जीवन का हिसाब
सुलझा ना सकी.
मेरे बीते पल
लौटा दो तो,
शायद सुलझ जाय
कुछ गाँठे.

Picture Courtsey Zatoichi
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
जीवन का हिसाब
सुलझा ना सकी.
मेरे बीते पल
लौटा दो तो,
शायद सुलझ जाय
कुछ गाँठे.

Picture Courtsey Zatoichi
जीवन रूकता नहीं .परिवर्तन शाश्वत सत्य है ना जीत रूकती है ना हार रूकती है .बस हाथों की रेखाओं के भरोसे ना राह अंगुलियों और हाथोंके मेहनत पर भरोसा होना चाहिए .
घंटो बातें करो
या फिर बिलकुल बातें ना हो ,
दोस्ती या सम्बन्धों को,
निभाने का यह तरीक़ा
कुछ समझ नहीं आता .
क्या कोई बता सकता है ?
क्यों करते हैं लोग ऐसा ?
अपने आप को आईने में ढूँढा,
परछाइयों में अक्सों….
चित्रों में खोजा,
लोगों की भीड़ में ,
किसी की आँखों में खोजा,
यादों में, बातों में खोजा,
भूल गई अपने दिल में झाँकना.
कहते है – यह ज़िंदगी बुलबुला है.
पर जीवन के रंगमंच पर
ना तो इसे फूँक मार
अस्तित्व मिटाया जा सकता है
ना नियति के झोंके से
बचाया जा सकता है .
हम सब किसी और की
ऊँगलियों से बँधे,
नियंता के हाथों
की कठपुतलिया हैं.
और सब जानते – समझते भी
ज़िंदगी और मौत का रंग
अंदर तक हिला जाता है……….
…
हवाँ चुरा ले गयी थी
मेरे ग़ज़लों की किताब
पढ़कर उसे आसमाँ रो रहा है
और ज़माना समझ रहा है
के बारिश हो रही है,
किस कोने में सुखाऊँ
तेरी यादें बता,
बरसात बाहर भी है
और बरसात भीतर भी हो रही है
Unknown
Picture Courtsey: Zatoichi.
उखड़-उखड़ा मौसम
नाराज़ सी झकझोरती हवाएँ,
ये आँधियाँ आतीं है .
सब कुछ बिखेर जाती हैं.
पर कभी कभी
ये राहें झाड़ बहाङ कर,
सब साफ़ सुथरा
मन में उठते
शोर और कोलाहल ,
हलचल , उफान ,लहरें , ज्वार भाटे
को शब्दों……
लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियों में
पन्ने पर उतारने पर
ना आवाज़ होती है
ना शोर और
मन भी काव्य की
अपूर्व शांति में डूब जाता है …….

Picture Courtsey: Zatoichi.
उम्र ने बहुत कुछ बदला –
जीवन, अरमान, राहें…….
समय – वक़्त ने भी कसर नहीं छोड़ी –
मौसम बदले, लोग बदले………
मन में यह ख़्याल आता है –
इतना ख़्याल ना करें, इतना याद ना करें किसी को …..
पर आँखे बंद करते –
मन बदल जाता है, ईमान बदल जाते हैं .

रेशम के रेशमी शकुन अौ एहसास
में लिपटे रेशम कीट,
ककुन में अपने को
महफ़ूज़ मान
भूल जाते है
अपने क्षण भंगुर जीवन को .
वैसे हीं जैसे हम अपने
काली सफ़ेद ख़ंजन नयनों
में भरे रंगीन सपने में डूब
भूल जाते है
जीवन की नश्वरता को.

सिल्क धागा निकालने के लिए अंडाकार ककुन , जिसके अंदर जीवित सिल्क कीट होते है , उसे गर्म पानी में उबाला जाता है .
Cocoons are collected, which are single-shelled and oval in shape, and are then boiledto extract the silk yarn from it. The cocoons are boiled with the living larvae / silk worm still inside.
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