तीखी धूप साये की याद दिलाती है
सर्द साया धूप-ए-आफ़ताब
की याद दिलाता है।
वक़्त वक़्त की बात है।
बहाव-ए-वक्त रोज़ नये सबक़ सीखता है
ज़िंदगी के नए रंग दिखाता है।
रात की दहलीज़ पर
दहलीज़ पर जलता दीया,
पाथेय बन राहें
उनके लिए रौशन है करता,
जिन्हें वापस आना हो।
ज़ो लौटें हीं ना
उनके लिए क्यों दीया जलाना
रात की दहलीज़ पर?

तह-ए-इश्क़ (महादुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं)
थे राधा बनने की चाह में।
कई नज़रें उठी,
सिर्फ़ लालसा भरी चाह में।
माँगा इश्क़ भरी नज़रें,
मिला बदन भर चाह।
समझ ना आया, तह-दर-तह
तह-ए-इश्क़ में सच्चा कौन, झूठा कौन?
और हर इल्ज़ाम इश्क़ पर आया।
पर कृष्ण ना मिले।
महादुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

तेरी मेरी कहानी
बँटवारा हो तब
ख़ुशियाँ तुम रख लो,
ग़म मेरे पास रहने दो।
अपने हिस्से की ख़ुशियाँ हम
ख़ुद रचेंगे, ख़ुद कमाएँगे।
अभी थोड़ी ख़ुशियाँ दे दो मुझे भी।
दुनिया को तुमसे मिले विरासत दिखाने के लिए।
चेहरे पर मुस्कान की मास्क लगा दुनिया
के सामने जाने के लिए।
बस इतनी सी है, तेरी मेरी कहानी।

topic by – yourQuote
क्या फ़र्क़ है पड़ता (International Day of Older Persons -1 October)
उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,
क्या फ़र्क़ है पड़ता?
उजालों का भी समय है ढलता।
सूरज भी है ढलता।
बस ज़िंदगी ख़ूबसूरत
और हो सुकून भरी।
यही है कामना।
उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,
क्या फ़र्क़ है पड़ता?
The UN is marking IDOP by encouraging
countries to draw attention to and
challenge negative stereotypes and
misconceptions about older persons
and ageing, and to enable older persons
to realize their potential.
2022 Theme:Resilience of Older Persons
in a Changing World

रात की आग़ोश में
ज़द्दोजहद में ज़िंदगी के,
थके, बेचैन दिन,
कट जाते है निशा के इंतज़ार में।
आ कर गुज़र जाती है रात भी,
किसी याद में।
रात की आग़ोश में,
थक कर सो जाते हैं ख़्वाब।
जागते रह जातें है
चराग़ और महताब…..चाँद।
जारी रहती है सफ़र-ए- ज़िंदगी।

जुस्तजू
जुस्तुजू
उलझी बातें, उलझी चालें।
दूसरों को गिराने के ख़्याल।
ईश्वर की अजीब मख़्लूक़… रचना है इंसान।
यह सब करके भी है जुस्तुजू
पाने के सीधे -सच्चे मख़्लूक़-ए-ख़ुदा…इंसान।
जो दुनिया को दोगे, वही मिलेगा।
क्यों नहीं आता ऐसा ख़्याल।

सोखता….ब्लॉटिंग पेपर

अजनबी

रूह-ए-दुर्गा (शुभ नवरात्रि)
नारी के झुकने, झुक कर उठने,
झुकी नज़रों को उठाने की अदा में
दिखती है कायनात की ख़ूबसूरती।
पर नहीं दिखता रूह-ए-दुर्गा ।
क्यों दिखता है सिर्फ़ हुस्न औ जिस्म?
कुछ लोगों की तस्वीर नहीं फ़क़त फ़्रेम
देखने की अजब है आदत।
औरत को तवायफ़….नगरवधु
बनाने की परम्परा जाती नहीं
कि नज़र आते नहीं तवायफ़ को
वधू बनाने वाले।
बदन पे गिरवी निगाहों से आगे देख,
उसका वजूद नज़र आएगा।
NEWS Ankita Bhandari Murder Case –
Main kya 10k mein bik jaungi’: Ankita
told her friend in WhatsApp chat.

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