दर्द की कायनात

दर्द की कायनात और

हिसाब भी कुछ अजीब है।

क़र्ज़ की तरह बढ़ता है।

ना तरकीब किश्तों की,

ना सूद-ब्याज का हिसाब।

ना ठहरता है

ना गुजरता है।

हँस कर छलो तो दर्द बढ़ता है।

जितना भागो, पकड़ता है।

दर्द कहाँ ले जाता है?

यह तय है ज़िंदगी

की राहें और लोगों

को बदलता है।

भरोसा

ज़िंदगी की हर जंग में,

हर महाभारत में आश्वस्त हैं।

क्योंकि जीवन के

हर सैलाब में तुम्हें साथ

ले कर चल रहें हैं।

भरोसा है,

जब तुमने जंग दिया है

तो जय दिलाने सारथी

बन तुम आओगे हीं।

ज़िंदगी के रंग -231

ज़िंदगी के जंग में,

जब हम अपना सम्मान करना,

अपने लिए खड़े होना

सीखने लगते है।

तब कई लोग हम से

दूर हो जातें है।

वे साथ नहीं छोड़ते

क्योंकि वे कभी

साथ थे हीं नहीं।

बस दिखने लगती है

सब की फ़ितरत।

जो अपने हैं,

वो तो हमेशा

साथ खड़े मिलेंगे।

Why We Love Narcissists – Have you ever wondered why selfish, arrogant, and entitled individuals are so charming? These narcissistic people have parasitic effects on others/ society. Narcissists manipulate credit and blame in their favor.
Research by January 15, 2014

इश्क़

कुछ मोहब्बतें

जलतीं-जलातीं हैं।

कुछ अधुरी रह जाती हैं।

कुछ मोहब्बतें अपने

अंदर लौ जलातीं हैं।

जैसे इश्क़ हो

पतंग़े का चराग़ से,

राधा का कृष्ण से

या मीरा का कान्हा से।

इंद्रधनुष

दिव्य प्रेम के जश्न,

रास में डूब,

राधा इंद्रधनुष के रंगों से

नहा कर बोली कान्हा से –

हम रंगे हैं रंग में तुम्हारे।

रंग उतारता नहीं कभी तुम्हारा ।

कृष्ण ने कहा- यह रंग नहीं उतरता,

क्योंकि

राधा ही कृष्ण हैं और

कृष्ण ही राधा हैं।

गोपाल सहस्रनाम” के 19वें श्लोक मे वर्णित है कि महादेव जी देवी पार्वती जी को बतातें है कि एक ही शक्ति के दो रूप है – राधा और माधव(श्रीकृष्ण)।यह रहस्य स्वयं श्री कृष्ण ने राधा रानी को भी बताया। अर्थात राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं।

ज़िंदगी के रंग -228

ज़िंदगी रोज़ एक ना एक

सवाल पूछती है।

सवालों के इस पहेली में

उलझ कर, जवाब ढूँढो।

तो ये सवाल बदल देती है।

ज़िंदगी रोज़ इम्तहान लेती है।

एक से पास हो या ना हो।

दूसरा इम्तहान सामने ला देती है।

अगर खुद ना ले इम्तहान,

तो कुछ लोगों को ज़िंदगी में

इम्तहान बना देती है।

बेज़ार हो पूछा ज़िंदगी से –

ऐसा कब तक चलेगा?

बोली ज़िंदगी – यह तुम्हारा

नहीं हमारा स्कूल है।

तब तक चलेगा ,जब तक है जान।

बस दिल लगा कर सीखते रहो।

ध्वनियाँ

ध्वनियाँ मानो तो शोर हैं,

जानो तो संगीत हैं।

नाद साधना हैं।

मंत्र हैं।

ॐ है हर ध्वनि का आधार।

ध्वनियों को ज्ञान से सजा दो,

तो ध्वनियाँ मंत्र कहलातीं हैं।

इन मंत्रों में माधुर्य, सुर,

ताल, लय मिला दो

तो संगीत बन जातीं हैं।

जो रूह में गूंज आध्यात्म

की राहें खोलतीं है।

ब्रह्मांड का हर आयाम

खोलतीं हैं।

ऊपरवाले को पाने का

मार्ग खोलतीं हैं।

ख़ता

नज़रें झुका कर,

उठा कर,

पलकें झपका

कर अश्कों को क़ाबू

करना सीखा था, पर

आँखें ऐन वक्त पर

धोखा दे गईं।

जब आँखों को आँखें दिखाईं,

जवाब मिला

हमारी नहीं जज़्बातों

की ख़ता है।

नसीहत

ज़िंदगी ने कहा,

ध्यान से पढ़ो मेरा सबक़ ।

ये नसीहत

हमेशा काम आएँगे।

वरना इम्तहान

बार-बार होता रहेगा।

ज़िंदगी के रंग -226

जब छोटे थे दौड़ते,

गिरते और उठ जाते।

चोट पर खुद हीं

मलहम लगाते थे।

आज़ भी ज़िंदगी की

दौड़ में वही कर रहें हैं।