जब जब हम किसी बंद दरवाजे के पीछे अटक जाते हैं।
आंखों के आगे पड़े परदे के पीछे भटक जाते हैं।
तब तब क्षितिज के पार से कोई तो हमें राह दिखाता है……

जब जब हम किसी बंद दरवाजे के पीछे अटक जाते हैं।
आंखों के आगे पड़े परदे के पीछे भटक जाते हैं।
तब तब क्षितिज के पार से कोई तो हमें राह दिखाता है……
