बलिदान दिवस, शहीद दिवस, 23 March

शक्ति मद नींद में डूबे अंग्रेज सरकार को,

जगाने की कोशिश में फेंका संदेशमय पर्चे के साथ बम –

“मानव को मारा जा सकता है, उसके विचार को नहीं।

बड़े से बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है

लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं।”

सुप्त, बधिर, क्रूर आंग्ल शासकों को जगाने की कोशिश में

23 मार्च, क्रांतिकारी वीर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव

सो गए चिर निंद्रा, देश की आज़ादी के लिए।

दुनिया

दुनिया है बड़ी अजीब।

तोड़ते हैं लोग दिल और वादे।

पकड़ते हैं बातों को।

तोड़ते-मरोडते हैं बात बनाने के लिए बातों को।

फिर भी चाहतें हैं,

लोग उनकी बातों पर यक़ीन करें।

उनके हाथों तोड़े अपने दिल में उन्हें जगह दें।

Psychological Fact – The manipulator deliberately creates an imbalance of power and exploits the victim to serve his or her agenda.

Symptoms of manipulators – lying. Excuse-making. Being two-faced. Blaming the victim for causing their own victimization. Deformation of the truth.

कभी कह दिया होता

कभी कह दिया होता तो अच्छा था कि

जिन सवालों के जवाब मालूम हैं

और जवाब पसंद नहीं।

उन सवालों को ना पूछ।

कुछ वहम, कुछ यक़ी का ख़ुशनुमा रंग

ज़िंदगी को गुलज़ार

बनाए के लिए भी चाहिए।

दिल में होली सी रंगीनियत बनाए

रखने के लिए कैफ़ियत भी चाहिए।

#TopicByYourQuote

One of the best thing I did for myself !

I learned to live easiest existence –

With inner peace and harmony for myself.

No one is allowed to destroy our

inner peace, as no one can bring peace to us.

I learned it late, but believe me -it’s better late than never.

Topic by YouQuote – One of the best thing I did for myself !

वजूद

मेरे वजूद का एक हिस्सा

कहीं पीछे छूट गया है,

बिना क़र्ज़ अदा किए

छोड़ जानेवाले के साथ।

अपने हिस्से की जिम्मदारियों

के क़र्ज़ उतारते उतारते

ज़िंदगी में आगे बढ़ गई हूँ ।

मगर ज़िंदगी का ब्याज

ख़त्म होता नहीं।

Topic by -YourQuote

I’m at that stage in my little fe where …

Topic given by YourQuote !!

लावा

धरती के दिल का दर्द जब फूट निकलता है। उबलते दर्द से पत्थर भी मोम सा पिघलता है। माणिक-पोखराज जैसे ख़ूबसूरत रंग लिए, आतशीं-लावा दमकता है। पास जाओ तो गरमाहट और आग बताती है, ज़मीं का क़तरा-क़तरा दर्द से लरज़ता है। दर्द भरा हर वजूद ऐसे हीं सुलगता है।

प्यार

एक उलझन कम नहीं होती

एक दिन मिली राहों में उलझन बेज़ार, थोड़ी नाराज़ सी।

बोली – बड़े एहसान फ़रामोश हो तुम सब।

मैं ज़िंदगी के सबक़ सिखातीं हूँ

और तुम्हें शिकायतें मुझ से है?

जीना तुम्हें नहीं आता,

एक उलझन कम नहीं होती, दूसरी खड़ी कर देते हो।

हाँ! एक बात और सुनो –

ज़िंदगी है तो उलझने हैं! ना रहेगी ज़िंदगी ना रहेंगीं उलझने।

# this post is written on YourQuote topic.

मृग तृष्णा