जला हुआ जंगल छुप कर रोता रहा तन्हाई में,
लकड़ी उसी की थी उस दियासलाई में।
Source: जला हुआ जंगल छुप कर रोता रहा…..
Source: जला हुआ जंगल छुप कर रोता रहा…..
You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.
Swami Vivekananda
जीवन की परिपूर्णता —-
अगर यह लौकिक हो – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,
या संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।
तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।
क्या खोजता है यह ?
क्या खींचती है इसे अपनी अोर?
यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?
शायद अपने आप को ढूँढ़ने
मैं कौन हूँ??
या
Image from internet.
सप्तपर्णी / एल्स्टोनिया स्कोलरिस – Apocynaceae / Alstonia scholaris
‘यक्षिणी वृक्ष’ कहलाने वाला सप्तपर्णी वृक्ष के नीचे कविन्द्र रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘गीतांजलि’ के कुछ अंश लिखे थे। शांति निकेतन में दीक्षांत समारोह में छात्रों को सप्तपर्णी के गुच्छे देने का प्रचलन हैं। थरवडा बौद्ध धर्म में भी इस वृक्ष की पत्तियों के इस्तेमाल की बात है। ये फूल मंदिरों और पूजा में भी काम आता है , हालाकि इसके पराग से कुछ लोगों को एलर्जी भी होती है।आयुर्वेद व आदिवासी लोग प्राकृतिक उपचार में इस पेड़ की छाल, पत्तियों आदि को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाते हैं।
बिन बुलाये घुस आई रातों में अपनी खुशबू लिये ,
यक्षिणी वृक्ष के फूलों की मादक सम्मोहक सुगंध।
अौर
कस्तूरी मृग की तरह, खुशबू की खोज खींच लाई,
चक्राकार सात पत्तियो के बीच खिले
सप्तपर्णी के सदाबहार फूलों के पास।
जिसकी सुरभी शामिल है,
रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘गीतांजलि’ में भी ।

Images from internet.
Wherever you are, and in whatever circumstances, strive to love and to be a lover.
~ Rumi
जीवन रुकता नहीँ
हर पल , हर क्षण नया है
दरिया के बहते पानी की तरह.
जो बह गया वह बीत गया.
वह पानी लौट कर आता नहीँ.
यह जीवन चक्र चलता रहता है.
हर पल कुछ नया ले कर आता है.
image from internet.
जिंदगी से एक गहरी सबक मिली।
किसी को परेशानियों में,
सलाह जरुर देनी चाहिये।
पर बिन माँगे मदद के लिये,
हाथ भी बढ़ाना देना चाहिये।
इसमें खतरा तो हैं,
पर
ना जाने कौन किस लम्हें में,
किस दौर से गुज़र रहा है?
जाने-अनजाने हीं किसी की दुआ मिल जाये।
Take Risks in Your Life If you Win, U Can Lead! If You Lose, You can Guide!
Swami Vivekanandalife
image from internet.
एक आदत सी थी,
बेफिक्री से गुनगुनाने और मुस्कुराने की।
सुनहरी सुबह और रुपहली शाम की ,
खूबसूरती में ङूब जाने की।
पर ज़माने ने इसमें भी कमियां निकाल दी।
तब ख्याल आया,
अब तो
खूबियों के सिवा कुछ बचा हीं नहीं ।
हाथ जुङ गये इबादत में।
When the world pushes you to your knees, you’re in the perfect position to pray.
~ Rumi
जिंदगी की ख्वाहिशों में,
ना जाने कितने काश ,
शामिल हैं।
कुछ पूरे, कुछ अधुरे , कुछ खास …….
रुई से सफेद, बादलों से हलके काश के फूलों की तरह।
कुछ हवा के झोंकों में उङ गये।
कुछ आज भी पूरे होने के जिद में,
अटके हैं !!!!
काश / काँस के फूल – मुझे कास के सफेद फूल’ हमेश से नाजुक अौर सुंदर लगते हैं। दशहरा या शारदीय नवरात्र के आसपास ये जंगली फूल ताल, तलैया, खेतों के आसपास अौर जहाँ-तहाँ दिखतें हैं। काँस को देवी दुर्गा का स्वागत करता हुआ सुमन कहा जाता है । एक बार बङे शौक से इन फूलों को ला कर रखा। लेकिन जल्दी हीं ये हवा के झोंके के साथ पूरे घर में बिखर गये। ( Saccharum spontaneum / wild sugarcane / Kans grass)

लिखती तो मैं पहले भी थी।
कभी कुछ छप जाता था,
तब खुश हो लेती थी।
कभी लिखे पन्ने रखे-रखे पीले पड़
समय की भीड़ में कहीं खो जाते थे।
धन्यवाद ब्लॉग की दुनिया,
मन की बातें लिखने के लिए…………
इतना बड़ा आसमान और इतनी बड़ी ज़मीन दे दी है ।
ढेरो जाने-अनजाने पाठक और आलोचक,
सबको धन्यवाद।
अब मन की हर बात, हर विचार को,
जब चाहो लिख डालो।
मन में भरे ख़ज़ाने और उमड़ते-घुमड़ते विचारों को
पन्ने पर उतारने की पूरी छूटहै।
लिखती तो मैं पहले भी थी, पर अब लिखने में मज़ा आने लगा है।
Source: लिखती तो मैं पहले भी थी (कविता )
Editorial of The Indian Express April 26, 2017
It is one of actor Nawazuddin Siddiqui’s shortest, simplest and strongest performances. Appearing in a video just over one minute in length, the actor holds up a series of placards; these read, in succession: “I got a DNA test done. The result showed I was 16.66 per cent Hindu, 16.66 per cent Muslim…”, covering Sikhism, Christianity, Buddhism and world religions too. With each placard, Siddiqui wears stereotypical “markers” — a Hindu caste daub, a Muslim sherwani-topi, a Sikh turban, Buddhist robes. At the end, a placard concludes: “When I discovered my soul, I found that I am a 100 per cent artist”. Saying no lines, Nawazuddin’s video says a lot, for it speaks against power at several levels.
News courtesy The Indian Express, image from internet.
The Times of India, The Economics Time zee news Apr 24, 2017, India
No coordination between blood banks and hospitals, 6 lakh litres of blood wasted in five years.
New Delhi: Indicating that there is serious gaps in the country’s blood banking system, over 28 lakh units of blood and its components were wasted in five years by banks across India, as per a report.
India, with its population of 1.2 billion people, requires 12 million units of blood annually, however, only nine million units are collected every year. The country faces a blood shortage of three million units. It is said that NCR alone faces a shortage of 1,00,000 units per year.
खून की कमी से,
लोग मर जाते हैं,
कितने इसे खरीद नहीं पाते,
और हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं,
पर बड़ी-बड़ी बातों का मूल क्या है ?
हमें संभालना तक नहीं आता है
किसी ने कहा, इन खबरों को
दिल पर ना ले।
यह नासमझी की हमारी,
परंपरा पुरानी है।
जीवन अौर मौत के बीच झुलते लोगों से पूछो,
इसका मोल क्या है?
Image courtesy Internet.
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