Category: The Bard’s Apprentice!
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
सितारा
क्या आप जानते हैं? महारामायण या योग वशिष्ठ क्या है?
Maharamayan or Yoga Vasistha – The Science of Self Realization and the Art of Self Realisation.
The Yoga Vasistha is a detailed conversation between Sri Rama and his Spiritual teacher Vasistha Maharshi.
योग वशिष्ठ को ‘महारामायण’ कहा जाता है क्योंकि इसमें वाल्मीकि रामायण से लगभग चार हजार अधिक श्लोक हैं। इसमें करीब 32,000 श्लोक हैं और विषय को समझाने के लिए बहुत सी लघु कहानियां और किस्से इसमें शामिल किए गए हैं। योग वशिष्ठ एक हिंदू आध्यात्मिक ग्रंथ है। जिसे रामायण के लेखक महर्षि वाल्मीकि ने लिखा है। यह आत्म बोध का विज्ञान और आत्म बोध की कला दोनों है। योग वशिष्ठ, श्री राम और उनके आध्यात्मिक गुरु वशिष्ठ महर्षि के बीच एक विस्तृत बातचीत है। अतः मान्यता है कि मानव मन में उठने वाले सभी सवालों के जवाब यह ग्रंथ दे सकता है और मोक्ष पाने में इंसान की मदद कर सकता है।
Vasistha to Rama –
When the mind is at peace and the heart leaps to the supreme truth, when all the disturbing thought- waves in the mind-stuff have subsided and there is unbroken flow of peace and the heart is filled with the bliss of the absolute, when thus the truth has been seen in the heart, then this very world becomes an abode of bliss.
(II:12)
वशिष्ठ राम से – जब मन शांत होता है और हृदय सर्वोच्च सत्य की अग्रसर होता है, जब सभी परेशानियाँ व विचार- मन में तरंगें थम जाती हैं और शांति का अखंड प्रवाह होता है और हृदय इस तरह पूर्ण आनंद से भर जाता है, जब सत्य को हृदय में देखा गया है, तब यह संसार आनंदमय बन जाता है।
Songs of a weaver and Sufi mystic poet !
एक रस्ते पर चलती बहती जिंदगी, जब राह बदल लेती है. तब जिंदगी को और उसका सफर को देखने का एक नया नजरिया बनता है ।
कबीर और रूमी की ये पंक्तियां शायद जिंदगी की उन्हीं फलसफों की बातें करती हैं। कितनी अजीब बात है, अलग-अलग समय… काल में, अलग-अलग जगहों पर दोनों ने एक सी बातें कहीं हैं। चाहें तो इनकी बातों को आध्यात्मिकता से जोड़कर देखा सकतें हैं या इस दुनिया की बातों से जोड़कर। आपको इनमें क्या नजर आता है? आपकी बातें और विचार सादर आमंत्रित है
।We are one, Aren’t we? your thoughts are invited.
The river that flows in you also flows in me.”
― Kabir
When you do things from your soul,
you feel a river moving in you, a joy.”
― Rumi
कई बातें अक्सर भूल जातें
बहुत सी चीज़ें रख कर अक्सर भूल जातें है.
कई नाम, कई काम अक्सर भूल जातें हैं.
पर जो यादें मायूस करतीं हैं,
वे क्यों याद रहतीं हैं?
जबकि कई बातें अक्सर भूल जातें हैं.

