किंत्सुगी – स्वर्णमृतिका

टूटे कई बार, जुटे कई बार।

अपने को जोड़ लिया हर बार,

लगा पिघलते तपते स्वर्ण तार।

अब फ़र्क़ नहीं पड़ता हो जायें तार-तार,

ग़र बार-बार, कई बार।

गले, तपे स्वर्ण से जुड़ते जाएँगे हर बार।

किंत्सुगी बन जाएँगे बिन माने हार।

सीख लिया है निराशा के टुकड़ों

को जोड़कर आशा की सुनहरी लकीरें खींचना।

जापान की किंत्सुगी कला – किंत्सुगी टूटे हुए बर्तनों को जोड़ने की जापानी कला है। टूट टुकड़ों और दरारों को पिघले सोने और सुनहरे रंग से जोड़ और खूबसूरती से सजा दिया जाता है।

Kintsugi (“golden joinery”), also known as Kintsukuroi (“golden repair”), is the Japanese art of repairing broken pottery by mending the areas of breakage with lacquer dusted or mixed with powdered gold, silver, or platinum, a method similar to the maki-e technique.

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