रिश्तों की ख़ुशबू

कुछ लड़ाई-झगड़े

मोहब्बत भरें होतें है।

ग़र नाराज़गी में मीठास,

ग़ुस्से में प्यार,

लहजे में अपनापा हो।

तो रिश्तों की ख़ुशबू

फैलती रहती है।

12 thoughts on “रिश्तों की ख़ुशबू

  1. ‘लीडर’ (1964) में मोहम्मद रफ़ी साहब का गाया हुआ मशहूर नग़मा याद दिला दिया रेखा जी आपने:

    हमीं से मोहब्बत, हमीं से लड़ाई
    अरे मार डाला, दुहाई दुहाई

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