ताजमहल

कभी चाहा नहीं ताजमहल ,

हम तो एक अधखिले

लाल गुलाब से हीं ख़ुश थे ,

मिली तन्हाईया ….,

जो अकेलापन कभी खटकता था ,

वही अब शीतल सुहावनी लगती है .

और यह अंधेरे में उजाला ,

दर्द में दुआ ,

खोजना सीखाने लगा है .

जब रोते देखो When you see me crying..

बहते अश्रुओं ने सिखाया ,

जो बातें ज़्यादा दर्द देतीं हैं,

वही अनमोल सीखें भी देतीं हैं.

वक़्त बदला

जो न देते थे जवाब ,

उनके सलाम आने लगे…

वक़्त बदला तो,

मेरे नीम पे आम आने लगे…

Anonymous

हाईकु

पत्थर पर गिरती वर्षा की

सूखे पत्तों की सरसराहट

बूँदो का संगीत

Kerala: God’s own country, ईश का देश !

शिव ने कहा –

मैंने तो बस अपने देश

को धो कर वैसा हीं बनाना चाहा

जैसा तुम्हें दिया था .

क्यों तुम ने इसे अपने मन का बना लिया ?

शोर मचा रहे हो ..,.

श्रावण मेरा धरती पर आने

जल वर्षा करवाने का मौसम है .

क्यों रोते हो ?

तुम्हारे अतिक्रमण को देख

मैं तो नृत्य ….तांडव ….कर रहा हूँ

और ख़ुद हीं आँसू बहा रहा हूँ .

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया

(ब्लॉगर पवन के सौजन्य से सभी के लिये शुभकामनाएँ)

Meaning

अतिक्रमण – Encroachment

ज़िंदगी के रंग- 92

दिल के कुछ ऐसे

गहरे, अनदेखे..धुँध भरे

कोने भी हैं,

जहाँ ढेरों यादें

ढेरों बातें

बसे है …..

कहीं गहरे अँधेरा में .

क्योंकि वहाँ

सूरज हीं नहीं चमकता .

ज़िंदगी के रंग-91

हम किसी का हिस्सा बन गए ,

पर सामने वाले ने

जाना हीं नहीं ….

माना हीं नहीं ….

सवालों भरी इस

राह पर

गर ये कहे कि,

मेरे सवालों का

जवाब तुम हो .

तो भी क्या फ़ायदा ?

थकान

कभी कभी ज़िंदगी

से थकान होने लगती है .

चाहो कुछ

होता कुछ और है

ज़िंदगी ना जाने किस मुक़ाम पर

क्या रंग दिखाएगी ?

कब हँसाएगी कब रुलाएगी ?

ज़िंदगी के रंग -90

बातों और अनदेखी करनेवाली निगाहों

से भी चोटे लगती है .

दर्द तो ठीक भी हो जाते है ,

पर रह जाती है टीसे और निशान

याद दिलाने के लिए .

पूरी ज़िंदगी लग जाती है

कभी ना मिटने वाले, ऐसे निशान,

मिटाने के लिए .

अपने

कुछ अपने हैं,

इसलिये चुप हैं.

कुछ चुप हैं,

इसलिये अपने हैं.

Unknown