फ़ुर्सत मिल जाए तो

Topic by Your Quote.

फ़ुर्सत मिल जाए तो

दो बातें हम से भी कर लेना।

एक बात तुमसे कहनी थी-

ना ख़ूबसूरती रहती है,

ना जुनून

जब दो एक हो जाते हैं।

बस रह जाता है इश्क़।

एक जंग अपनों से…

ये ज़िंदगी की धुआँ धुआँ हैं आहें।

दुरूह धोखे औ गर्द भरी राहें।

मसला तो यह है कि अपने हीं

मसलते हैं अपनों के दिलों को।

इतिहास भी देता है गवाहियाँ।

लाख कोशिशों के बाद कृष्ण भी हारे।

चाहे रिश्ते लाख निबाहें,

बदली हो जब अपनों की निगाहें।

एक जंग अपनों से…

रोक नहीं सके सारे।

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रेत हो या वक्त

ना समझो इसे मौन,

खोज़ रहें है, हम हैं कौन?

कर रहे हैं अपने आप से गुफ़्तगू।

हमें है खोज़ अपनी, अपनी है जुस्तजू ।

इश्क़ अपने आप से, अपने हैं हमसफ़र।

छोटी सी ज़िंदगी, छोटी सी रहगुज़र।

रेत हो या वक्त ,

फिसल जाएगा मुट्ठी से कब।

लगेगा नहीं कुछ खबर।

एक छोटी सी बात

हम ख़ुशियाँ चुनते रहे।

और ना जाने कब

ज़िंदगी नाराज़ हो गई।

सब कहते रहे …..

एक छोटी सी बात थी।

हम बात तलाशते रहे पर

ना जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ हो गई।

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ख़ुशगवार ज़िंदगी

ज़माने की महफ़िल में मुस्कुरा कर

करते हो बातें।

अपनों से, जाने-अनजानों से।

कुछ अपनी फ़िक्र, अपना ख़याल करो।

ज़माने के रंज-औ-ग़म ना उतारो ख़ुद पर।

चाहिए ग़र ज़िंदगी ख़ुशगवार चुस्त।

अपने-आप से बातें करो वही जो हों दुरुस्त।

Interesting Psychological Fact – Self-talk is

our internal dialogue. It’s influenced by

our subconscious mind, and it reveals

our thoughts, beliefs, questions, and ideas.

Positive Self-talk can enhance your

performance and general well-being.

सबके सामने

मुस्कुराती आँखें सबके सामने

ग़ज़ब हैं झिलमिलाती सब के सामने।

चमक आँसुओं के नमी की है

या ख़ुशियों की है?

कैसे जानें?

नज़रों को पढ़ने वाले अब हैं कहाँ?

अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?

लोग क्या कहेंगे?

अगर सुन रहे हो लोगों की।

तब जी रहे हो उनकी ज़िंदगी,

उनकी बातें,

उनकी ख्वाहिशें।

अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?

नया सहर

अहम बातें

ज़िंदगी की कुछ अहम बातें है –

दिल औ दिमाग़ में ज्ञान भरने के लिए पढ़ना,

दिल औ दिमाग़ में भरे दर्द हटाने,

खाली करने के लिए लिखना।

बातों को समझने के लिए ज़िक्र औ चर्चा करना।

यादों से निकलने के लिए उनको समझना।

बातों को आत्मसात् करने के लिए पढ़ाना।

राज़-ए-दिल और दिल की बातें दिल में रखना।

राख़ में दबी चिंगारी

चोट किसी की ख़्वाहिशों के

अन्दाज़ से नहीं भरता।

भरता है, अपने तरीक़े से,

अपने समय से।

कुरेदने से राख़ में दबी चिंगारी

आग भड़काती है फ़िज़ाओं में ।

अपने चोट, घाव ना कुरेद,

दो समय भरने का।

Wounds don’t heal the way we

want them to, they heal the way

they need to. It takes time to heal.

Be gentle with your wounds.