इंद्रधनुष

बरसात की झड़ी

बादलों का गरजना ,

बरसती बूँदों की झड़ी

से प्यार हो जाता हैं ,

जब नीले आसमान में

छिटके इंद्रधनुष की सतरंगी

छँटा खिड़की तक उतर आती हैं.

धनक दिल और धड़कनों को अपने रंग में रंग जाती है.

 

ज़िंदगी के रंग- 87

ज़िंदगी में जंग

और ज़िंदगी से जंग

चलती रहती है.

अगर लड़ाई जारी रखो बिना डरे……

कोई साथ दे या ना दे तब भी ….

जीत मिल ही जाती है.

 

 

ज़िंदगी के रंग – 86

अगर आपने झुकना ना सीखा हैं,

तब खटकोगे कुछ लोगों की नज़रों में.

क्योंकि कुछ लोग

सभी को झुकाना पसंद करते हैं,

झुकना नहीं ,

सही ग़लत की परवाह के बग़ैर .

 

ज़िंदगी के रंग – 85

रिश्ते ईमानदारी से

निभाए जाय तो नियामत हैं ,

वरना बोझ बन जाते हैं.

क्योंकि कोई भी रिश्ता

एक तरफ़ा नहीं निभता हैं.

वैसे ही जैसे ताली

एक हाथ से नहीं बजती .

 

Interact with yourself

Love yourself…..

Interact with yourself,

Spend time with yourself,

You will discover new things

And You will know who you are…….

 

ऐसा क्यों हैं – 2 ? व्यंग

चोरों की ,चोरियों की कहानियाँ सुनी काफ़ी चोर पकड़े जाते भी सुना

पर चोरनी की बातें,कम हीं सुनने में आतीं हैं.

डाकुओं की फ़िल्मे देखी पर

इनी – गिनी महिला डाकूओ की चर्चा सुनी

वह भी दस्यु सुंदरी के सम्मन के साथ .

क्या महिलाओं में साहस -मर्दानगी की कमी हैं ?

भोली हैं? जो इस फ़ील्ड को पसंद नहीं किया ?

या शातिर हैं ? इसलिए बच निकलती हैं?

या यहाँ भी पुरुष वर्चस्व हैं?ऐसा क्यों हैं?

सोचिए ज़रा……

ज़िंदगी के रंग – 84

आज किसी ने कहा –ज़िंदगी तब बेहतर होती हैं,

जब हम ख़ुश होते हैं.

लेकिन तब बेहतरीन हो जाती हैं,

जब हमारी वजह से सब ख़ुश हो जाते हैं.

पर सच तो यह हैं कि एक साथ

सभी को ख़ुश नहीं किया जा सकता .

ऐसा क्यों हैं – 1? अकेले ??

कभी कभी अपने साथ अकेले छुट्टियाँ बिताना , समय गुज़ारना, अपने आप से बातें करना अच्छा लगता है.

पर एक प्रश्न सभी की ज़बान पर होती है -आप अकेली आईं हैं? बिलकुल अकेली ? अच्छा ! मन कैसे

लगता हैं आपका ?

वामा .., नारी क्या अकेले नहीं होनी चाहिए ?हमने भी पूछ लिया – आपके साथ कौन है?

अकेले ? बिना पत्नी …. बिना बच्चों के ?पर किसी को इसकी चिंता नहीं . यह प्रश्नक्यों सभी की नज़रों में

होता हैं अकेली नारी के लिए ? पर क्यों पुरुषों के लिए नहीं ? शायद असुरक्षित समाज की दुहाई देंगे लोग .

पर असुरक्षा भी तो वही देते हैं.

रिमझिम

अंधेरी रात , बिजली गुल ,

मोमबत्ती की रौशनी ,गरजते बादल ,

रिमझिम वर्षा की बूँदे ले जाती हैं ,

यादों के साये में.

क्या सिर्फ़ मुझे या किसी और को भी ?

जो दुनिया की भीड़ में खो चुका हैं……,

 

सुनहरी स्मृतियाँ

सुनहरी स्मृतियाँ जीवन से बंधी

हाथ पकड़ साथ साथ चलती है .

खिलते फूलो , महकती ख़ुश्बू सी .

कभी ना जाने कहाँ से अचानक

फुहारों सी बरस जाती हैं और

आँखों को बरसा जातीं हैं.

कभी पतझड़ के सूखी पतियों सी

झड़ने को तत्पर हो खो जाती हैं.

लम्हा लम्हा ख़यालों में…..

दिन निकल गया , रात ढल गई

पर बातें अधूरी रह गईं.

यादें …स्मृतियाँ ….. अधूरी रह गईं.