God has created
your wings not to be dormant
as long as you are alive
you must try more and more
to use your wings to show you’re alive.

❤️Rumi
God has created
your wings not to be dormant
as long as you are alive
you must try more and more
to use your wings to show you’re alive.

❤️Rumi
साँस के साथ बुनी गई जो ज़िंदगी,
वह अस्तित्व खो गया क्षितिज के चक्रव्यूह में.
अब अक्सर क्षितिज के दर्पण में
किसी का चेहरा ढूँढते-ढूँढते रात हो जाती है.
और टिमटिमाते सितारों के साथ फिर वही खोज शुरू हो जाती है –
अपने सितारे की खोज!!!!

Image courtesy- Aneesh

Rumi ❤️
खुशियों का मनोविज्ञान, अपने मनोवैज्ञानिक चिकित्सक स्वंय बने। Be your own therapist -Keep Smiling! It can trick your brain into happiness and boost your health.
हम खुशियाँ नहीं खरीद सकते है। लेकिन एक मुस्कुराहट से मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन पैदा कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों अौर न्यूरोलॉजिस्टों के खोज बताते हैं – जब आप मुस्कुराते हैं, तब मस्तिष्क की एक रासायनिक प्रतिक्रिया डोपामाइन और सेरोटोनिन सहित कुछ हार्मोनों को छोड़ती है।सेरोटोनिन अौर डोपामाइन खुशी की हमारी भावनाओं को बढ़ाता है।
हर बार जब आप मुस्कुराते हैं, तब दिमाग में एक फील गुड एहसास होता हैं। मुस्कुराहट तंत्रिका संदेश को सक्रिय करता है। जो आपको स्वस्थ्य और प्रसन्नचित बनाता है। हैपी हारमोन या फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर- डोपामाइन, एंडोर्फिन और सेरोटोनिन- सभी तब रिलीज़ होते हैं, जब आपके चेहरे पर एक मुस्कान आती है। साथ-साथ यह चेहरे पर चमक लाता है । यह न केवल आपके शरीर को आराम देता है, बल्कि यह आपके हृदय गति और रक्तचाप को भी कम करता है।
दुर्भाग्य की बात है कि कई स्थितियों मे चिकित्सकों को एंटीडिप्रेसेंट दवा से डोपामाइन और सेरोटोनिन को बढ़ाकर चिकित्सा करना पङता हैं। आप मुस्कुरा कर बङे आराम से हैपी हारमोन या फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को स्वाभाविक रूप से बढ़ा सकते हैं।

Maharamayan or Yoga Vasistha – The Science of Self Realization and the Art of Self Realisation.
The Yoga Vasistha is a detailed conversation between Sri Rama and his Spiritual teacher Vasistha Maharshi.
योग वशिष्ठ को ‘महारामायण’ कहा जाता है क्योंकि इसमें वाल्मीकि रामायण से लगभग चार हजार अधिक श्लोक हैं। इसमें करीब 32,000 श्लोक हैं और विषय को समझाने के लिए बहुत सी लघु कहानियां और किस्से इसमें शामिल किए गए हैं। योग वशिष्ठ एक हिंदू आध्यात्मिक ग्रंथ है। जिसे रामायण के लेखक महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है। यह आत्म बोध का विज्ञान और आत्म बोध की कला दोनों है। योग वशिष्ठ, श्री राम और उनके आध्यात्मिक गुरु वशिष्ठ महर्षि के बीच एक विस्तृत बातचीत है। अतः मान्यता है कि मानव मन में उठने वाले सभी सवालों के जवाब यह ग्रंथ दे सकता है और मोक्ष पाने में इंसान की मदद कर सकता है।
Vasistha to Rama –
When the mind is at peace and the heart leaps to the supreme truth, when all the disturbing thought- waves in the mind-stuff have subsided and there is unbroken flow of peace and the heart is filled with the bliss of the absolute, when thus the truth has been seen in the heart, then this very world becomes an abode of bliss.
(II:12)
वशिष्ठ राम से – जब मन शांत होता है और हृदय सर्वोच्च सत्य की अग्रसर होता है, जब सभी परेशानियाँ व विचार- मन में तरंगें थम जाती हैं और शांति का अखंड प्रवाह होता है और हृदय इस तरह पूर्ण आनंद से भर जाता है, जब सत्य को हृदय में देखा गया है, तब यह संसार आनंदमय बन जाता है।
एक रस्ते पर चलती बहती जिंदगी, जब राह बदल लेती है. तब जिंदगी को और उसका सफर को देखने का एक नया नजरिया बनता है ।
कबीर और रूमी की ये पंक्तियां शायद जिंदगी की उन्हीं फलसफों की बातें करती हैं। कितनी अजीब बात है, अलग-अलग समय… काल में, अलग-अलग जगहों पर दोनों ने एक सी बातें कहीं हैं। चाहें तो इनकी बातों को आध्यात्मिकता से जोड़कर देखा सकतें हैं या इस दुनिया की बातों से जोड़कर। आपको इनमें क्या नजर आता है? आपकी बातें और विचार सादर आमंत्रित है
।We are one, Aren’t we? your thoughts are invited.
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