ज़िंदगी के रंग – 80

हौसले जीत से नहीं बढ़ते .

परेशानियों से डरे बिना ,

उन को हराने से बढ़ते हैं .

ज़िंदगी में हमें दूसरों को हराने की नहीं

अपने आप से जीतने से आदत होनी चाहिये.

 

यह कविता किसी अपने के लिये जो दिल के बहुत करीब है।

Image courtesy – Monica

 

 

ज़िंदगी के रंग -79

एक बात ज़िंदगी ने बता दी .

जब आप सच और सिर्फ़ सच बोलते हैं.

गोया साफ़ बोलते हैं.

कम बोलते हैं,पर काम का बोलते है

और आपका काम बोलता है .

तब सारी दुनिया नाराज़गी दिखलाती है .

 

ये सदायें

बरसात में बिन बोए भी

कुकुरमुते निकल आते है,

वैसे ही जैसे बिन बुलाए बरस जाते है बादल .

पहाड़ों में दी आवाज़ें भी गूँज बन

लौट आती है वापस.

फिर क्यों कभी – कभी ,

किसी किसी को बुलाने पर भी

जवाब नहीं आता ?

कहाँ खो जाती है?

ये सदाये…… ये पुकार …… ये लोग ?

ख़ुद को

हम कई बार खुद को

बिसार देते हैं।

खुद का ख्याल रखना भूल जाते हैं,

अपनों  के लिए अपने-आप को सहेजना है जरुरी।

स्पष्ट सुलझे दिलो-दिमाग अौ मन के लिये

टूट कर बिखरने से खुद को खुद से है संभालना है जरुरी।

सदायें

बरसात में बिन बोए भी

कुकुरमुते निकल आते है,

वैसे ही जैसे बिन बुलाए बरस जाते है बादल .

पहाड़ों में दी आवाज़ें भी

गूँज बन लौट आती है वापस.

फिर क्यों कभी – कभी ,

किसी किसी को बुलाने पर भी जवाब नहीं आता ?

कहाँ खो जाती है ये सदाये…… ये पुकार …… ये लोग ?

एक मुट्ठी इश्क़

एक मुट्ठी इश्क़

बिखेर दो इस ज़मीन पे,

बारिश का मौसम है

शायद मोहब्बत पनप जाए।

 

Unknown

पगडंडियाँ

जीवन पथ की पगडंडियाँ ,

कच्ची पक्की राहें

कभी चमकती जगमगाती बिजली ,

कही दीप,

कहीं जुगनुओं की रोशनी में

ज़िंदगी बड़ी आगे निकल आई .

पीछे पलट कर देखने पर

ढेरों स्मृतियाँ घेर कर बैठ जाती है .

काश वापस भी जाने की भी राहें होतीं..

 

..

उदाहरण

रोज़ हम लोगों को

उदाहरण देते है .

कभी समझा है यह

कि उदाहरण देना तो सरल है .

उदाहरण बने तो ख़ास बात है !!!!!

ज़िंदगी के रंग -78

ज़िंदगी को देखने का नज़रिया

सबका अलग-अलग होता है .

हम सही है ,इसका मतलब यह नहीं

कि सामने वाला ग़लत ही हो .

ज़रूरत है सामने वाले की जगह पर जा कर

दुनिया को देखना उसके नज़रिए से …..

मित्रता कर्ण की

लोग उदाहरण देते है कृष्ण- सुदामा के मित्रता की .

पर जान दे कर दोस्ती

तो कर्ण ने भी निभाई दुर्योधन से .

जब कृष्ण ने लालच दिया ज्येष्ठ पांडव बन

राज्य और द्रौपदी को पाने की .

कर्ण के दिल में ठंडक और चेहरे पर मृदु मुस्कान छा गई .

उसका भी परिवार है . वह राज पुत्र है . ……

जिस द्रौपदी को उसने पहली

नज़र में पसंद किया था

,वह उसकी भी अर्धनगिनीबन सकती है .

तभी स्मृति में एक और चेहरा आया .

दुर्योधन को वह धोखा कैसे दे सकता ?

जिसने उसे सम्मान दिलाया .

तब जब उसके अपनो ने भी उसे नहीं पहचान दी . …..

और युद्ध की नियति जानते हुए भी

मित्र के लिए मृत्यु का वरण किया……