रोस्टेड प्रौन रेसिपी

1.प्रौन – 250 ग्राम, साफ किया हुआ।
2. लहसुन पिसा हुआ – दो चम्मच।
3.धनिया और जीरा पाउडर- एक एक चम्मच। सूखा भूना।
4.लाल मिर्च पाउडर – लगभग 1 चम्मच पसंद अनुसार।
5.सूखा आटा – दो चम्मच लगभग।
6.नींबू का रस- एक से दो चम्मच।
7.चाट मसाला – एक चम्मच।
8.नमक- स्वाद अनुसार।
9.बटर स्वाद अनुसार।
10.वुडन स्कूवर – 2
11.सलाद के लिए कटे हुए – लोटो लेट्यूस, या सलाद के पत्ते, टमाटर, शिमला मिर्च और प्याज।
12. सजावट के लिए, आधा सेव पतले पतले फाकों में कटा हुआ
13. फ्रेश क्रीम या मलाई – 3चम्मच।
साफ किये और धुले हुए प्रौन में मसाले – 1-8 तक की सामग्रियां मिलाएँ ।
माइक्रोवेव में प्रौन को 5 से 10 मिनट, या अपने अनुमान से पकाएं।
माइक्रोवेव से निकालकर ठंडा होने दें।वुडन स्कूवर में प्रौन और बीच-बीच में प्याज टमाटर और शिमला मिर्च के टुकड़े लगाएं। इसे आग पर सेंकें। यह काम आप किसी जाली के ऊपर रखकर भी कर सकते हैं। ऊपर से बटर लगाएं। मलाई, नमक और चाट मसाला डालकर सलाद और सजावट के साथ परोसें।
जीवन जी कर, जीवन का अर्थ जाना !
जीवन जी कर,
जीवन का अर्थ मिला.
पुरस्कार या पैसे जीवन
जीने के लिए ज़रूरी हो सकता है.
लेकिन मन की शांति के लिए
अपनापन,सहानुभूति पूर्ण व्यवहार
और मधुर रिश्ते मायने रखते हैं.

शुभ देव दिवाली – कार्तिक पूर्णिमा
शुभ कार्तिक पूर्णिमा !!
कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली या देव दिवाली कहा जाता है. कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार दीपावली के 15 दिन बाद मनाया जाता है. इस दिन माता गंगा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन काशी के सभी गंगा घाटों को दीयों की रोशनी से रौशन किया जाता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है.
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे।
महाभारत के विनाशकारी युद्ध के बाद आज के दिन पांडवों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए स्नान कर दीपदान करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की थी.
सिख सम्प्रदाय में कार्तिक पूर्णिमा का दिन प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था।
कहते है, कार्तिक पूर्णिमा को गोलोक के रासमण्डल में श्री कृष्ण ने श्री राधा का पूजन किया था।
मान्यता है कि, कार्तिक पूर्णिमा को ही देवी तुलसी ने पृथ्वी पर जन्म ग्रहण किया था।
महाकाल
कार्तिक पुर्णिमा, या देव दिवाली की पुर्व संध्या पर शिव नमन !!!
एक दिन देखा शिव का चिता, भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से ।
समझ नहीं आया इतना डर क्यों वहां से जहां से यह भभूत आता हैं।
कहते हैं, श्मशान से चिता भस्म लाने की परम्परा थी।
पूरी सृष्टि इसी राख में परिवर्तित होनी है एक दिन।
एक दिन यह संपूर्ण सृष्टि शिवजी में विलीन होनी है।
वहीं अंत है, जहां शिव बसते हैं।
शायद यही याद दिलाने के लिए शिव सदैव सृष्टि सार,
इसी भस्म को धारण किए रहते हैं।
फिर इस ख़ाक … राख के उद्गम, श्मशान से इतना भय क्यों?
कोलाहल भरी जिंदगी से ज्यादा चैन और शांति तो वहां है।

भस्मपूजन उज्जैन महाकाल में बंद आंखों से – वहाँ उपस्थित होने पर भी यह पूजन देखा महिलाओं के लिए वर्जित है.
आत्मनिरीक्षण !
अकेलापन और एकांत में अंतर है. अकेलापन उबाता है. जब कि एकांत आत्मनिरीक्षण के अवसर देता है।ज़िंदगी में ज़्यादा मूल्यवान है, मन की शांति और दिल में सहानुभूति.



You must be logged in to post a comment.