
ठंड में बढ़ जाती है,
गुम चोट की कसक।
रातों में बढ़ जाती हैं,
गुम और भूली-बिसरीं
यादों की कसक।

ठंड में बढ़ जाती है,
गुम चोट की कसक।
रातों में बढ़ जाती हैं,
गुम और भूली-बिसरीं
यादों की कसक।
सागर के दिल पर तिरती- तैरती नावें,
याद दिलातीं हैं – बचपन की,
बारिश अौर अपने हीं लिखे पन्नों से काग़ज़ के बने नाव।
नहीं भूले कागज़ के नाव बनाना,
पर अब ङूबे हैं जिंदगी-ए-दरिया के तूफान-ए-भँवर में।
तब भय न था कि गल जायेगी काग़ज की कश्ती।
अब समझदार माँझी
कश्ती को दरिया के तूफ़ाँ,लहरों से बचा
तलाशता है सुकून-ए-साहिल।
आदत बन रहीं हैं दूरियाँ और दीवारें.
तमाम जगहों पर पसरा है सन्नाटा.
कमरों में क़ैद है ज़िंदगी.
किसी दरवाजे, दीवारों की दरारों से
कभी-कभी रिस आतीं हैं कुछ हँसी….कुछ आवाज़ें.
एक दूसरे का हाथ थामे खड़ी ये चार दीवारें,
थाम लेतीं हैं हमें भी.
इनसे गुफ़्तुगू करना सुकून देता है.
ज़िंदगी की परेशान घड़ियों में अचानक
किसी की बेहद सरल और सुलझी बातें
गहरी समझ और सुकून दे जातीं हैं, मलहम की तरह।
किसी ने हमसे कहा – किसी से कुछ ना कहो, किसी की ना सुनो !
दिल से निकलने वाली बातें सुनो,
और अपने दिल की करो।
गौर से सुना, पाया……
दिल के धड़कन की संगीत सबसे मधुर अौर सच्ची है।
रूमी की पंक्तियों आपको क्या कहतीं हैं? ज़रूर बतायें. आप सबों के विचार मेरे लिए बेहद मायने रखते हैं.
रूमी को मैंने कुछ साल पहले मायूसी के पलों में, गहराई से पढ़ना शुरू किया था. अब गीता, कबीर, रूमी, नानक और ढेरों संतों की बातों और विचारों में समानता पाया. इनकी पंक्तियाँ मुझे गहरा सुकून देतीं हैं.
जीवन के बाद के जीवन, को जानने की लालसा इतनी प्रबल है कि ,
मन व आत्मा को हमेशा खींचता है अपनी ओर.
जीवन के अंत से ङरे बिना।
उसमें अब एक लालसा और जुड़ गई है – किसी से मुलाक़ात की.
मिलेंगे फिर वहाँ, जहाँ एक और जहाँ… दुनिया हैं.
भीड़ और परखने वाली नज़रों से दूर…. सही ग़लत से दूर .
What did Rumi mean when he said:
Out beyond ideas of wrongdoing
and rightdoing there is a field.
I’ll meet you there.
When the soul lies down in that grass
the world is too full to talk about.

Rumi ❤️
जिंदगी रोज़ नया कुछ सिखाती है, बशर्ते हम सीखना चाहें।
सुबह की शीतल बयार
कानों में कुछ कह रही थी …,..
उन पर भरोसा मत करो
जो दिलों को तकलीफ़ देते हों,
अपने वो हैं जो
पल भर का भी सुकून दे ,
हौसला , तस्सली दे .

अपने आप से नाराजगी, शिकायतें
अपने आप से झगङा…..
क्यों हम करते हैं हर रोज़?
कभी अपने आप से प्यार अौर दोस्ती
करके तो देखिये।
अपने को माफ करके तो देखिये……
कितना सुकून मिलेगा।
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