कभी चाहा नहीं ताजमहल ,
हम तो एक अधखिले
लाल गुलाब से हीं ख़ुश थे ,
मिली तन्हाईया ….,
जो अकेलापन कभी खटकता था ,
वही अब शीतल सुहावनी लगती है .
और यह अंधेरे में उजाला ,
दर्द में दुआ ,
खोजना सीखाने लगा है .

William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
कभी चाहा नहीं ताजमहल ,
हम तो एक अधखिले
लाल गुलाब से हीं ख़ुश थे ,
मिली तन्हाईया ….,
जो अकेलापन कभी खटकता था ,
वही अब शीतल सुहावनी लगती है .
और यह अंधेरे में उजाला ,
दर्द में दुआ ,
खोजना सीखाने लगा है .

बहते अश्रुओं ने सिखाया ,
जो बातें ज़्यादा दर्द देतीं हैं,
वही अनमोल सीखें भी देतीं हैं.

जो न देते थे जवाब ,
उनके सलाम आने लगे…
वक़्त बदला तो,
मेरे नीम पे आम आने लगे…

Anonymous
पत्थर पर गिरती वर्षा की
सूखे पत्तों की सरसराहट
बूँदो का संगीत

शिव ने कहा –
मैंने तो बस अपने देश
को धो कर वैसा हीं बनाना चाहा
जैसा तुम्हें दिया था .
क्यों तुम ने इसे अपने मन का बना लिया ?
शोर मचा रहे हो ..,.
श्रावण मेरा धरती पर आने
जल वर्षा करवाने का मौसम है .
क्यों रोते हो ?
तुम्हारे अतिक्रमण को देख
मैं तो नृत्य ….तांडव ….कर रहा हूँ
और ख़ुद हीं आँसू बहा रहा हूँ .

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया
(ब्लॉगर पवन के सौजन्य से सभी के लिये शुभकामनाएँ)
Meaning
अतिक्रमण – Encroachment
दिल के कुछ ऐसे
गहरे, अनदेखे..धुँध भरे
कोने भी हैं,
जहाँ ढेरों यादें
ढेरों बातें
बसे है …..
कहीं गहरे अँधेरा में .
क्योंकि वहाँ
सूरज हीं नहीं चमकता .

हम किसी का हिस्सा बन गए ,
पर सामने वाले ने
जाना हीं नहीं ….
माना हीं नहीं ….
सवालों भरी इस
राह पर
गर ये कहे कि,
मेरे सवालों का
जवाब तुम हो .
तो भी क्या फ़ायदा ?

कभी कभी ज़िंदगी
से थकान होने लगती है .
चाहो कुछ
होता कुछ और है
ज़िंदगी ना जाने किस मुक़ाम पर
क्या रंग दिखाएगी ?
कब हँसाएगी कब रुलाएगी ?

बातों और अनदेखी करनेवाली निगाहों
से भी चोटे लगती है .
दर्द तो ठीक भी हो जाते है ,
पर रह जाती है टीसे और निशान
याद दिलाने के लिए .
पूरी ज़िंदगी लग जाती है
कभी ना मिटने वाले, ऐसे निशान,
मिटाने के लिए .

कुछ अपने हैं,
इसलिये चुप हैं.
कुछ चुप हैं,
इसलिये अपने हैं.

Unknown
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