हौसले जीत से नहीं बढ़ते .
परेशानियों से डरे बिना ,
उन को हराने से बढ़ते हैं .
ज़िंदगी में हमें दूसरों को हराने की नहीं
अपने आप से जीतने से आदत होनी चाहिये.

यह कविता किसी अपने के लिये जो दिल के बहुत करीब है।
Image courtesy – Monica
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
हौसले जीत से नहीं बढ़ते .
परेशानियों से डरे बिना ,
उन को हराने से बढ़ते हैं .
ज़िंदगी में हमें दूसरों को हराने की नहीं
अपने आप से जीतने से आदत होनी चाहिये.

यह कविता किसी अपने के लिये जो दिल के बहुत करीब है।
Image courtesy – Monica
एक बात ज़िंदगी ने बता दी .
जब आप सच और सिर्फ़ सच बोलते हैं.
गोया साफ़ बोलते हैं.
कम बोलते हैं,पर काम का बोलते है
और आपका काम बोलता है .
तब सारी दुनिया नाराज़गी दिखलाती है .
बरसात में बिन बोए भी
कुकुरमुते निकल आते है,
वैसे ही जैसे बिन बुलाए बरस जाते है बादल .
पहाड़ों में दी आवाज़ें भी गूँज बन
लौट आती है वापस.
फिर क्यों कभी – कभी ,
किसी किसी को बुलाने पर भी
जवाब नहीं आता ?
कहाँ खो जाती है?
ये सदाये…… ये पुकार …… ये लोग ?
हम कई बार खुद को
बिसार देते हैं।
खुद का ख्याल रखना भूल जाते हैं,
अपनों के लिए अपने-आप को सहेजना है जरुरी।
स्पष्ट सुलझे दिलो-दिमाग अौ मन के लिये
टूट कर बिखरने से खुद को खुद से है संभालना है जरुरी।

बरसात में बिन बोए भी
कुकुरमुते निकल आते है,
वैसे ही जैसे बिन बुलाए बरस जाते है बादल .
पहाड़ों में दी आवाज़ें भी
गूँज बन लौट आती है वापस.
फिर क्यों कभी – कभी ,
किसी किसी को बुलाने पर भी जवाब नहीं आता ?
कहाँ खो जाती है ये सदाये…… ये पुकार …… ये लोग ?

एक मुट्ठी इश्क़
बिखेर दो इस ज़मीन पे,
बारिश का मौसम है
शायद मोहब्बत पनप जाए।
Unknown
जीवन पथ की पगडंडियाँ ,
कच्ची पक्की राहें
कभी चमकती जगमगाती बिजली ,
कही दीप,
कहीं जुगनुओं की रोशनी में
ज़िंदगी बड़ी आगे निकल आई .
पीछे पलट कर देखने पर
ढेरों स्मृतियाँ घेर कर बैठ जाती है .
काश वापस भी जाने की भी राहें होतीं..
..
रोज़ हम लोगों को
उदाहरण देते है .
कभी समझा है यह
कि उदाहरण देना तो सरल है .
उदाहरण बने तो ख़ास बात है !!!!!

ज़िंदगी को देखने का नज़रिया
सबका अलग-अलग होता है .
हम सही है ,इसका मतलब यह नहीं
कि सामने वाला ग़लत ही हो .
ज़रूरत है सामने वाले की जगह पर जा कर
दुनिया को देखना उसके नज़रिए से …..

लोग उदाहरण देते है कृष्ण- सुदामा के मित्रता की .
पर जान दे कर दोस्ती
तो कर्ण ने भी निभाई दुर्योधन से .
जब कृष्ण ने लालच दिया ज्येष्ठ पांडव बन
राज्य और द्रौपदी को पाने की .
कर्ण के दिल में ठंडक और चेहरे पर मृदु मुस्कान छा गई .
उसका भी परिवार है . वह राज पुत्र है . ……
जिस द्रौपदी को उसने पहली
नज़र में पसंद किया था
,वह उसकी भी अर्धनगिनीबन सकती है .
तभी स्मृति में एक और चेहरा आया .
दुर्योधन को वह धोखा कैसे दे सकता ?
जिसने उसे सम्मान दिलाया .
तब जब उसके अपनो ने भी उसे नहीं पहचान दी . …..
और युद्ध की नियति जानते हुए भी
मित्र के लिए मृत्यु का वरण किया……

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