इस जीवन यात्रा में…..
एक बात तो बङे अच्छे से समझ आ गई,
अपनी लङाई खुद ही लङनी होती है।
इसमें
शायद ही कोई साथ देता है,
क्योंकि
लोग अपनी लङाईयों अौर उलझनों में उलझने होते हैं।
इस जीवन यात्रा में…..
एक बात तो बङे अच्छे से समझ आ गई,
अपनी लङाई खुद ही लङनी होती है।
इसमें
शायद ही कोई साथ देता है,
क्योंकि
लोग अपनी लङाईयों अौर उलझनों में उलझने होते हैं।
Jivan ki ulzhano ko suljhana hi jivan mantra hai 😊
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bilkul sahi aur unme uljhne ke badle unhe suljhana 🙂
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Yes 😊
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thanks.:-)
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Bilkul sahi bat kahi apne
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आभार मैथिली। 🙂
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😊
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सच है, हर एक को अपनी उलझने होती है, तो अपनी लडाईयाँ खुद ही लडनी है………
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हाँ , मुझे लगा शक्ति उपासना / विजयदशमी के दिन यह कविता ठीक होगी .
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हाँ , मुझे लगा शक्ति उपासना / विजयदशमी के दिन यह कविता ठीक होगी .
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बहुत खूब
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आभार .
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क्योंकि लोग अपनी लङाईयों अौर उलझनों में उलझने होते हैं। बहुत सुन्द्दर लिखा है
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बहुत धन्यवाद !!
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