यादें

चाहो या ना

चाहो ये यादें

साये की तरह

लिपटी रहती है .

बग़ैर इजाज़त तुम्हें

याद करने की गुस्तखियों के

लिए तहे दिल माफ़ी की गुज़ारिश है.

 

 

 

 

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ज़िंदगी के रंग – 77

जीना सीखते सीखते

बरसो लग जाते है .

और जीना सीखते समझते

जाने का वक़्त आ जाता है.

फिर भी कहने वाले कहते है –

” तुम्हें जीना नहीं आया ‘

 

 

फटे यथार्थ के टुकडे

चोट खाया मर्म,

कुछ कड़वे रिश्ते

तीखी यादें अतीत के शून्य

में कहीं विलीन हो जातें है .

उन्हें चिर निद्रा में डूबा रहने देना ही ठीक है .

वापस खिंचने की कोशिश में हाथ आते है मात्र फटे यथार्थ के टुकडे

 

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सूरज ङूबने के बाद

सूरज ङूबने के बाद

क्षितिज़ के उत्तर में

दमकता है एक सितारा…..

शाम का सितारा,

राह दिखाता,

रौशन क़ुतबी सितारा

यह ध्रुव तारा….

अटल और दिव्यमान रहने के

संदेश के साथ .

पल

मैं गुजरे हुए

कल को तलाशता रही दिनभर…!

और शाम होते-होते

मेरा आज भी चला गया…!!

 

Unknown

 

Picture Courtsey Zatoichi

ज़िंदगी के रंग – 76

मौन रहना एक साधना है लेकिन सोच समझ कर बोलना एक कला है…. Unknown

जीवन का हिसाब

जीवन का हिसाब

सुलझा ना सकी.

मेरे बीते पल

लौटा दो तो,

शायद सुलझ जाय

कुछ गाँठे.

 

 

 

 

Picture Courtsey Zatoichi

परिवर्तन

जीवन रूकता नहीं .परिवर्तन शाश्वत सत्य है ना जीत रूकती है ना हार रूकती है .बस हाथों की रेखाओं के भरोसे ना राह अंगुलियों और हाथोंके मेहनत पर भरोसा होना चाहिए .

दोस्ती…मैत्री….

घंटो बातें करो

या फिर बिलकुल बातें ना हो ,

दोस्ती या सम्बन्धों को,

निभाने का यह तरीक़ा

कुछ समझ नहीं आता .

क्या कोई बता सकता है ?

क्यों करते हैं लोग ऐसा ?

अपने आप को

अपने आप को आईने में ढूँढा,

परछाइयों में अक्सों….

चित्रों में खोजा,

लोगों की भीड़ में ,

किसी की आँखों में खोजा,

यादों में, बातों में खोजा,

भूल गई अपने दिल में झाँकना.