.

Unknown

अमलताश, Golden Shower Tree

जलती झुलसती गर्मी का सामना करते

नाज़ुक झूमर से झूलते पीले

अमलतास के  खूबसूरत फूल…..

संध्या के ढलते लाल सूरज की किरणें

और राहत भरे कुछ पल पा

हवा के झोंकों में झूमते इन  फूलों …..

के नीचे लगता है बैठ

जीवन की   सारी

थकान, परेशानी  सब भूल

कुछ पल सुस्ता लें आँखें बन्द  कर

बरसते सुवर्ण से इसकी कोमल

पंखुड़ियों के बर्षा के नीचे………

                                                              

 

Picture Courtsey: Zatoichi.

ज़िंदगी नहीं !

थक कर बैठा हूँ…

हार कर नहीं..!!

सिर्फ बाज़ी हाथ से निकली है,

जिंदगी नहीं……

 

 

 

गुलजार

ज़िंदगी के रंग -73

एक दिन रास्ते में मिली वह,

पीछे से काँधे पर हाथ रख कर बोली –

इतनी जल्दी में क्यों हो ?

दो घड़ी बैठ कर सुस्ता लो .

हमने पूछा – कौन हो तुम ?

जवाब मिला – पहचाना नहीं ?

तुम्हें सपने से जगाने ……

तुम्हें तुम से मिलाने आई हूँ.

तुम्हारी हीं ज़िंदगी हूँ ……

ऐ जिंदगी

क्या बेच कर हम

खरीदें फुर्सत,ऐ जिंदगी?

सब कुछ तो गिरवी पड़ा है

जिम्मेदारी के बाजार में.

Unknown