हमें जलाने की,
बुझाने की कोशिश ना कर,
हम चराग़ नहीं,
रौशन आफ़ताब हैं।
खुद हीं जल के रौशन होते हैं।
और जहाँ रौशन करते हैं।

हमें जलाने की,
बुझाने की कोशिश ना कर,
हम चराग़ नहीं,
रौशन आफ़ताब हैं।
खुद हीं जल के रौशन होते हैं।
और जहाँ रौशन करते हैं।

होते हैं कुछ लोग
ख़ुशगवार-सुकुमार दिखते पीपल से।
दीवारों-छतों-घरों पर बिन बताए,
बिना अनुमति ऊग आये पीपल से।
नाज़ुक पत्तियों और हरीतिमा भरा पीपल।
समय दिखाता है,
इनके असली रंग।
गहरी जड़ें कैसे आहिस्ते-आहिस्ते गलातीं है,
उन्ही दरों-दीवारों को टूटने-बिखरने तक,
जहाँ मिला आश्रय उन्हें।

भरोसा रख खुद पर,
अपने दिल की आवाज़ों पर।
किसी और को ना समझा,
खुद को समझ और महसूस कर।
हंसी और ख़ुशी आँखों, होंठों और
चेहरे से ऐसे झड़ने लगेगें,
जैसे पारिजात वृक्ष से झड़ते
हरसिंगार के ख़ूबसूरत फूल।

फ़साने लिखें, जवाब ना आए।
अनदेखा-अनसुना किया जाए।
ऐसी बेरुख़ी की क्या शिकायतें?
सुकून है तब, संभल कर निकल जायें
जब क़रीब से कमजोर- बिखरती इमारतों के।
तब समझो ज़िंदगी जीना आ गया।

TopicByYourQuote
वह है हर जगह,
फिर भी जाते हैं मंदिरों में
ताकि उसे महसूस कर सकें।
वह है हमारे अंदर,
फिर भी जपते हैं मंत्र
ताकि उसे हर वक्त याद रख सकें।
कितनी गहरी है ये सीखें।
अफ़सोस ग़लतियाँ करने समय
लोग अक्सर भूल जातें है।
सारी कायनात है उसकी,
कि वह हर वक्त देख रहा है हमें।
Psychological Fact – The process of being watched affects our performance positively. (Hawthorne effect)

* On International Day for the Elimination of Sexual Violence in Conflict – crimes against women
* On Father’s Day


एकांत में रम कर समझ आता है,
किसे प्यार है, किसे कहते है ज़रूरत।
एकांत परिचय करता है अपने आप से।
यह पहचान कराता है –
सच्चे अपनों और तथाकथित अपनों से।
ख़ुशियों भरा बदलाव लाता है बाहर से।
धीरे-धीरे अंदर भी बहुत कुछ बदलने लगता है।
मनोवैज्ञानिक तथ्य – जब आप खुद के साथ
ज्यादा समय अकेले बिताने लगते हैं तब आप
अपने साथ-साथ दूसरे की मनःस्थिति बड़ी
आसानी से समझने लगते हैं ।

दूर थे बादल और कहीं ना था साया।
बस था तपते सूरज का साथ।,
कहा सूरज ने – ग़लत छोड़ आगे नहीं बढ़ोगे,
तो सही साथ पाओगे कैसे?
जहाँ मोल ना हो, वहाँ से जाओगे नहीं,
तब अपना मोल जान पाओगे कैसे?
सोना मिट्टी में दबा, मिट्टी के मोल रहता हैं।
मिट्टी का साथ छोड़ सोना और हीरा
अनमोल हो जाता है।
Psychological fact – knowing own
self-worth is healing and life changing.
Self-worth is the core of our selves.

कुछ से दूरी है ज़रूरी,
अपने आप से इश्क़ करने के लिए।
ये तहज़ीब सिखाते है,
ख़ामियों के परे ज़िंदगी देखने की।

कविताएँ है शब्द और भाव।
पहुँचती है दिलों तक तब,
जब कुछ अधूरी ख्वाहिशें कुछ बिखरी,
ज़िंदगी देखी हो आपने भी।
इनका लुत्फ़ मिलेगा तब,
जब कुछ अधुरे अरमान जाग रहे हों,
दिलों की गहराई में।
जहाँ छु सके इन्हें सिर्फ़ शब्दों की गहराइयाँ।
इनसे गुफ़्तगू हो, जुड़ाव महसूस हो।
कुछ अपना सा,
अपनी ज़िंदगी का हिस्सा सा लगे।
वरना तो कविताएँ शब्दों का बुना जाल है।

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