मेरे वजूद का एक हिस्सा
कहीं पीछे छूट गया है,
बिना क़र्ज़ अदा किए
छोड़ जानेवाले के साथ।
अपने हिस्से की जिम्मदारियों
के क़र्ज़ उतारते उतारते
ज़िंदगी में आगे बढ़ गई हूँ ।
मगर ज़िंदगी का ब्याज
ख़त्म होता नहीं।

Topic by -YourQuote
मेरे वजूद का एक हिस्सा
कहीं पीछे छूट गया है,
बिना क़र्ज़ अदा किए
छोड़ जानेवाले के साथ।
अपने हिस्से की जिम्मदारियों
के क़र्ज़ उतारते उतारते
ज़िंदगी में आगे बढ़ गई हूँ ।
मगर ज़िंदगी का ब्याज
ख़त्म होता नहीं।

Topic by -YourQuote
जिन्हें अपना पता मालूम नहीं,
वो दूसरों को राहें क्या बताएँगे?
बस थोड़ा सुकून और शीतलता
देने की कोशिश कर सकते है।
ताज़गी भरी स्वच्छंद, मनमौजी,
बहती-झूमती बयार ने कहा।

जिन्हें जंग चाहिए, उन्हें हासिल होता है,
विनाश देख ख़ुशियाँ और अपने अहं की शांति ।
औरों को हासिल होता है दर्द और रक्तपात।
हम सबों को एक युद्ध…. लङाई… जंग लड़नी होगी ,
सभी लङाईयों को खत्म करने के लिये।
शांती लाने के लिये।

This topic is given by YourQuote.

जब लोग आपको तराशने और अपने साँचे में ढालने लगे।
आपको काट-छाँट औ कतर कर अपने पसंद लायक़ बनाने लगें।
तब बेहतर है संभल जाना।
हर फ़ूल अपनी सुगंध और ख़ूबसूरती ले कर आया है।
क्या कभी गुलाब को कमल बनाने का ख़्याल भी मन में आया है?
फिर अपने को खो कर किसी जैसा,
किसी के पसंद सा क्यों बनाना?
सच तो ये है कि अपने को गवाँ कर नहीं पाया जा सकता किसी को।

आँसू बहाते नयन और गीला मन,
गिलाओं को बह जाने देता है।
आँसुओं से धुल दिल का दर्द
हलका हो जाता है।
ये पानी के क़तरे नहीं,
जज़्बात के आईने होतें हैं।
अश्क़ और जज़्बात दबाए रखना,
सैलाब रोकना है।
बहा दिया,
तो ज़िंदगी फिर से
ख़ूबसूरत नज़र आने लगती है।
धरती के दिल का दर्द जब फूट निकलता है। उबलते दर्द से पत्थर भी मोम सा पिघलता है। माणिक-पोखराज जैसे ख़ूबसूरत रंग लिए, आतशीं-लावा दमकता है। पास जाओ तो गरमाहट और आग बताती है, ज़मीं का क़तरा-क़तरा दर्द से लरज़ता है। दर्द भरा हर वजूद ऐसे हीं सुलगता है।



#topic given by YourQuote.

ख़ामोशी की क़दर करने वाले लोग,
हर लम्हें जीते हैं।
सही वक़्त मिले, दिल मिलें।
गुलिस्ताँ में गुलाब से लगाने वाले
अपने जैसे लोग मिलें।
दिल की बातें दिलों तक जाए।
तब कम बोलने वाले भी क्या ख़ूब बोलते हैं।
Psychological Fact- Quiet people are actually very talkative around the right people.

अपने दर्द औ तकलीफ़ को बहाना ना बनाओ,
दूसरों के ठेस पहुँचाने का।
वरना ना तुम्हारा चोट ठीक होगा ना दर्द जाएगा।
यह अपने घाव को कुरेदते रहने जैसा है।
You must be logged in to post a comment.