कैक्टस से लोग – व्यंग

किसी का नाम लेते ख्याल आता हैं …….

हर बात में अगर-मगर, कमी निकाल ही देनेवाले

कितना भी बच कर निकलो, खरोंचे आएँगी हीं.

ये लोग दूर से ही भले होते हैं.

जैसे कुछ फूलो के बीच में चुभन सी रहती हैं.

काँटें , नागफनी थूहर कुछ कैक्टस से लोग .

हरा भरा , पर कुछ चुभने सा ,

लोग इन्हें सज़ा कर रखते भी हैं.

अगर दूसरों के बाग़ों या गमलो में हों तब ,

हमें भी अच्छे लगते हैं, दूर से, सिर्फ़ दूर से .

22 thoughts on “कैक्टस से लोग – व्यंग

    1. 😊😊 सही है.
      इसी भीड़ में रहना है, ऐसे हीं लोगों के बीच. बस, ग़ुबार पन्नों पर उतार देना है.

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    1. आभार.
      लिखना मेरी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. पहले हर लिखी बात post नहीं करती थी.

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    1. 😊 मेरे ख्याल से कुछ भी लिखना आसान है. बस शालीनता की सीमा में होनी चाहिए . हाँ कुछ इसे नापसंद कर सकते है.

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