लॉकडाउन जेनरेशन या पीढ़ी Lockdown generation

Lockdown generation’ of young workers will need extra help after COVID-19. Young women worst affected.

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युवा श्रमिकों की लॉकडाउन पीढ़ी – एक नए अध्ययन के अनुसार, पूरे विश्व में युवा कामागारों, अौर  नौकरी करने वालों  पर COVID -19 का बेहद खराब असर पङा है। पाया गया है कि युवा महिलाएँ ज्यादा प्रभावित हुई हैं। छह में से एक से अधिक युवाओं ने महामारी की शुरुआत के बाद से काम करना बंद कर दिया है।

 इस शोध के अनुसार, लॉकडाउन पीढ़ी को अतिरिक्त मदद की आवश्यकता होगी।

अगर  उनकी स्थिति में सुधार के लिए  तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। तब इसका  खामियाज़ा  दशकों  तक झेलना पङ सकता है। यह  पोस्ट-कोविङ अर्थव्यवस्था को  भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा।

 

 

 

माँ या मानवता !!

उस दिन मौत किसकी हुई ?

माँ की ?

या मानवता की ?

या दोनों की ??

क्यों कोई नहीं  आया उसे गोद में उठाने ?

 

Menstrual Hygiene Day, May 28

Menstrual Hygiene Day (MHD, MH Day in short) is an annual awareness day on May 28 to highlight the importance of good menstrual hygiene management (MHM). It was initiated by the German-based NGO WASH Unitedin 2014 and aims to benefit women and girls worldwide. The 28th was selected to acknowledge that 28 days is the average length of the menstrual cycle.

Courtesy – Wikipedia

कोविड-19

बात  बड़ी महत्वपूर्ण है। दुनिया है तो बीमारियां होंगी ही और वायरस भी होंगे । पहले भी चीन से  कुछ इंफेक्शन फैले हैं – 2002 में सार्स,  h7 n9 आदि।  पर   कोरोना या कोविड-19 सबसे भयंकर है।  यदि चमगादड़ों की समस्या इतनी गंभीर थी कि 2005 से उस पर शोध  चल रहे थे। इसके लिए बैटवुमैन जैसे शब्द चर्चे में थे। तब क्या समय रहते चेतावनी और रोकथाम या अन्य देशों से मदद लेने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए था? शायद लाखों लोगों की जानें बच जातीं।

China’s bat woman  warns coronavirus is just the tip of the iceberg

Shi Zhengli, a virologist renowned for her work on coronavirus in bats, emphasized on the need for studying viruses among wild animals in advance to prevent another pandemic. BLOOMBERG NEWS25 May, 2020 9:44 pm IST

International Day for Biological Diversity -22 may

   Dogs trained to detect COVID-19,

The International Day for Biological Diversity

(or World Biodiversity Day) is a United Nations–sanctioned

international day for the promotion of biodiversity issues.

It is currently held on May 22.

 

Courtesy- Wikipedia

गिनती बन कर रह गए!

श्रम के सैनिक निकल पड़े पैदल, बिना भय के बस एक आस के सहारे – घर पहुँचने के सपने के साथ. ना भोजन, ना पानी, सर पर चिलचिलाती धूप और रात में खुला आसमान और नभ से निहारता चाँद. पर उन अनाम मज़दूरों का क्या जो किसी दुर्घटना के शिकार हो गए. ट्रेन की पटरी पर, रास्ते की गाड़ियों के नीचे? या थकान ने जिनकी साँसें छीन लीं. जो कभी घर नहीं पहुँचें. बस समाचारों में गिनती बन कर रह गए.

NEWS ARTICLES 

 

A Fire Burns Without Touching Trees Or Grass

कुदरत  से देख बेरुख़ी  इंसानों  की ,
बदले मिजाज धधकते लौ की।
आदत अौर फितरत बदल ली है
 दरिया -ए-आग ने शराफत से ।

Spain – According to local news outlet Cope, it was captured at a park in Calahorra, and the white ‘film’ is actually seeds from the poplar tree covering the whole ground.  In the video, the fire burns away the poplar fluff to reveal green grass underneath. Remarkably enough, it doesn’t set any of the trees or the grass aflame. Even a bench in the park remains untouched by the fire.

Happy International Nurses Day 12 May -2020

जाना और पढ़ा फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल  /Florence Nightingale का नाम कई बार . पर आज से पहले कभी ध्यान नहीं दिया इस दिन पर. इटली में जन्मीं फ्लोरेंस नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिंग की जनक के तौर पर जाना जाता है।उनके जन्मदिवस के मौके पर अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है. आज के कोरोना संकट में नर्सों का योगदान अप्रतिम है.

International Nurses Day is an international day observed around the world on 12 May of each year, to mark the contributions that nurses make to society.

International Nurses Day is organised on 12 May to celebrate the birth anniversary of Florence Nightingale. Each year, the International Council of Nurses (ICN) comes up with a theme to honour nurses. For 2020, the theme chosen for International Nurse Day is ‘Nursing the world to health.’

