यादें

जिसे भूलना चाहा, उम्र कट गई भुलाने में।

जो याद रखना चाहा, ना जाने कब भूल गए।

भूलना-भुलाना नहीं कोई ख़ता,

यह इंसानी फ़ितरत है ज़रूरी,

दिल-औ-दिमाग के सुकून के लिए।

Interesting Psychological Fact- For proper

balance in life, both conservation of memory

and forgetting are important. The ability to

forget helps us prioritize, think better, make

decisions, and be more creative. Normal

forgetting, in balance with memory, gives us

the mental flexibility to grasp abstract concept

from a morass of stored Information.

तिमिर या रौशनी

ज़िंदगी में मिलतीं कई हैं राहें।

कुछ राहें जातीं हैं

तिमिर से तिमिर… अंधकार की ओर।

कुछ अंधकार से रोशनी की ओर,

कुछ ज्‍योति से तिमिर की ओर,

कुछ ज्‍योति से ज्‍योति की ओर।

इन मुख़्तलिफ़ राहों से चुन लो

किधर है जाना।

इन राहों में जिसे चाहो चुनो,

वापस लौटने की नहीं है गुंजाइश,

शर्त-ए-ज़िंदगी बस इतनी है।

जीवन संग्राम

जीवन संग्राम में सबसे बड़ा समर है,

जीतना अपने आप से।

अपने आप को स्वीकार करना,

साथ अपनी कमियों के।

अपने आप को प्यार करना।

अपने एहसासों पर इख़्तियार रखना,

अपने एहसासों के इख़्तियार में नहीं रहना।

नज़्म-ए-ज़िंदगी अधूरी रह गई

कुछ कहना था, कुछ सुनना था।

पर बात अधूरी रह गई।

क़िस्सा-ए-इश्क़ छेड़ा,

पर कहानी अधूरी रह गई।

क्या शिकवा आल्फ़ाज़ो और

लफ़्ज़ों की ग़र वे अनसुनी रह गई।

जब नज़्म-ए-ज़िंदगी अधूरी रह गई।

सर्वोतम या उत्कृष्ट?

अपूर्णता में भी पूर्णता हैं,

कमियों में भी सौंदर्य।

जुनून में होता है नशा।

धुन में होती है खुमारी।

सर्वोतम या उत्कृष्ट होने से

बेहतर है सच्चा होना।

क्या सुनाए दास्तान?

लगता था, क्या सुनाए दास्तान?

उम्र गुज़र जाएगी, पर पूरी नहीं होगी।

हर लफ़्ज़ पर आँसू थे छलकते,

गला था रुँधता।

दर्द में डूबी कहानी अधूरी रह जाती।

ज़िंदगी औ समय ने बना दी आदत,

आँसू पी कहानी सुनाने की।

समुंदर के साथ भी यही हुआ था क्या?

अपने हीं आँसुओं को पी-पी कर खारा हो गया क्या?

अपने हीं आँसुओं को पी-पी कर खारा हो गया क्या?

अस्तित्व अपना

जो मिला उसमें जीना सीखा लिया।

जो ना मिला उसमें गुज़ारा करना सीख लिया।

चाहना, पसंद करना छोड़ना सीख लिया।

घूमते रही इर्दगिर्द तुम्हारे,

घड़ी की सुइयों की तरह।

क्या अपने आप को था जीत लिया?

या खो दिया अस्तित्व अपना?

यही होती है बज़्म-ए-हस्ती औरत की।

आँखों से मुहब्बत होती है बयान !

आँखें दिलकश ख़्वाबों और इश्क़ की है राहें।

जब निगाहों-निगाहों में बातें होतीं है।

बिन ज़ुबान दिल की बातें बयान होती है।

लाख रखो पहरे, इश्क़ सरेआम होतीं है।

लाख छुपाओ नशीली आँखें से,

मुहब्बत खुलेआम बयान होती है।

Interesting Psychology fact about LOVE-

Researches says dilated pupils are a sign

of attraction. The “love hormones”

oxytocin and dopamine have an effect

on pupil size. Our brain gets a boost of

these chemicals when we’re sexually

or romantically attracted to someone.

This surge in hormones appears to

make our pupils dilate and large.

विजेता

ज़िंदगी की राहों पर अकेले हो?

तन्हाइयों का मलाल ना करो।

तय है, लक्ष्य है क़रीब।

सर्वोच्च स्थान, उच्चतम शिखर,

भीड़ नहीं,

सिर्फ़ सर्वश्रेष्ठ विजेता है पहुँचता।

The Winner Stands Alone.

Solitude makes us strong ,

if we have the power to

handle it positively.

गुफ़्तगू अपने आप से

दुनिया से नाराज़ होना छोड़ दिया अरसे पहले।

अब अपने आप से भी नाराज़ नहीं होते।

बात ऐसी नहीं कि ज़िंदगी हसीन हो गई है।

बात बस इतनी है कि

मुहब्बत करने लगे हैं अपने-आप से।

ख़ुशी की बात हो, कि ग़मों की,

सब से पहले, गुफ़्तगू अपने आप से करते हैं।

हौसला अफजाई अपने आप की करते हैं।

Positive Psychology –

Our most important relationship

is with our inner voice- Our internal

monologue shapes mental wellbeing,

says psychologists.