चेहरा जाना पहचान !

गिनती नहीं

ज़िंदगी में चोटे दीं

कितनों ने कितनी बार।

पर दर्द तब ज्यादा हुआ,

जब चोटे देने वाला

 चेहरा जाना पहचान निकला।

9 thoughts on “चेहरा जाना पहचान !

  1. दर्द तब हुआ जब ,
    अपना ही बेगाना निकला ।
    अक्सर ऐसा ही होता है कि अपने ही दुख देते हैं ।
    बेहद खूबसूरत पंक्तियां 👌👌

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