चाहो या ना
चाहो ये यादें
साये की तरह
लिपटी रहती है .
बग़ैर इजाज़त तुम्हें
याद करने की गुस्तखियों के
लिए तहे दिल माफ़ी की गुज़ारिश है.
.
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
चाहो या ना
चाहो ये यादें
साये की तरह
लिपटी रहती है .
बग़ैर इजाज़त तुम्हें
याद करने की गुस्तखियों के
लिए तहे दिल माफ़ी की गुज़ारिश है.
.
जीना सीखते सीखते
बरसो लग जाते है .
और जीना सीखते समझते
जाने का वक़्त आ जाता है.
फिर भी कहने वाले कहते है –
” तुम्हें जीना नहीं आया ‘

चोट खाया मर्म,
कुछ कड़वे रिश्ते
तीखी यादें अतीत के शून्य
में कहीं विलीन हो जातें है .
उन्हें चिर निद्रा में डूबा रहने देना ही ठीक है .
वापस खिंचने की कोशिश में हाथ आते है मात्र फटे यथार्थ के टुकडे
. 
सूरज ङूबने के बाद
क्षितिज़ के उत्तर में
दमकता है एक सितारा…..
शाम का सितारा,
राह दिखाता,
रौशन क़ुतबी सितारा
यह ध्रुव तारा….
अटल और दिव्यमान रहने के
संदेश के साथ .
मैं गुजरे हुए
कल को तलाशता रही दिनभर…!
और शाम होते-होते
मेरा आज भी चला गया…!!
Unknown
Picture Courtsey Zatoichi
मौन रहना एक साधना है लेकिन सोच समझ कर बोलना एक कला है….
Unknown
जीवन का हिसाब
सुलझा ना सकी.
मेरे बीते पल
लौटा दो तो,
शायद सुलझ जाय
कुछ गाँठे.

Picture Courtsey Zatoichi
जीवन रूकता नहीं .परिवर्तन शाश्वत सत्य है ना जीत रूकती है ना हार रूकती है .बस हाथों की रेखाओं के भरोसे ना राह अंगुलियों और हाथोंके मेहनत पर भरोसा होना चाहिए .
घंटो बातें करो
या फिर बिलकुल बातें ना हो ,
दोस्ती या सम्बन्धों को,
निभाने का यह तरीक़ा
कुछ समझ नहीं आता .
क्या कोई बता सकता है ?
क्यों करते हैं लोग ऐसा ?
अपने आप को आईने में ढूँढा,
परछाइयों में अक्सों….
चित्रों में खोजा,
लोगों की भीड़ में ,
किसी की आँखों में खोजा,
यादों में, बातों में खोजा,
भूल गई अपने दिल में झाँकना.
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