फ़साने लिखें, जवाब ना आए।
अनदेखा-अनसुना किया जाए।
ऐसी बेरुख़ी की क्या शिकायतें?
सुकून है तब, संभल कर निकल जायें
जब क़रीब से कमजोर- बिखरती इमारतों के।
तब समझो ज़िंदगी जीना आ गया।

TopicByYourQuote
फ़साने लिखें, जवाब ना आए।
अनदेखा-अनसुना किया जाए।
ऐसी बेरुख़ी की क्या शिकायतें?
सुकून है तब, संभल कर निकल जायें
जब क़रीब से कमजोर- बिखरती इमारतों के।
तब समझो ज़िंदगी जीना आ गया।

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वह है हर जगह,
फिर भी जाते हैं मंदिरों में
ताकि उसे महसूस कर सकें।
वह है हमारे अंदर,
फिर भी जपते हैं मंत्र
ताकि उसे हर वक्त याद रख सकें।
कितनी गहरी है ये सीखें।
अफ़सोस ग़लतियाँ करने समय
लोग अक्सर भूल जातें है।
सारी कायनात है उसकी,
कि वह हर वक्त देख रहा है हमें।
Psychological Fact – The process of being watched affects our performance positively. (Hawthorne effect)

* On International Day for the Elimination of Sexual Violence in Conflict – crimes against women
* On Father’s Day


एकांत में रम कर समझ आता है,
किसे प्यार है, किसे कहते है ज़रूरत।
एकांत परिचय करता है अपने आप से।
यह पहचान कराता है –
सच्चे अपनों और तथाकथित अपनों से।
ख़ुशियों भरा बदलाव लाता है बाहर से।
धीरे-धीरे अंदर भी बहुत कुछ बदलने लगता है।
मनोवैज्ञानिक तथ्य – जब आप खुद के साथ
ज्यादा समय अकेले बिताने लगते हैं तब आप
अपने साथ-साथ दूसरे की मनःस्थिति बड़ी
आसानी से समझने लगते हैं ।

दूर थे बादल और कहीं ना था साया।
बस था तपते सूरज का साथ।,
कहा सूरज ने – ग़लत छोड़ आगे नहीं बढ़ोगे,
तो सही साथ पाओगे कैसे?
जहाँ मोल ना हो, वहाँ से जाओगे नहीं,
तब अपना मोल जान पाओगे कैसे?
सोना मिट्टी में दबा, मिट्टी के मोल रहता हैं।
मिट्टी का साथ छोड़ सोना और हीरा
अनमोल हो जाता है।
Psychological fact – knowing own
self-worth is healing and life changing.
Self-worth is the core of our selves.


यह तो वक़्त वक़्त की बात है।
टिकना हमारी फ़ितरत नहीं।
हम तो बहाव ही ज़िंदगी की।
ना तुम एक से रहते हो ना हम।
परिवर्तन तो संसार का नियम है।
पढ़ लो दरिया में
बहते पानी की तहरीरों को।
बात बस इतनी है –
बुरे वक़्त और दर्द में लगता है
युग बीत रहे और
एहसास-ए-वक़्त नहीं रहता
सुख में और इश्क़ में।
कुछ लोग दिल में होते हैं ज़िंदगी में नहीं।
कुछ ज़िंदगी में होते है दिल में नहीं।
जो अपने रूह और दिल में जगह दें।
उन्हें हीं ज़िंदगी,
रूह और दिल का हिस्सा बनायें,
चाहे वे दूर हों या पास,
ग़र ना हो चाहत टूटने-बिखरने की।
सिर्फ़ पास और साथ के लिए
साथ ना निभाएँ।
रिश्ते अपनेपन के लिए होतें हैं,
ख़ामियाज़ा भरने के लिए नहीं।

लोग नहीं बदलते।
फ़रेबी अक्सर धोखे-बाज़ साबित होतें हैं।
वस्ल का वादा करतें है
लेकिन कभी वफ़ा नहीं करतें।
कभी दोस्त, कभी माशूक़ ,
कभी अपना… करीबी बन,
दिखा देतें हैं अपनी फ़ितरत।
अक्सर लोग नहीं बदलते।


हवा में लहराती,
दुनिया रौशन करने की ख़ुशी से नाचती सुनहरी,
लाल नारंगी लौ क्या जाने,
बाती के जलने का दर्द।
जलती बाती क्या जाने गर्म-तपते तेल की जलन?
ना लौ, ना बाती, ना तेल जाने
दीये के एक रात की कहानी।
जल-तप दूसरों को रौशन करती,
अपने तले हीं अंधकार में डूबा छोड़।
पता नहीं किसका दर्द बड़ा ?
पर सब जल-तप करते रहते हैं रौशन राहें।

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