क़ैद – पृथ्वी दिवस पर

अफ़सोस क्यों, अगर आज क़ैद में है ज़िंदगी?

जब आज़ाद थे तब तो विचारा नहीं.

अब तो सोंचने-विचारने का समय मिल गया है.

अगर जीवन चाहिये,

तब धरा और प्रकृति का सम्मान करना होगा.

हमें इसकी ज़रूरत है.

यह तो हमारे बिना भी पूर्ण है.

4 thoughts on “क़ैद – पृथ्वी दिवस पर

  1. अफ़सोस क्यों, अगर आज क़ैद में है ज़िंदगी?

    जब आज़ाद थे तब तो विचारा नहीं.

    बिल्कुल सही कहा। प्रकृति की मेज सीमित जब समझ ना सके तो पछताना क्या।

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