बड़ी देर कर दी

हमने खोजा ,

बड़ी आवाज़ें दीं.

हर सदा गूँज बन कर

वापस आ गई .

तुमने आने में बड़ी देर कर दी .

यह ज़िंदगी अपनी हीं नहीं रही.

तुम्हें कहाँ शामिल करे ?

बूँदे

क्यों ये बूँदे टूट टूट कर

जमीं की आग़ोश में समातीं हैं?

कौन हैं आज जो ऊँचाइयों

से नीचे आता हैं?

क्या खिंचता हैं इन्हें ?

क्यों ये आकाश का साथ छोड़

बिखर जातीं हैं धरा के दामन में…..

Picture Courtsey: Zatoichi.

#BlogforKerala: God’s own country, देव तुम्हारी भूमि

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क्यों यह विध्वंस हुआ देव तुम्हारी भूमि पर ?

हाँ , हम रचनाकर्ता, पालन कर्ता और संहारकर्ता हैं,

पर हम तुम्हें यह आशीर्वाद भी देते हैं-

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया !!

यह तांडव … विध्वंस…..तुम्हारी भूलों,

अतिक्रमन और प्रकृति को

बंधन में बाँधने की कोशिश

का यह परिणाम है .

इसलिए उठो प्रायश्चित करो ,

आरोप-प्रत्यारोप छोड़ो .

अपनी भूल सुधारो

जो भी सामर्थ्य हो तुम्हारी ,

धन , मन , तन से आगे बढ़ो

ना हो सके कुछ तो

प्रार्थनाओं और कामनाओं से

सहारा बनो .

मानव हो मानवता दिखलाओ .

बिना भेद भाव , राग द्वेष के …..,

Image courtesy: Chandni Sahay.

Meaning

अतिक्रमण – Encroachment

Thanks IndiBlog for the honour and invitation to write a blog on this topic —

Help Rehabilitate Kerala

#BlogForKerala

ज़िंदगी के रंग – 91

ज़िंदगी जीते जीते

ख़्याल आया ,

रो-रो कर वर्षों की …..

ज़िंदगी से अच्छा है.

एक लम्हा जी लो

ज़िंदगी ख़ुशी के ,

ताजमहल

कभी चाहा नहीं ताजमहल ,

हम तो एक अधखिले

लाल गुलाब से हीं ख़ुश थे ,

मिली तन्हाईया ….,

जो अकेलापन कभी खटकता था ,

वही अब शीतल सुहावनी लगती है .

और यह अंधेरे में उजाला ,

दर्द में दुआ ,

खोजना सीखाने लगा है .

जब रोते देखो When you see me crying..

बहते अश्रुओं ने सिखाया ,

जो बातें ज़्यादा दर्द देतीं हैं,

वही अनमोल सीखें भी देतीं हैं.

वक़्त बदला

जो न देते थे जवाब ,

उनके सलाम आने लगे…

वक़्त बदला तो,

मेरे नीम पे आम आने लगे…

Anonymous

हाईकु

पत्थर पर गिरती वर्षा की

सूखे पत्तों की सरसराहट

बूँदो का संगीत

Kerala: God’s own country, ईश का देश !

शिव ने कहा –

मैंने तो बस अपने देश

को धो कर वैसा हीं बनाना चाहा

जैसा तुम्हें दिया था .

क्यों तुम ने इसे अपने मन का बना लिया ?

शोर मचा रहे हो ..,.

श्रावण मेरा धरती पर आने

जल वर्षा करवाने का मौसम है .

क्यों रोते हो ?

तुम्हारे अतिक्रमण को देख

मैं तो नृत्य ….तांडव ….कर रहा हूँ

और ख़ुद हीं आँसू बहा रहा हूँ .

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया

(ब्लॉगर पवन के सौजन्य से सभी के लिये शुभकामनाएँ)

Meaning

अतिक्रमण – Encroachment

ज़िंदगी के रंग- 92

दिल के कुछ ऐसे

गहरे, अनदेखे..धुँध भरे

कोने भी हैं,

जहाँ ढेरों यादें

ढेरों बातें

बसे है …..

कहीं गहरे अँधेरा में .

क्योंकि वहाँ

सूरज हीं नहीं चमकता .