
आँसू बहाते नयन और गीला मन,
गिलाओं को बह जाने देता है।
आँसुओं से धुल दिल का दर्द
हलका हो जाता है।
ये पानी के क़तरे नहीं,
जज़्बात के आईने होतें हैं।
अश्क़ और जज़्बात दबाए रखना,
सैलाब रोकना है।
बहा दिया,
तो ज़िंदगी फिर से
ख़ूबसूरत नज़र आने लगती है।









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