हम किसी का हिस्सा बन गए ,
पर सामने वाले ने
जाना हीं नहीं ….
माना हीं नहीं ….
सवालों भरी इस
राह पर
गर ये कहे कि,
मेरे सवालों का
जवाब तुम हो .
तो भी क्या फ़ायदा ?

हम किसी का हिस्सा बन गए ,
पर सामने वाले ने
जाना हीं नहीं ….
माना हीं नहीं ….
सवालों भरी इस
राह पर
गर ये कहे कि,
मेरे सवालों का
जवाब तुम हो .
तो भी क्या फ़ायदा ?

कभी कभी ज़िंदगी
से थकान होने लगती है .
चाहो कुछ
होता कुछ और है
ज़िंदगी ना जाने किस मुक़ाम पर
क्या रंग दिखाएगी ?
कब हँसाएगी कब रुलाएगी ?

बातों और अनदेखी करनेवाली निगाहों
से भी चोटे लगती है .
दर्द तो ठीक भी हो जाते है ,
पर रह जाती है टीसे और निशान
याद दिलाने के लिए .
पूरी ज़िंदगी लग जाती है
कभी ना मिटने वाले, ऐसे निशान,
मिटाने के लिए .

कुछ अपने हैं,
इसलिये चुप हैं.
कुछ चुप हैं,
इसलिये अपने हैं.

Unknown
उठो द्रौपदी वस्त्र संम्भालो
अब गोविन्द न आयेंगे।
कब तक आस लगाओगी तुम
बिके.. हुए अखबारों से।
कैसी रक्षा मांग रही हो
दु:शासन…. दरबारों से।
स्वंय… जो लज्जाहीन पड़े हैं
वे क्या लाज बचायेंगे।
उठो द्रौपदी वस्त्र संम्भालो
अब गोविन्द न आयेंगे।Il१॥
कल तक केवल अंधा राजा
अब गूंगा बहरा भी है।
होंठ सिल दिये हैं जनता के
कानों पर पहरा भी है।
तुम्ही कहो ये अश्रु तुम्हारे
किसको क्या समझायेंगे।
उठो द्रौपदी वस्त्र संम्भालो
अब गोविन्द न आयेंगे।ll२॥
छोड़ो मेंहदी भुजा संम्भालो
खुद ही अपना चीर बचा लो।
द्यूत बिछाये बैठे शकुनि
मस्तक सब बिक जायेंगे।
उठो द्रौपदी वस्त्र संम्भालो
अब गोविद न आयेंगे। Il३॥
– अटलबिहारी वाजपेयी

एक टुकड़ा ज़िंदगी का
बानगी है पूरे जीवन के
जद्दोजहद का .
उठते – गिरते, हँसते-रोते
कभी पूरी , कभी स्लाइसों
में कटी ज़िंदगी
जीते हुए कट हीं जाती है .
इसलिए मन की बातें
और अरमानों के
पल भी जी लेने चाहिये.
ताकि अफ़सोस ना रहे
अधूरे हसरतों ….तमन्नाओं …. की.

ज़िंदगी के दो छोरों
को बाँधने की कोशिश
ना करना.
हमने इस कोशिश में
जाया किया है
सुनहरे पलों को.
और हाथ आया सिफ़र .
यह तो वह बहाव है .
जो अपना रास्ता
ख़ुद ही ढूँढ लेती है .

तमन्ना हमसे अक्सर पूछती है-
“मैं कब पूरी होऊंगी..?
हम भी हँस कर जवाब दे देते हैं,
जो पूरी हो जाये ..
वो तमन्ना ही क्या..??

Unknown
कई बार दिल वह देख लेता हैं
जो आँखें नहीं देख पातीं .
प्यार के एहसास का जादू
कभी ना कभी सभी के दिलो
को छू जाता है.
भले हीं इस प्यार का रंग
सब की नज़र में अलग- अलग हो .
इस भीड़ भरी दुनिया में,
उलझनों , परेशानियों , ख़ुशी-ग़म
रोशनी-अंधेरे में अक्सर
प्यार की रौशनी हीं राह सुझातीं हैं …..

धीरे धीरे , आहिस्ता – आहिस्ता
सारे पल बीत गये,
समय को पकड़ने की
कोशिश मेंरह गईं रिक्त मुट्ठी …..
और कुछ ख़्वाब, यादें और ख़्याल .
विवश कुमहलाया चेहरा
और आश्रु भरे नयन ……

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