प्लास्टिक धन -कविता #Demonetization

Indian Bloggers

8 बजे तक के धन, 8:15 में बेकार कागज बन गये।

पर काले धन खत्म होने की बातों ने,

देशभक्ति की भावना भर दी।

      कुछ बचाये -छुपाये छुट्टे पैसे ले

बाजार गई।

बङी सस्ती सब्जियाँ अौर रोते किसान मिले।

मातम करती कामवालियों अौर

गोलगप्पे की जिद करती बिटिया से

नजरें बचाती, खाली एटीम अौर पर्स  देख

प्लास्टिक धन ले माॅल पहुचीँ।

उन्हीं सब्जियों को 5-10 गुणा मंहगा पाया।

क्यों नहीं देखते –

हमारा पैसा कहाँ है जाता?

कुछ समझ नहीं आता,

जो हो रहा है कितना सही या गलत है,

कोर्ट अौर नेताअों की सौ बातें सुन,

कुछ समझ नहीं आता।

 

 

शब्दार्थ –

प्लास्टिक धन- Plastic Money

 

Indispire -144

स्वंयसिद्ध -कविता

क्या भविष्य को संजोने की लालसा

हमारी व्याकुलता अोर चिंता को बढ़ाती है?

नहीं, भविष्य के सपने सजाना

तो मनुष्य होने की

पहचान है।

यह व्यग्रता, उद्वेग तो

स्वंयसिद्ध , सर्वशक्तिमान   बन

भविष्य को नियंत्रित करने की कोशिश का परिणाम है…….

रावण है, इसलिये राम याद आतें हैं (कविता) #RavanVadhh


Indian Bloggers

woman

सदियाँ अौर युग बीते,

रावण कभी नहीं मरा,

उसने अत्याचार किया, पर परस्त्री को स्पर्श नहीं।

आज के रावण तो नारी अस्मिता के भक्षक हैं।

नहीं लगाते दहेज पर विराम।

पर काली -दुर्गा कहलानेवाली के गर्भयात्रा को हीं रोक देतें हैं……….

क्यों नारी नापी जाती है मात्र रुप-रंग से,

क्यों नहीं योग्यता बौद्धिकता से?

क्यों नहीं यह माप-दंङ पुरुषों पर लागु है?

सुंदरता तो हमारे नयनों में होती है।

यह सब सौंदर्य बोध अौर नियम तो हमने बना लिया है………….

सदियाँ अौर युग बीते,

रावण कभी नहीं मरा,

रावण है, इसलिये राम याद आतें हैं।

images from internet, with thanks.

आज़ाद परिंदे (कविता )

peacock-flying-bird-wallpaper-6

बनाने वाले ने सब को

आज़ाद बनाया.

बाँध लिया हमने अपने को

रिश्ते नाते,  अपने-पराये, धर्म देश  की  सीमा …..

जैसे  बंधनों  में.

हमसे तो अच्छे

ये आज़ाद परिंदे हैं.

अपनी जङें मजबूत करें – बांस की तरह (प्रेरक लेख / motivational thought )

जङ

बांस एक तरह का घास है। चीनी बांस के पेड़  छह सप्ताह में  80 फुट लम्बे हो जाते है। यह बङी हैरानी की बात है। पर सच्चाई यह है कि इसे लगाने के चार वर्ष  बाद तक  इस में  विकास के कोई चिन्ह नहीं दिखते।  पर इसे  पानी अौर पोषण उपलब्ध कराया जाता है।  चार वर्ष के बाद   पांचवें वर्ष में  एक चमत्कार की तरह  बांस के पेड़ सिर्फ छह सप्ताह में 80 फुट बढ़ जाते हैं।

यह चमत्कार नहीं है। इतने समय यह निष्क्रिय नहीं रहता।  चार वर्षौं के दौरान बांस  अपने अस्सी फुट ऊँचाई को संभालने के लिये अपनी जङों को बनाता अौर मजबूत करता रहता है।  वर्ना यह अचानक  अपनी 80 फुट लम्बी काया को संभाल नहीं सकेगा।

हम भी थोङे मेहनत के बाद हीं सफलता की कामना करने लगते हैं। जब कि जड़ें मजबूत बनने के लिये  धैर्य  अौर परिश्रम की जरुरत होती है। प्रतिकूल परिस्थितियों और चुनौती का सामना करने की शक्ति अौर सफलता  संभालने के लिए मजबूत नींव बनने में समय लगता है। इस लिये असफलता से ङरने के बदले इसे जङों या आधार अौर नींव का निर्माण काल मानना चाहिये। जब एक घास में इतना सामर्थ है तब हम तो ईश्वार की सर्वौत्तम रचना हैं।

 

I am waiting for your valuable comments and feedbacks. I love  them.

 

 

 

 

images from internet.