
सूफियाना सा सुकून


यह प्राचीन, दार्शनिक व्याख्या है। जो सिर्फ गैर-प्लेटोनिक प्रेम को जानते हैं, उन्हें त्रासदी पर बात करने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस तरह के प्रेम में किसी प्रकार की त्रासदी का स्थान नहीं हो सकता। – लियो टॉल्स्टॉय।
प्लेटोनिक संबंध या प्रेम दो लोगों के बीच एक विशेष भावनात्मक और आध्यात्मिक संबंध है, जो सामान्य हितों, मिलते-जुलते विचारों, आध्यात्मिक संबंध, और प्रशंसा हैं। अधिकांश दोस्ती व्यक्तिगत रुप से या कार्यस्थान से शुरू होतें हैं।
इसका नाम ग्रीक दार्शनिक प्लेटो के नाम पर रखा गया है, हालांकि उन्हों ने कभी भी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। प्लेटोनिक प्रेम निकटता से हुए आत्मियता, लगाव अौर आकर्षण है। इसमें शारीरिक लगाव या आकर्षण से ज्यादा ज्ञान और सच्चे सौंदर्य के साथ जुड़ाव होता हैं।
सूफी परंपरा में ईश्वर को हमेशा प्रेमी के रूप में देखा गया है. उसका दरवाजा केवल उन लोगों के लिए ही खुलता है, जो अपने को उसके प्रेम में खो चुके होते हैं.
A life without love is of no account.
Don’t ask yourself what kind of love you should seek,
spiritual or material, divine or mundane,
eastern or western…
divisions only lead to more divisions.
Love has no labels, no definitions.
It is what it is, pure and simple.
Love is the water of life.
And a lover is a soul of fire!
The universe turns differently when fire loves water.
Maharamayan or Yoga Vasistha – The Science of Self Realization and the Art of Self Realisation.
The Yoga Vasistha is a detailed conversation between Sri Rama and his Spiritual teacher Vasistha Maharshi.
योग वशिष्ठ को ‘महारामायण’ कहा जाता है क्योंकि इसमें वाल्मीकि रामायण से लगभग चार हजार अधिक श्लोक हैं। इसमें करीब 32,000 श्लोक हैं और विषय को समझाने के लिए बहुत सी लघु कहानियां और किस्से इसमें शामिल किए गए हैं। योग वशिष्ठ एक हिंदू आध्यात्मिक ग्रंथ है। जिसे रामायण के लेखक महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है। यह आत्म बोध का विज्ञान और आत्म बोध की कला दोनों है। योग वशिष्ठ, श्री राम और उनके आध्यात्मिक गुरु वशिष्ठ महर्षि के बीच एक विस्तृत बातचीत है। अतः मान्यता है कि मानव मन में उठने वाले सभी सवालों के जवाब यह ग्रंथ दे सकता है और मोक्ष पाने में इंसान की मदद कर सकता है।
Vasistha to Rama –
When the mind is at peace and the heart leaps to the supreme truth, when all the disturbing thought- waves in the mind-stuff have subsided and there is unbroken flow of peace and the heart is filled with the bliss of the absolute, when thus the truth has been seen in the heart, then this very world becomes an abode of bliss.
(II:12)
वशिष्ठ राम से – जब मन शांत होता है और हृदय सर्वोच्च सत्य की अग्रसर होता है, जब सभी परेशानियाँ व विचार- मन में तरंगें थम जाती हैं और शांति का अखंड प्रवाह होता है और हृदय इस तरह पूर्ण आनंद से भर जाता है, जब सत्य को हृदय में देखा गया है, तब यह संसार आनंदमय बन जाता है।
स्पर्श मणि, Philosopher’s Stone, परुसवेदी या पारस पत्थर एक पहेली, एक रहस्य है। पारस पत्थर के बारे में यह मान्यता है कि इस पत्थर से स्पर्श कर लोहा सोना बन जाता है। यह काले रंग का सुगन्धित, दुर्लभ व बहुमूल्य पाषाण है।
जैसे छू गया पारस लोहे को,
सोना बना गया।
चाहत है, वैसे हीं रूहानियत-आध्यात्मिक पारस
छू जाए दिल को
स्वर्ण बना जाए.

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