
हम मानव भी कितने विचित्र है?
जिससे बिना शर्त सब कुछ पाते हैं,
उसका भी सम्मन नहीं करते .
धारती, पहाड़ , अंतरिक्ष . सागर
सभी को दूषित और गंदा कर दिया है.

हम मानव भी कितने विचित्र है?
जिससे बिना शर्त सब कुछ पाते हैं,
उसका भी सम्मन नहीं करते .
धारती, पहाड़ , अंतरिक्ष . सागर
सभी को दूषित और गंदा कर दिया है.
इंसान से ज़्यादा ख़ुदगर्ज़ जानवर इस दुनिया में कोई नहीं रेखा जी । अपने तुच्छ और क्षणिक स्वार्थ के लिए वह सब कुछ नष्ट कर देने से भी पीछे नहीं हटता । उसे न इस धरती से कोई सरोकार है और न ही इस पर बसने वाले अन्य प्राणियों से ।
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स्थिति तो बिलकुल वही है और अफ़सोस की बात है कि अभी भी लोगों की सोंच में विशेष अंतर नहीं है.
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