मेरी माँ ( बाल कथा – लुप्त हो रहे ऑलिव रीडले कछुओं की एक दुर्लभ प्रजाति की रोचक जानकारियों पर आधारित )

ऑलिव रीडले जो कछुओं की एक दुर्लभ प्रजाति है। समुद्र तटों पर अंडे देने काफी कम नज़र आने लगे थे। लौक-ङॉउन में ये काफी संख्या में देखे गये। अवसर मिलते हीं प्रकृती ने अपनी खूबसूरती, शक्ति अौर संतुलन को वापस पा लिया।

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News – Mass hatching of Olive Ridley turtles begins at Odisha’s Rushikulya rookery             

                  गुड्डू स्कूल से लौट कर मम्मी को पूरे घर मे खोजते- खोजते परेशान हो गई। मम्मी कहीं मिल ही नहीं रही थी। वह रोते-रोते नानी के पास पहुँच गई। नानी ने बताया मम्मी अस्पताल गई है। कुछ दिनों में वापस आ जाएगी। तब तक नानी उसका ख्याल रखेगी।

शाम में  नानी के हाथ से दूध पीना उसे अच्छा नहीं लग रहा था। दूध पी कर,वह बिस्तर  पर रोते- रोते न जाने कब सो गई। रात में  पापा ने उसे  खाना खाने उठाया।  वह पापा से लिपट गई। उसे लगा,चलो पापा तो पास है। पर खाना खाते-खाते पापा ने समझाया कि मम्मी अस्पताल में हैं। रात में वे  अकेली न रहें  इसलिए पापा को अस्पताल  जाना पड़ेगा।गुड्डू उदास हो गई। वह डर भी गई थी। वह जानना चाहती थी कि मम्मी अचानक अस्पताल क्यों  गईं? पर कोई कुछ बता  नहीं रहा था।

उसकी आँखों  में आँसू  देख कर नानी उसके बगल में  लेट गई। उन्होंने गुड्डू से पूछा-  गुड्डू कहानी सुनना है क्या? अच्छा, मै तुम्हें कछुए की कहानी सुनाती हूँ। गुड्डू ने जल्दी से कहा- “नहीं, नहीं, कोई नई कहानी सुनाओ न ! कछुए और खरगोश की कहानी तो स्कूल में आज ही मेरी टीचर ने सुनाई थी।

नानी ने मुस्कुरा कर जवाब दिया- यह दूसरी कहानी है। गुड्डू ने आँखों  के आँसू  पोछ लिए।   नानी ने उसके बालों पर हाथ फेरते हुए कहा-  बेटा, यह  पैसेफिक  समुद्र और हिंद महासागर  में रहने  वाले कछुओं की कहानी  हैं। ये ग्रीन आलिव रीडले कछुए के नाम से जाने जाते हैं। हर साल ये कछुए सैकड़ो किलोमीटर दूर से अंडा देने हमारे देश के समुद्र तट पर आते हैं। गुड्डू ने हैरानी से नानी से पूछा- ये   हमारे देश में कहाँ अंडे देने आते हैं? ” नानी ने जवाब दिया- ये कछुए हर साल उड़ीसा के तट पर लाखों की संख्या में आते हैं। अंडे दे कर ये वापस समुद्र में चले जाते हैं। इन  छोटे समुद्री  कछुओं का यह जन्म स्थान होता है।

       फिर नानी ने कहानी शुरू की। समुद्र के किनारे बालू के नीचे कछुओं  के  घोंसले  थे। ये सब घोंसले आलिवे रीडले  कछुए के थे। ऐसे  ही एक घोंसले  में कछुओं के ढेरो अंडे थे। कुछ समय बाद अंडो से बच्चे निकलने लगे। अंडे से निकालने के बाद बच्चों ने घोंसले के चारो ओर चक्कर लगाया। जैसे वे कुछ खोज रहे हो। दरअसल वे अपनी माँ को खोज रहे थे। पर वे अपनी माँ को पहचानते  ही नहीं थे। माँ को खोजते -खोजते वे सब धीरे-धीरे  सागर की ओर बढ़ने लगे। सबसे आगे हल्के हरे रंग का ‘ऑलिव’ कछुआ था।उसके पीछे ढेरो छोटे-छोटे कछुए थे। वे सभी उसके भाई-बहन थे।

‘ऑलिव’ ने थोड़ी दूर एक सफ़ेद बगुले को देखा। उसने पीछे मुड़ कर अपने भाई-बहनों  से पूछा- वह हमारी माँ है क्या? हमलोग जब अंडे से निकले थे। तब हमारी माँ हमारे पास नहीं थी। हम उसे कैसे पहचानेगें? पीछे आ रहे गहरे भूरे रंग के कॉफी कछुए ने कहा- भागो-भागो, यह हमारी माँ नहीं हो सकती है। इसने तो एक छोटे से कछुए को खाने के लिए चोंच में पकड़ रखा है। थोड़ा आगे जाने पर उन्हे एक केकड़ा नज़र आया। ऑलिव ने पास जा कर पूछा- क्या तुम मेरी माँ हो? केकड़े ने कहा- नहीं मै तुम्हारी माँ नहीं हूँ। वह तो तुम्हें समुद्र मे मिलेगी।

