तुलना

Accept your dear ones , as they are !!!!

आज कहीं कुछ पढ़ते हुए,

बरसों पुरानी अपनी ही बोली कुछ पंक्तियां याद आ गई  –

मेरी तुलना ना करो कोई…….

जैसी  हूँ बस मैं ऐसी ही हूँ !!!!!

मुझे  कविता से कहानी बनाने 

या 

 सुबह के सूरज के बदले, दिन का दमकता सूरज बनने ना कहो।

जैसी हूं वैसे ही रहने दो।

 इतने सालों बाद अपनी ही बातों 

        की गहराई अब समझ आती है …..

35 thoughts on “तुलना

    1. जी , मुझे भी लगता है – कोई भी दो लोग एक जैसे नहीँ होते . इस मनोविज्ञान में unique personality कहते है . फ़िर जबरदस्ती किसी को किसी और जैसा बनाने की कोशिश क्यों ?
      बहुत धन्यवाद आश्विन जी .

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      1. भगवान ने हम में विविधता बनाई है, उसका सम्मान करना चाहिये अौर जो जैसे हैं वैसे ही उन्हें स्वीकार करना चाहिये। 🙂

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      2. हाथी को चूहा और चूहे को हाथी नहीं बनाया जा सकता।माना कि हाथी बलवान है परंतु जाल में फंसे हाथी को चूहा ही निकाल सकता है।सबकि अपनी अपनी उपयोगिता है,अपना अपना महत्व अतः—
        हम जैसे हैं अच्छे हैं वैसा ही रहने देते,

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      3. बहुत लाजवाब बात कही आपने। सही उदाहरण !!!!
        Self concept, वजूद, अस्तित्व अपनी जगह अनमोल हैं।

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  1. तुलना करके खुद को भूलना
    अधर मे खड़ा करता है…
    व्यक्ति का वास्तविक स्वभाव ही
    उसकी पहचान होती है…
    बनावटीपन तो किसी न किसी कोने से
    झाँकता है…
    वास्तविकता छुपाने पर बड़ी जोर
    से खाँसता है…
    बातों मे आपकी सच मे गहराई है…
    क्योंकि तुलना न करने की बात
    आपने उठाई है…

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    1. बिलकुल सही ! आपने मेरे दिल की बात सुंदर काव्यमय शब्दों में व्यक्त कर दिया है। आपका हार्दिक अभिनन्दन।

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  2. Beautiful 🙂
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