शुभ वसंत पंचमी!

Happy Saraswati Puja!!!

Saraswati is the Hindu goddess of knowledge, music, art, speech, wisdom, and learning. She is a part of the tridevi of Saraswati, along with Lakshmiand Parvati.

अहमियत

अपनी ख़ुद्दारी और

आत्मसम्मान पर नाज़ करो।

झिझक नहीं।

अपने वजूद का सम्मान

ख़ुद हम नहीं करेंगे,

तब दूसरों से इज़्ज़त

पाएँगें कैसे?

अपने अहमियत को

ख़ूबसूरती से सम्भालो

तभी ज़माना अहमियत देगा।

दस्तूर

आना-जाना जीवन

का दस्तूर है।

ग़म ना कर।

मौसम, साल, महीने, दिन…

लोग बदलते रहतें हैं।

रोज़ बदलती दुनिया

में अपने बने रहें।

जिनसे दुख-सुख कह ले,

कभी हँस ले,

कभी रो ले,

यह अपनापा बना रहे।

Happy 31 st December!!!

ज़िंदगी के रंग – 220

घर के छत की ढलाई

के लिए लगे बल्ले, बाँस

और लकड़ियों के तख़्ते ने

बिखरे रेत-सीमेंट को

देख कर कहा –

हम ना हो तो तुम्हें

सहारा दे मकान का

छत कौन बनाएगा?

कुछ दिनों के बाद

मज़बूत बन चुका छत

बिन सहारा तना था।

और ज़मीन पर बिखरे थे

कुछ समय पहले

के अहंकार में डूबे बाँस,

बल्ले और तख़्तियाँ।

ज़िंदगी रोज़ नए रंग दिखाती है ।

कसक

ठंड में बढ़ जाती है,

गुम चोट की कसक।

रातों में बढ़ जाती हैं,

गुम और भूली-बिसरीं

यादों की कसक।

Words worth

Though nothing can

bring back the hour

Of splendor in the grass, of glory in the flower;

We will grieve not, rather find Strength in what remains behind; In the primal sympathy Which having been must ever be…

WORDS WORTH

By William Wordsworth

शीश महल

शीशमहल

कौन खोजता हैं दूसरों में

कमियाँ हीं कमियाँ ?

उसमें अपने आप को

ढूँढने वाले।

यह शीश महल

देखने जैसा है।

जिधर देखो अपना हीं

अक्स और परछाइयाँ

देख ख़ुश हो

लेते है ये लोग।

लोग

लोग

ज़िंदगी की राहों में

लोगों को आने दो

….. जाने दो।

सिर्फ़ उनसे मिले

सबक़ अपना लो।

राहों में मिले टेढ़े-मेढ़े

लोग सीधे चलने की

सबक़ औ समझ दे जाएँगे।

सोना या कुंदन

कुंदन

ज़िंदगी के इम्तहानों में

तप कर सोना बने,

कुंदन हुए या

हुए ख़ाक।

यह तो मालूम नहीं।

पर अब महफ़िलें

उलझतीं नहीं।

बेकार की बातें

रुलातीं नहीं।

ना अपनी ख़ुशियाँ

कहीं और ढूँढते हैं ,

ना देते है किसी

को सफ़ाई ।

हल्की सी

मुस्कान के साथ,

अपनी ख़ुशियों पर

यक़ीं करना सीख रहें हैं।

ज़ुबान

ज़ुबान

ज़ुबान बंद रखना

तो ठीक है।

पर बिन बोले बातों का

वजन, बोझ बन जाता है।

और चुभता है, टूटे आईने

की किरचियों सा।

खामोशी की अदा

तब अच्छी है।

जब सुनने वाले के

पास मौन समझने

वाला दिल हो।

वरना लोग इसे

कमजोरी समझ लेतें हैं।