जीवन पथ की पगडंडियाँ ,
कच्ची पक्की राहें
कभी चमकती जगमगाती बिजली ,
कही दीप,
कहीं जुगनुओं की रोशनी में
ज़िंदगी बड़ी आगे निकल आई .
पीछे पलट कर देखने पर
ढेरों स्मृतियाँ घेर कर बैठ जाती है .
काश वापस भी जाने की भी राहें होतीं..
..
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
जीवन पथ की पगडंडियाँ ,
कच्ची पक्की राहें
कभी चमकती जगमगाती बिजली ,
कही दीप,
कहीं जुगनुओं की रोशनी में
ज़िंदगी बड़ी आगे निकल आई .
पीछे पलट कर देखने पर
ढेरों स्मृतियाँ घेर कर बैठ जाती है .
काश वापस भी जाने की भी राहें होतीं..
..
रोज़ हम लोगों को
उदाहरण देते है .
कभी समझा है यह
कि उदाहरण देना तो सरल है .
उदाहरण बने तो ख़ास बात है !!!!!

ज़िंदगी को देखने का नज़रिया
सबका अलग-अलग होता है .
हम सही है ,इसका मतलब यह नहीं
कि सामने वाला ग़लत ही हो .
ज़रूरत है सामने वाले की जगह पर जा कर
दुनिया को देखना उसके नज़रिए से …..

लोग उदाहरण देते है कृष्ण- सुदामा के मित्रता की .
पर जान दे कर दोस्ती
तो कर्ण ने भी निभाई दुर्योधन से .
जब कृष्ण ने लालच दिया ज्येष्ठ पांडव बन
राज्य और द्रौपदी को पाने की .
कर्ण के दिल में ठंडक और चेहरे पर मृदु मुस्कान छा गई .
उसका भी परिवार है . वह राज पुत्र है . ……
जिस द्रौपदी को उसने पहली
नज़र में पसंद किया था
,वह उसकी भी अर्धनगिनीबन सकती है .
तभी स्मृति में एक और चेहरा आया .
दुर्योधन को वह धोखा कैसे दे सकता ?
जिसने उसे सम्मान दिलाया .
तब जब उसके अपनो ने भी उसे नहीं पहचान दी . …..
और युद्ध की नियति जानते हुए भी
मित्र के लिए मृत्यु का वरण किया……

चाहो या ना
चाहो ये यादें
साये की तरह
लिपटी रहती है .
बग़ैर इजाज़त तुम्हें
याद करने की गुस्तखियों के
लिए तहे दिल माफ़ी की गुज़ारिश है.
.
जीना सीखते सीखते
बरसो लग जाते है .
और जीना सीखते समझते
जाने का वक़्त आ जाता है.
फिर भी कहने वाले कहते है –
” तुम्हें जीना नहीं आया ‘

चोट खाया मर्म,
कुछ कड़वे रिश्ते
तीखी यादें अतीत के शून्य
में कहीं विलीन हो जातें है .
उन्हें चिर निद्रा में डूबा रहने देना ही ठीक है .
वापस खिंचने की कोशिश में हाथ आते है मात्र फटे यथार्थ के टुकडे
. 
सूरज ङूबने के बाद
क्षितिज़ के उत्तर में
दमकता है एक सितारा…..
शाम का सितारा,
राह दिखाता,
रौशन क़ुतबी सितारा
यह ध्रुव तारा….
अटल और दिव्यमान रहने के
संदेश के साथ .
मैं गुजरे हुए
कल को तलाशता रही दिनभर…!
और शाम होते-होते
मेरा आज भी चला गया…!!
Unknown
Picture Courtsey Zatoichi
मौन रहना एक साधना है लेकिन सोच समझ कर बोलना एक कला है….
Unknown
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