ज़िंदगी के रंग -75

कहते है – यह ज़िंदगी बुलबुला है.

पर जीवन के रंगमंच पर

ना तो इसे फूँक मार

अस्तित्व मिटाया जा सकता है

ना नियति के झोंके से

बचाया जा सकता है .

हम सब किसी और की

ऊँगलियों से बँधे,

नियंता के हाथों

की कठपुतलिया हैं.

और सब जानते – समझते भी

ज़िंदगी और मौत का रंग

अंदर तक हिला जाता है……….

 

…

ग़ज़लों की किताब

हवाँ चुरा ले गयी थी

मेरे ग़ज़लों की किताब

पढ़कर उसे आसमाँ रो रहा है

और ज़माना समझ रहा है

के बारिश हो रही है,

किस कोने में सुखाऊँ

तेरी यादें बता,

बरसात बाहर भी है

और बरसात भीतर भी हो रही है

 

 

Unknown

 

Picture Courtsey: Zatoichi.

आंधियाँ

उखड़-उखड़ा मौसम

नाराज़ सी झकझोरती हवाएँ,

ये आँधियाँ आतीं है .

सब कुछ बिखेर जाती हैं.

पर कभी कभी

ये राहें झाड़ बहाङ कर,

सब साफ़ सुथरा

 

लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियाँ

मन में उठते

शोर और कोलाहल ,

हलचल , उफान ,लहरें , ज्वार भाटे

को शब्दों……

लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियों में

पन्ने पर उतारने पर

ना आवाज़ होती है

ना शोर और

मन भी काव्य की

अपूर्व शांति में डूब जाता है …….

 

 

 

Picture Courtsey: Zatoichi.

बदलाव

उम्र ने बहुत कुछ बदला –

जीवन, अरमान, राहें…….

समय – वक़्त ने भी कसर नहीं छोड़ी –

मौसम बदले, लोग बदले………

मन में यह ख़्याल आता है –

इतना ख़्याल ना करें, इतना याद ना करें किसी को …..

पर आँखे बंद करते –

मन बदल जाता है, ईमान बदल जाते हैं .

 

 

 

 

जीवन के रंग -74

रेशम के रेशमी शकुन अौ एहसास

में लिपटे रेशम कीट,

ककुन में अपने को

महफ़ूज़ मान

भूल जाते है

अपने क्षण भंगुर जीवन को .

वैसे हीं जैसे हम अपने

काली सफ़ेद ख़ंजन नयनों

में भरे रंगीन सपने में डूब

भूल जाते है

जीवन की नश्वरता को.

सिल्क धागा निकालने के लिए अंडाकार ककुन , जिसके अंदर जीवित सिल्क कीट होते है , उसे गर्म पानी में उबाला जाता है .

Cocoons are collected, which are single-shelled and oval in shape, and are then boiledto extract the silk yarn from it. The cocoons are boiled with the living larvae / silk worm still inside.

अपनेपन का अहसास

यूं तो जिंदगी में आवाज देने वाले,

ढेरों मिल जायेंगे …….

लेकिन बैठिए वहीं,जहां

अपनेपन का अहसास हो…..

Unknown

शाम

शाम की शाम

ढलती हँस रही है ,

ज़िंदगी गुज़रती ,

हँस रही है .

पर क्या है

जो अधूरा है ?

क्या तृष्णा है ?

दिल की बेचैनी

क्या खोज रही है ?

मिलना

कभी आ भी जाना

बस वैसे ही जैसे

परिंदे आते है आंगन में

या अचानक आ जाता है

कोई झोंका ठंडी हवा का

जैसे कभी आती है सुगंध

पड़ोसी की रसोई से

आना जैसे बच्चा आ जाता

है बगीचे में गेंद लेने

या आती है गिलहरी पूरे

हक़ से मुंडेर पर

जब आओ तो दरवाजे

पर घंटी मत बजाना

पुकारना मुझे नाम लेकर

मुझसे समय लेकर भी मत आना

हाँ अपना समय साथ लाना

फिर दोनों समय को जोड़

बनाएंगे एक झूला

अतीत और भविष्य के बीच

उस झूले पर जब बतियाएंगे

तो शब्द वैसे ही उतरेंगे

जैसे कागज़ पर उतरते है

कविता बनके

और जब लौटोतो थोड़ा

मुझे ले जाना साथ

थोड़ा खुद को छोड़े जाना

फिर वापस आने के लिए

खुद को एक-दूसरे से पाने

के लिए.

गुलज़ार ~~

स्वभाव की सरलता

स्वभाव की सरलता भय नहीं

संस्कारो की देन है ……

जैसे समीर की सरलता ,

जल की शीतलता .

पर उनका रौद्र रूप

विध्वंस भी ला

सकता है .