सभी छोटे कछुए तेज़ी से समुद्र की ओर भागने लगे। नीले पानी की लहरें उन्हें  अपने साथ सागर में बहा ले गई। पानी मे पहुचते ही वे उसमे तैरने लगे। तभी एक डॉल्फ़िन मछली तैरती नज़र आई। इस बार भूरे रंग के ‘कॉफी’ कछुए ने आगे बढ़ कर पूछा- क्या तुम हमारी माँ हो? डॉल्फ़िन ने हँस कर कहा- अरे बुद्धू, तुम्हारी माँ तो तुम जैसी ही होगी न? मै तुम्हारी माँ नहीं हूँ। फिर उसने एक ओर इशारा किया। सभी बच्चे तेज़ी से उधर तैरने लगे। सामने चट्टान के नीचे उन्हे एक बहुत बड़ा कछुआ दिखा। सभी छोटे कछुआ उसके पास पहुच कर माँ-माँ पुकारने लगे। बड़े कछुए ने मुस्कुरा कर देखा और कहा- मैं  तुम जैसी तो हूँ।  पर तुम्हारी माँ नहीं हूँ। सभी बच्चे चिल्ला पड़े- फिर हमारी माँ कहाँ  है? बड़े कछुए ने उन्हें  पास बुलाया और कहा- सुनो बच्चों, कछुआ मम्मी अपने अंडे, समुद्र के किनारे बालू के नीचे घोंसले बना कर देती है। फिर उसे बालू से ढ़क देती है।  वह वापस हमेशा के लिए समुद्र मे चली जाती है। वह कभी वापस नहीं आती है। अंडे से निकलने के बाद बच्चों को समुद्र में जा कर अपना रास्ता स्वयं खोजना पड़ता है। तुम्हारे सामने यह खूबसूरत समुद्र फैला है। जाओ, आगे बढ़ो और अपने आप जिंदगी जीना सीखो। सभी बच्चे ख़ुशी-ख़ुशी गहरे नीले पानी में आगे बढ़ गए।

कहानी सुन कर गुड्डू सोचने लगी। काश ! मेरे भी छोटे भाई या बहन होते। कहानी पूरी कर नानी ने गुड्डू की आँसू  भरी आँखें  देख कर पूछा- अरे,इतने छोटे कछुए इतने बहादुर होते है। तुम तो बड़ी हो चुकी हो। फिर भी रो रही हो?

गुड्डू ने कहा – मैं रोना नहीं चाहती हूँ । पर मम्मी को याद कर रोना आ जाता है। आँसू पोंछ  कर गुड्डू ने मुस्कुराते हुए कहा। थोड़ी देर में वह  गहरी नींद मे डूब गई।

अगली सुबह पापा उसे अपने साथ अस्पताल ले गए। वह भी मम्मी से मिलने के लिए परेशान थी। पास पहुँचने प पर उसे लगा जैसे उसका सपना साकार हो गया। वह ख़ुशी से उछल पड़ी। मम्मी के बगल में  एक छोटी सी गुड़िया जैसी बेबी सो रही थी। मम्मी ने बताया, वह दीदी बन गई है। यह गुड़िया उसकी छोटी बहन है।

 

(यह कहानी  बच्चों के  बाल मनोविज्ञान पर आधारित है। यह कहानी ऑलिव रीडले कछुओं के बारे में भी  बच्चों को जानकारी  देती है। “ऑलिव रीडले” कछुओं की एक दुर्लभ प्रजाति है। ये प्रत्येक वर्ष उड़ीशा अौर कुछ अन्य तटों पर

 अंङा देने आतें हैं। यह एक रहस्य है कि ये कछुए पैसिफ़ीक सागर और हिन्द महासागर से  इस तट पर ही क्यों  अंडे देने आते हैं।)

शुभ मातृ दिवस !! Happy Mother’s Day 10 May 2020

नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः। 
नास्ति मातृसमं त्राणं नास्ति मातृसमा प्रपा॥

Transliteration:
nāsti mātṛsamā chāyā nāsti mātṛsamā gatiḥ।
nāsti mātṛsamaṃ trāṇaṃ nāsti mātṛsamā prapā॥

Hindi Translation:
माता के समान कोई छाया नहीं, कोई आश्रय नहीं, कोई सुरक्षा नहीं।

माता के समान इस दुनिया में कोई जीवनदाता नहीं॥

English Translation:
There is no shade like a mother, no resort, no security.

no other ever-giving fountain of life like a mother !

Source – Skanda Purana Mo. Ch. 6.103-104

मातृ दिवस  समस्त माताअों तथा मातृत्व के लिए अौर पारिवारिक एवं उनके आपसी संबंधों को सम्मान देने के लिए शुरु किया गया था। यह मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।

Mother’s Day is a celebration honoring the mother of the family, as well as motherhoodmaternal bonds, and the influence of mothers in society. It is celebrated on the second Sunday of months of May.

 

Image courtesy- Chandni Sahay